रेस्पिरेटर पर शेरा!

नब्बे के दशक में सनी दओल की फ़िल्म आई थी दामिनी जिसका एक डायलॉग बहुत मशहूर हुआ था- तारीख़ पे तारीख़. दरअसल इस दृश्य में कड़क मिज़ाज वाले वकील बने सनी दओल अदालतों में सुनवाई के दौरान होने वाली देरी और हर बार एक नई तारीख़ दिए जाने पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर रहे हैं.

इनदिनों कॉमनवेल्थ अधिकारियों और शीला दीक्षित के बयान सुनकर अकसर दामिनी के डायलॉग की याद आ जाती है.बात चाहे मलबा हटाने की हो, स्टे़डियमों के काम की हो या फिर खेल गाँव की- हर बार ये सब काम पूरे करने के लिए एक नई तारीख़ दे दी जाती है कि फ़लां तिथि तक काम ख़त्म हो जाएगा. पर ऐसा होता नहीं है...यानी तारीख़ पे तारीख़. खेलों के थीम सॉन्ग को भी 16 अगस्त को लॉन्च किया जाना था लेकिन वहाँ भी सुर-ताल बिगड़ा हुआ था और लेट लतीफ़ी का आलम रहा. अब थीम सॉन्ग के लिए 28 अगस्त की नई तारीख़ दी गई है.

शेरा को बचाओ

कहते हैं कि जितने मुँह उतनी बातें. राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर भी कुछ ऐसी ही स्थिति है. अधिकारियों से लेकर खिलाड़ियों और पत्रकारों से लेकर आम लोग- सबकी अपनी अपनी राय है और सब अपनी टिप्पणियों के ज़रिए बात रख रहे हैं..

लेकिन एक कार्टूनिस्ट का अंदाज़ ही अलग होता है. वो बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कह जाता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में कार्टून छपा था जिसमें राष्ट्रमंडल खेलों के शुभंकर शेरा को रेस्पिरेटर या श्र्वासयंत्र पर सांस लेते दिखाया गया है. ज़ाहिर है ये कार्टून क्या कहना चाहता है समझाने की ज़रूरत नहीं है.

जैसा काम, वैसी वर्दी

राष्ट्रमंडल खेलों का आधिकारिक मर्चेन्डाइज़िंग जैसे टी-शर्ट, टोपी वगैरह अभी तक बाज़ार में नहीं आए है. लेकिन इस दौरान काम करने वाले वॉलन्टियर्स और कॉमनवेल्थ खेलों से जुड़े कर्मचारियों की वर्दी ज़रूर लोगों के सामने पेश कर दी गई है.

खेलों के दौरान ये लोग विशेष वर्दी पहने नज़र आएँगे. स्वेच्छा से काम करने वाले वॉलन्टियर्स और कर्मचारियों की वर्दी एक जैसी नहीं होगी. वॉलन्टियर्स को सफ़ेद और लाल रंग की टी-शर्ट, टोपी, हाथ में बोतल, कमर पर बाँधने के लिए पाउच और बारिश से बचने के लिए जैकेट दिया गया है. तकनीकी स्टाफ़, सुरक्षा कर्मचारी..सबकी पोशाक अलग तरह से डिज़ाइन की गई है.

इस मौके पर आमंत्रित निशानेबाज़ अभिनव बिंद्रा का तो जैसे दर्द जुबां पर आ गया. उनका कहना था कि बाक़ी सब बातें बहुत हो गईं, अब खिलाड़ियों पर ध्यान दो. उन्होंने कहा कि किसी भी खेल प्रतियोगिता के असली स्टार तो खिलाड़ी ही होते हैं, इसलिए अब सारा ध्यान खिलाड़ियों पर होना चाहिए.

'डेंगू भी कॉमनवेल्थ की देन'

राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन को लेकर कथित भ्रष्ट्राचार,बदइंतज़ामी और लेटलतीफ़ी के आरोप लगते रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद तो दिल्ली में डेंगू फैलने का ठीकरा भी कॉमनवेल्थ खेलों के सर फ़ोड रहे हैं.

मंत्रीजी बयान दे रहे हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों की वजह से दिल्ली खुदी पड़ी है और बारिश भी काफ़ी हुई है जिस कारण पानी जमा हो गया है और मच्छर पनप रहे हैं.

राष्ट्रमंडल खेलों से ठीक पहले दिल्ली में डेंगू के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं जिस पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी चिंता जताई जा रही है.

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