नो बॉल और सहवाग का शतक

  • 17 अगस्त 2010
Image caption सहवाग की शानदार पारी ने भारत को जीत दिलाई.

श्रीलंकाई गेंदबाज़ सूरज रंदीव ने अपने वनडे करियर के 16वें मैच में पहली नो बॉल फेंकी.

आप सोचेंगे कि इसमें क्या बड़ी बात है?

श्रीलंका के विरुद्ध त्रिकोणीय क्रिकेट शृंखला में भारत को जीत दिलाने वाली रंदीव की उस पहली नो बॉल ने एक विवाद को जन्म दे दिया है.

विवाद इस पर नहीं है कि भारत नो बॉल पर कैसे जीता बल्कि विवाद की वजह ये है कि उनकी उस नो बॉल की वजह से वीरेंदर सहवाग वनडे के 13वें शतक से चूक गए और 99 पर नॉट आउट रह गए.

दांबुला में हो रहे वनडे में श्रीलंका के 170 रनों के जवाब में भारत ने 34 ओवरों में चार विकेट के नुक़सान पर 166 रन बना लिए थे.

एक रन का मामला

अगला ओवर सूरज रंदीव का था जिसमें भारत को जीत के लिए पाँच रन चाहिए थे और वीरेंदर सहवाग को शतक के लिए सिर्फ़ एक रन की ज़रूरत थी.

रंदीव की पहली गेंद नीची रही और सहवाग के साथ ही विकेट कीपर भी उसे नहीं पकड़ सके और भारत को बाइ के चार रन मिल गए.

अब भारत को जीत के लिए और सहवाग को शतक के लिए एक रन की ज़रूरत थी.

रंदीव ने अगली दो गेंदें सीधी फेंकीं और सहवाग कोई रन नहीं बना सके.

चौथी गेंद फेंकने के दौरान रंदीव का पहला पैर तो क्रीज़ के बाहर था ही उनका पिछला पैर भी ऐसा लग रहा था जैसे क्रीज़ को पार कर जाएगा.

Image caption रंदीव के वन डे करियर का ये पहला नो बॉल था.

उस गेंद पर सहवाग ने छक्का जड़ दिया और हाथ उठाकर दर्शकों का अभिवादन स्वीकार किया- ये समझते हुए कि उनका शतक पूरा हो गया.

मगर जब उन्होंने सामने देखा तो पाया कि रंदीव की गेंद को अंपायर ने नो बॉल घोषित कर दिया था. उसके नो बॉल घोषित होते ही भारत को एक रन मिल गया, यानी सहवाग का छक्का पूरा होने से पहले ही भारत मैच जीत गया.

पहली नो बॉल

रंदीव ने इससे पहले 15 मैचों की 14 पारियों में एक भी नो बॉल नहीं फेंकी थी.

इस पारी में भी उस गेंद से पहले उनकी कोई नो बॉल नहीं थी और जो बॉल नो बॉल हुई उसमें उनका पैर इतना ज़्यादा आगे था कि उसके स्वाभाविक नो बॉल होने पर बहस हो रही है. यानी वो शायद जानबूझकर नो बॉल डाली गई थी, जिससे सहवाग का शतक पूरा न हो सके.

जिसने आज तक कभी नो बॉल नहीं डाली वो इस अहम मौक़े पर ऐसी नो बॉल कैसे डाल सकता है.

वैसे वीरेंदर सहवाग ने इसमें भी खेल भावना का परिचय दिया. मैच के बाद उनका कहना था, “ये तो अक़सर होता है. जब एक बल्लेबाज़ 99 के स्कोर पर हो और दोनों टीमों का स्कोर बराबरी पर तो गेंदबाज़ नो बॉल या वाइड फेंकने की कोशिश करते हैं. क्रिकेट में तो ये होता है. क्या कर सकते हैं, ठीक है.”

यानी सही अर्थों में रंदीव की वो गेंद खेल भावना के अनुरूप नहीं मानी जा सकती.

इसके अलावा क्रिकेट के नियमों को लेकर भी कुछ सवाल उठे हैं कि चूँकि वो नो बॉल सहवाग की कुल खेली गई गेंदों में से एक मानी जाएगी तो उस पर उनका लगाया गया छक्का भी मान्य होना चाहिए.

मगर क्रिकेट के नियम इस बारे में स्पष्ट हैं कि जैसे ही कोई टीम जीतने लायक़ स्कोर पा लेती है तो उसके बाद लगने वाले चौका या छक्का नहीं गिना जाता.

भारत को इस मैच में एक बोनस अंक के साथ जीत मिल गई और टूर्नामेंट में उसकी उम्मीदें बरक़रार हैं मगर उस अंतिम गेंद ने भारतीय प्रशंसकों के अलावा आम क्रिकेट प्रेमियों के मुँह का स्वाद भी खट्टा किया है.

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