क्या बिना अनहोनी के होंगे खेल?

सुरक्षा व्यवस्था

दिल्ली के राष्ट्रमंडल खेल यानी विवाद ही विवाद. भ्रष्टाचार के आरोप और उनका जवाब. कमेटियों का गठन और अधिकारियों की बर्ख़ास्तगी. लेकिन इन सबके बीच सुरक्षा जैसा अहम मुद्दा जैसे गौड़ हो गया है.

पर अधिकारी बेफ़िक्र नहीं. ये सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े लोगों का दावा है. क्या दिल्ली बिना किसी अनहोनी के राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन करा पाएगी, ये भी एक अहम सवाल है.

पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया की एक तैराक डॉन फ़्रैजर ने यह कह कर लोगों को सकते में डाल दिया कि दिल्ली 1972 के म्यूनिख ओलंपिक जैसी घटना को रोकने के लिए तैयार नहीं है. म्यूनिख ओलंपिक के दौरान फ़लस्तीनी चरमपंथी गुट ने इसराइली टीम के कुछ सदस्यों को अगवा किया और फिर उनकी हत्या कर दी थी.

लेकिन एक मोर्चे पर राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति हो, राष्ट्रमंडल फ़ेडरेशन हो या सुरक्षा एजेंसियाँ- सब ताल ठोंक कर दावा कर रही हैं, वो है सुरक्षा व्यवस्था.

टॉप क्लास सुरक्षा व्यवस्था, कोई कमी नहीं छोड़ेंगे, ख़ुफ़िया व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त है, सभी राज्यों से सहयोग मिल रहा है. चरमपंथी हमले के ख़तरे का पूरा अंदाज़ा है.

पिछले दिनों राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी का जायज़ा लेने आए राष्ट्रमंडल खेल फ़ेडरेशन के प्रमुख माइक फ़ेनेल ने संवाददाता सम्मेलन में दावा किया था कि दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के लिए सुरक्षा व्यवस्था टॉप क्लास की है.

टॉप क्लास

उन्होंने कहा था, "सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता को देखते हुए हमने इसे अपने एजेंडा में टॉप पर रखा था. जैसा कि आप जानते हैं कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में सुरक्षा व्यवस्था अहम होती है. मैं ये कहना चाहता हूँ कि दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और योजना टॉप क्लास की है. पहले तो ख़ुफ़िया व्यवस्था है, पूरे भारत के लिए सुरक्षा व्यवस्था की गई है, दिल्ली के लिए है और खेलों और आयोजन स्थलों के लिए ख़ास व्यवस्था है.

फ़ेनेल ने बताया था कि जुलाई में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई थी, जिसकी रिपोर्ट काफ़ी अच्छी है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रमंडल खेल फ़ेडरेशन ने प्राइवेट सुरक्षा सलाहकारों की भी सेवाएँ ली है.

ये सलाहकार सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी भी करेंगे और पूरे खेल के दौरान दिल्ली में मौजूद रहेंगे. राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति हो, दिल्ली पुलिस हो या अन्य एजेंसियाँ ज़िम्मेदारी काफ़ी बड़ी है.

लेकिन एक मौक़ा ऐसा भी आया था, जब दिल्ली पुलिस और आयोजन समिति इस मुद्दे पर आमने-सामने थे. आयोजन समिति ने अतिथियों की सूची समय पर उपलब्ध नहीं कराई थी. लेकिन अब समन्यव को लेकर सारा विवाद निपट चुका है.

आश्वासन

दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त और राष्ट्रमंडल खेलों में सुरक्षा का काम देख करे नीरज कुमार का कहना है कि सारा विवाद निपट चुका है. और वे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं.

उन्होंने कहा, "दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान सुरक्षा मुकम्मल रहेगी. किसी प्रकार की फ़िक्र करने की कोई बात नहीं. ये बात बार-बार अलग-अलग फ़ोरम में बताई जा चुकी है. जितने भी सुरक्षा समन्वयक अलग-अलग देशों से आते हैं, उन्हें संतोषजनक तरीक़े से ये बात बताई जा चुकी है कि यहाँ पर क्या व्यवस्था होगी"

दिल्ली पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियों ने मिलकर सुरक्षा व्यवस्था का बेहतरीन खाका तैयार किया है और दावा ये है कि बिना अनुमति के कोई परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा.

तो कैसी होगी सुरक्षा व्यवस्था, राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के प्रभारी नीरज कुमार कहते हैं, "एथलीट जब दिल्ली शहर में क़दम रखेंगे और जिस समय तक वे यहाँ से चले नहीं जाते, उनकी सुरक्षा का पूरा प्रबंध है."

