अफ़रा-तफ़री और अव्यवस्था

ललित भनोट और सुरेश कलमाडी

हर तरफ़ से राष्ट्रमंडल खेलों की आलोचना हो रही है. आयोजन समिति के लोग स्पष्टीकरण देते नहीं थक रहे हैं. कई जगह काम में तेज़ी भी आई है.

लेकिन अव्यवस्था का आलम थमा नहीं है. पिछले दिनों नई दिल्ली के जंतर-मंतर इलाक़े में स्थिति राष्ट्रमंडल खेलों के दफ़्तर में ऐसी अव्यवस्था दिखी कि पूछिए मत.

लगता यही है कि पूरा का पूरा अमला मीडिया के आरोपों पर स्पष्टीकरण की तैयारी करने में लगा हुआ है. यह भी अंदाज़ा होता है कि कोई किसी भी मुद्दे पर मुँह खोलने को तैयार नहीं.

आप राष्ट्रमंडल खेलों में आने वाले राजस्व की बात पूछिए या फिर सुरक्षा व्यवस्था के बारे में- सवाल सवाल ही रह जाते हैं, जवाब नहीं मिलते.

सीडब्लूजी के मुख्यालय में अफ़रा-तफ़री और अव्यवस्था का आलम ये है कि कोई कुछ भी नहीं बता पा रहा है. अब अगर इन्हें अपना मुँह बंद ही रखना है तो दफ़्तर में इतना ताम-झाम क्यों.

इंद्र देवता से दुआ

कुछ दिनों पहले जब बारिश ने राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी पर सवाल उठाए थे, तो बीबीसी के साथ बातचीत में सुरेश कलमाडी ने कहा था कि अच्छा ही है बारिश आई और कमियों का पता चला.

Image caption बारिश के कारण कामकाज पर असर पड़ा है

लेकिन जैसे-जैसे राष्ट्रमंडल खेलों के दिन क़रीब आते जा रहे हैं, तैयारी को लेकर दबाव दिखने लगा है.

मलबे को हटाना हो या फिर तैयार हो चुके स्टेडियमों का निरीक्षण हो, बारिश के कारण ये सब काम प्रभावित हो रहे हैं.

स्टेडियम के निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों की साँस भी अटकी हुई है कि कहीं बारिश के कारण नया विवाद न खड़ा हो जाए.

वे दुआ कर रहे हैं कि इतनी बारिश न हो कि बचा हुआ काम प्रभावित हो और जो काम हो चुका है, उनकी कोई कमियाँ सामने आए.

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