समरेश को द्रोणाचार्य की तलाश

खेलों की तैयारियाँ

प्रस्तुति: पवन नारा

म्युनिख में हुई विश्व चैंपियनशिप से लौटे समरेश जंग कहते हैं कि उनकी तैयारियाँ अच्छी चल रही हैं और वो दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

म्युनिख के अनुभव को बयान करते हुए समरेश कहते हैं, “अनुभव ठीक था, बहुत बढ़िया नहीं. विश्व चैंपियनशिप में मैं 16वें स्थान पर रहा.”

आप को जानकर ताज्जुब होगा कि बीजिंग ओलंपिक के बाद से ही समरेश निशानेबाज़ी की जंग अकेले ही लड़ रहे हैं. उनके पास फिलहाल कोई कोच नहीं है.

खेल मंत्रालय की ओर से समरेश के कोच का क़रार नहीं बढ़ाया गया. एक बार उन्हें छह महीने तक के लिए कोच मिला. पर छह महीने का छोटा क़रार होने के कारण बाद में कोई कोच उनके साथ नहीं जुड़ा.

ऐसे में समरेश अपनी तैयारी कैसे कर रहें हैं?

इसके जवाब में समरेश कहते हैं, “अपने पुराने अनुभव के हिसाब से तैयारी कर रहा हूँ. कोई समस्या होती है तो मैं कभी-कभी अपने पुराने कोच से संपर्क कर लेता हूँ.”

इन सब परेशानियों के बावजूद समरेश को भरोसा है कि वो बेहतर प्रदर्शन कर पाएँगे.

तस्वीरें

समरेश जंग की तस्वीरें

  •  समरेश जंग
    निशानेबाज़ समरेश जंग इनदिनों राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में जुटे हुए हैं
  •  समरेश जंग
    मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में समरेश ने पाँच स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता था.
  •  समरेश जंग
    दोहा में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था
  •  समरेश जंग
    मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में वे सर्वश्रेष्ठ एथलीट घोषित किए गए थे.
  •  समरेश जंग
    समरेश की पत्नी भी खेल में सक्रिय हैं.
  •  समरेश जंग
    व्यस्तता के बावजूद अपनी निजी ज़िंदगी के लिए कुछ समय निकाल ही लेते हैं समरेश

परिचय

समरेश जंग का जन्म 19 मई 1970 को दिल्ली में हुआ. समरेश केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर तैनात है. राष्ट्रमंडल खेलों में समरेश का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है पर चीन में ओयोजित हुए बीजींग ओलंपिक में वो कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाए. इस पर समरेश कहते है "मैं ये तो नहीं कहुंगा कि मेरा प्रदर्शन उतना अच्छा था लेकिन अनुभव के लिहाज से मेरे लिए वो अनुभव काफी अच्छा था."

सुनिए समरेश जंग का परिचय

समरेश निशानेबाज़ो के लिए आने वाली परेशानियों के बारे मे कहते है. "पहले तो हथियार हासिल करने में दिक्कत होती थी लेकिन अब हर खिलाड़ी के पास अपना हथियार है इसलिए इसको लेकर कोई समस्या नहीं है लेकिन बंदूक के लिए गोलियां हासिल करने में अभी भी समस्या होती है.शूटिंग के लिए व्यक्तिगत तौर पर खिलाडी सिर्फ 15 हज़ार गोलियां ही आयात कर सकते हैं लेकिन किसी भी कंपनी के लिए इतनी कम गोलियां भेजना आसान नहीं होता, जिसे फेडेरेशन या सरकार ही मंगवा सकती है."

उपलब्धियां

समरेश जंग ने मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेल-2002 में 50 मीटर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा मे दो स्वर्ण जीते. इसके अलावा उन्होंने तीन रजत पदक भी हासिल किए.

इसके बाद मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेल-2006 में समरेश ने पाँच स्वर्ण, एक रजत और एक काँस्य पदक जीते.

स्वर्ण पदक

पुरुषों की 50 मीटर पिस्टल प्रतियोगिता में

पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में

पुरुषों की 25 मीटर पिस्टल प्रतियोगिता में

पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में

पुरुषों की 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल प्रतियोगिता में

रजत पदक

पुरुषों की 50 मीटर पिस्टल प्रतियोगिता में

काँस्य पदक

पुरुषों की 25 मीटर पिस्टल प्रतियोगिता में

इस उपलब्धि के लिए उनको 'सर्वश्रेष्ठ एथलीट' का सम्मान भी दिया गया. वे भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी बनें जिन्हें इस सम्मान से नवाज़ा गया.

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