घर तो सज गया लेकिन मेहमान कहां हैं

  • 28 अगस्त 2010
नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों का शुभंकर शेरा

अक्तूबर में राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान उम्मीद की जा रही है कि भारत में और ख़ासकर इसकी राजधानी दिल्ली में, जहां ये खेल हो रहे हैं, बड़ी संख्या में पर्यटक आएंगे. इससे एक तरफ़ भारत में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तो दूसरी तरफ़ राजस्व भी मिलेगा.

पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ो के अनुसार राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान सिर्फ़ दिल्ली में ही लगभग एक लाख विदेशी और घरेलू पर्यटक आएंगे जिनके रहने के लिए 40 हज़ार कमरों की ज़रूरत होगी.

इसके लिए राष्ट्रमंडल आयोजन समिति ने मौजूदा छोटे-बड़े होटल, गेस्ट हाउस के साथ करार किया है और साथ ही कई नए होटलों के निर्माण के लिए टेंडर भी दिए गए थे. इसके अलावा दिल्ली सरकार ने एक बेड एंड ब्रेकफ़ास्ट स्कीम भी शुरू की है.

मौजूदा स्थिति

पर्यटक, मीडिया और विभिन्न देशी-विदेशी अधिकारी राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के गेम्स ट्रैवल ऑफ़िस, जीटीओ, के ज़रिए ठहरने का इंतज़ाम कर सकते हैं.

जीटीओ के एक अधिकारी सुनील कुंडू के अनुसार अगस्त के शुरू तक पर्यटकों ने लगभग 125-130 कमरे बुक कराए थे.

वो कहते हैं, "शुरू में बुकिंग्स थोड़ी धीमी रही जिसके कारण हमें पता है. एक तो टेस्ट इवेंट्स हो रहे थे, इसके अलावा दूसरे देशों की टीमों की चयन प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई थी. और जब तक चयन नहीं हो जाता, तब तक उन खिलाड़ियों के समर्थक, परिवार और दोस्त बुकिंग्स नहीं करते हैं. हमारे लिए अगस्त और सितंबर के महीने ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं जब हमें काफ़ी बुकिंग्स की उम्मीद है."

लेकिन आधिकारिक दावों से परे स्थिति क्या है? पहाड़गंज और करोलबाग जैसे इलाक़ों में स्थित कई छोटे होटलों और गेस्ट हाउसों के मालिकों को राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान बढ़िया मुनाफ़े की उम्मीद थी.

लेकिन दिल्ली होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप खंडेलवाल कहते हैं, "अब तक सिर्फ़ तीन या चार प्रतिशत बुकिंग्स ही हुई हैं. इसके पीछे डेंगू, स्वाइन फ़्लू और भ्रष्टाचार जैसी नकारात्मक ख़बरे थीं. इसके अलावा एक बड़ी वजह ये भी है कि एशिया में भारत में (होटल इत्यादि ) रहना सबसे महंगा हो गया है. भारत में होटल, गेस्टहाउस की इंफ्रास्ट्रक्चर क़ीमतें ज़्यादा होने की वजह से, कमरों के दाम ज़्यादा हैं. जो पर्यटक तीन से पांच हज़ार रुपयों में होटल ढ़ूंढ रहा है, उसे यहां उस क़ीमत पर गेस्ट हाउस मिल रहा है जबकि पड़ोसी देशों में उसे इतनी ही क़ीमत पर पांच सितारा होटल मिल सकता है. इसी वजह से पर्यटक अक्तूबर में दिल्ली से दूर रह रहे हैं.”

बेड एंड ब्रेक्फ़ास्ट

नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान आने वाले बजट पर्यटकों के लिए दिल्ली सरकार ने ख़ास बेड एंड ब्रेकफ़ास्ट स्कीम शुरू की और ज़्यादा से ज़्यादा दिल्लीवासियों को इसका हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया.

लाजपत नगर के सुधीर त्रेहन ने भी राष्ट्रमंडल खेलों को ध्यान में रखकर बेड एंड ब्रेकफ़ास्ट शुरु किया. लेकिन वो कहते हैं, "मेरे पास इन खेलों के लिए अब तक न तो बुकिंग और न ही कोई पूछताछ आई है. लेकिन जैसे सुनने में आ रहा है कि काफ़ी बड़ी संख्या में पर्यटक आएंगे और कमरों की कमी है, तो शायद आने वाले दिनों में कुछ हो जाए."

दिल्ली नहींचले

पर्यटन और विकास के क्षेत्र में काम करने वाली बैंगलोर की स्वंयसेवी संस्था इक्विटेबल टूरिज़म ऑप्शन्स, इक्वेशन्स, की अदिति चंचानी पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों को सही नहीं मानती.

अदिति कहती हैं कि पर्यटन मंत्रालय के एक लाख पर्यटकों के दावे से कहीं कम पर्यटक दिल्ली आएंगे.

अदिति कहती हैं, "पिछले ओलंपिक्स और ऐसे ही कई बड़े खेल आयोजनों के विश्लेषण से जो बात सामने आती है वो ये कि इनके दौरान उन शहरों में पर्यटन बढ़ता नहीं है, उल्टे कम हो जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि पर्यटकों को पता होता है कि उस दौरान उन शहरों में भीड़-भाड़ होगी, रहने की जगह मुश्किल से मिलेगी और सब कुछ महंगा होगा. वैसे भी भारत आने वाला पर्यटक ज़्यादातर सांस्कृतिक अनुभव के लिए आता है न कि खेल देखने के लिए."

न सिर्फ़ पर्यटक बल्कि कई दिल्लीवासी भी अक्तूबर में होने वाली भीड़-भाड़ और बाकी परेशानियों के चलते उस दौरान दिल्ली से बाहर जाने की योजना बना रहे हैं.

वसंत कुंज में रहने वाली पेशे से वकील सीमा मिश्रा भी उन्हीं में से एक हैं. सीमा कहती हैं, "हम कुछ दोस्त, बच्चों को लेकर, उस दौरान दिल्ली से बाहर निकलने की सोच रहे हैं क्योंकि दिल्ली में रहना बहुत मुश्किल होगा. हमें नहीं पता कि इतने ट्रैफ़िक और भीड़ में एक जगह से दूसरी जगह कैसे पहुँचेंगे."

सीमा को देश के बाक़ी हिस्सों से पर्यटकों के आने की भी बहुत ज़्यादा उम्मीद नहीं है.

वो कहती हैं, "मैं अपने काम के सिलसिले में देश के काफ़ी छोटे-बड़े शहरों में घूमती हूँ. वहाँ भी लोगों को राष्ट्रमंडल खेलों के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है. अगर वो आना भी चाहते हैं तो उन्हें इसकी कुछ तो तैयारी करनी पड़ेगी. मसलन कहाँ ठहरेंगे, कहाँ खेल देखने जाएंगे. लेकिन अब तक खेलों का माहौल दिल्ली या देश में नहीं बना है. कहीं खेलों की चर्चा ही नहीं हो रही है. चर्चा हो रही है तो केवल इससे जुड़े भ्रष्टाचार की."

यानी चर्चा तो रही है लेकिन ग़लत कारणों से. ऐसे में राष्ट्रमंडल खेल क्या वाकई दिल्ली और भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने में सफल होंगे, इसके लिए खेल शुरू होने तक का इंतज़ार करना होगा.

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