उन्होंने बताया कि आयोजन स्थलों और खेल गाँव में चार स्तर की सुरक्षा व्यवस्था है- आउटर, मिडिल, इनर और एक्सक्लूज़िव ज़ोन.

ख़ास व्यवस्था

नीरज कुमार ने सुरक्षा व्यवस्था के बारे में विस्तार से बताया, "जब खिलाड़ी और अधिकारी यात्रा करेंगे, तो रास्तों पर ख़ास व्यवस्था होगी. द्रुत प्रतिक्रिया टीम होगी, कमांडो होंगे, ऊँची इमारतों पर स्नाइपर होंगे. उनके लिए ख़ास लेन भी होगा."

उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था में सिर्फ़ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान ही नहीं कई अर्धसैनिक बलों के जवान भी होंगे. इनसे दिल्ली पुलिस का सीधे संपर्क होगा और गृह मंत्रालय के माध्यम से भी समन्वय होगा.

ये तो रही ज़मीनी तैयारी. लेकिन दिल्ली पुलिस ने सिर्फ़ ज़मीनी सुरक्षा की तैयारी नहीं की है, हवाई सुरक्षा की भी तैयारी है और हेलिकॉप्टर से आयोजन स्थलों और खिलाड़ियों के आने-जाने के दौरान रास्तों पर नज़र रखी जाएगी.

नीरज कुमार ने बताया, "हवाई सुरक्षा के लिए वायु सेना से कहा गया है. हेलिकॉप्टर निगरानी करेंगे. हेलिकॉप्टर में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के जवान भी मौजूद रहेंगे."

तो दिल्ली पुलिस की तैयारी है ज़बरदस्त. लेकिन क्या तैयारी भर से ही मामला निपट जाएगा. मामला जब इसे व्यवहारिक रूप देने का आता है, तो कई तरह की परेशानियाँ सामने आती हैं, तो क्या सब कुछ सही तरीक़े से कर पाएगी दिल्ली पुलिस.

दिल्ली पुलिस और ख़ुफ़िया ब्यूरो के पूर्व प्रमुख अरुण भगत को भी दिल्ली पुलिस की तैयारी पर पूरा भरोसा है.

अरुण भगत कहते हैं, "दिल्ली पुलिस की एक ख़ासियत ये है कि बड़ी-बड़ी व्यवस्था में उसे महारत हासिल हो गई है. दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, दुर्गा पूजा जैसे बड़े आयोजन होते है और दिल्ली पुलिस इन सब आयोजनों की अच्छी तैयारी करती है. जहाँ तक आतंकवादी हमले की बात है, तो कोई ये दावा नहीं कर सकता कि ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता. दिल्ली बड़ा शहर है. लेकिन जहाँ तक आयोजन स्थलों और खेल गाँव का सवाल है, उनकी सुरक्षा में कोई चूक नहीं होनी चाहिए."

लेकिन क्या इतने स्तर की सुरक्षा और अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय में परेशानी नहीं आएगी, अरुण भगत का मानना है कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि ये एजेंसियाँ मिलकर काम कर रही हैं.

संदेह

उन्होंने कहा, "केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल दिल्ली पुलिस के साथ आज से नहीं 20-30 सालों से काम कर रही है. इनके अलावा अर्धसैनिक बलों के साथ भी उनके समन्वय में कोई कमी नहीं आनी चाहिए. वैसे भी ये सभी सुरक्षाकर्मी स्थानीय अधिकारियों के नेतृत्व में ही काम करेंगे."

कमांडो के विशेष दस्ते भी तैयारी में जुटे हुए हैं

लेकिन बिना दिल्लीवासियों के सहयोग के सुरक्षा एजेंसियों को भी परेशानी झेलनी पड़ सकती है. आम लोगों को जागरुक करने का सिलसिला चल रहा है. रेडियो-टीवी पर विज्ञापन का प्रसारण हो रहा है.

दिल्ली की सुरक्षा के बारे में आम लोगों की मिली-जुली राय है. कुछ लोग ये मानते हैं कि दिल्ली पुलिस ऐसे आयोजनों की सुरक्षा में सक्षम है, तो कई लोग इस पर संदेह व्यक्त कर रहे हैं.

दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती है. चुनौती राष्ट्रमंडल खेलों के सुरक्षित आयोजन की. तैयारी पुख़्ता है, योजनाएँ कारगर है....लेकिन काग़ज़ी तैयारी ज़मीनी सच्चाई में कितनी बदलेगी- ये अक्तूबर में पता चल जाएगा.

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