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खेलों की तैयारियां

वीरधवल खाड़े

नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के शीर्ष तैराक वीरधवल खाड़े फ़्री स्टाइल और बटरफ़्लाई वर्गों मे हिस्सा लेंगे. ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ़्रीका जैसे देशों से कड़े मुक़ाबले के बावजूद उन्हें उम्मीद है कि वो पदक जीत पाएंगे.

वीरधवल कहते हैं, "इस साल हमारी तैयारी बहुत अच्छी चली है. मेरे इवेंट्स में ईमन सलीवन, एशली कालस, एंड्रयू लॉरेन्स्टीन, जैसे ओलंपिक मेडलिस्ट हैं. अगर मेरे बेस्ट टाइम और उनके बेस्ट टाइम की तुलना की जाए तो कोई ख़ास फ़र्क नहीं है और उम्मीद है कि इस साल की ट्रेनिंग के बाद ये फ़र्क और भी कम हो जाएगा और मैं पदक जीत पाऊंगा."

वीरधवल के कोच निहार अमीन मानते हैं कि वीरधवल की प्रतिभा के साथ ही उनका आत्मविश्वास भी उनकी बड़ी ताक़त है.

अमीन कहते हैं, "वीरधवल किसी से डरता नहीं है और आत्मविश्वास से भरा है. वो फ़ाइनल में तो ज़रूर पहुँचेगा और शायद एक या दो मेडल्स भी जीत सकता है."

लेकिन कोच अमीन कहते हैं, "भारत में प्रतिस्पर्धा की कमी है. साल में सिर्फ़ एक ही प्रतियोगिता है और वो है राष्ट्रीय प्रतियोगिता. लेकिन बाहर कम से कम सौ प्रतियोगिताएं होती हैं. इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक आने के लिए भारतीय तैराकों को विदेश में प्रतियोगितायों में भाग लेना ज़रूरी है."

भारत में तैराकी को बढ़ावा देने में वीरधवल सरकार, कॉरपोरेट जगत के साथ ही मीडिया का भी अहम रोल मानते हैं.

वो कहते हैं, "मुझे लगता है कि मीडिया को दूसरे खेलों पर भी ध्यान देना चाहिए. जब टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा रैंकिंग में 10 स्थान नीचे गिर जाती है तो वो बहुत बड़ी ख़बर बन जाती है. लेकिन जब मै और संदीप सेजवाल विश्व में शीर्ष साठ में जगह बनाते हैं, तो उसे बिलकुल कवरेज नहीं मिलता. मुझे लगता है कि दूसरे खेलों को भी कवरेज मिलना चाहिए जिससे उन्हें बढ़ावा मिलेगा."

वीरधवल मानते हैं कि भारत में खेल होने की वजह से खिलाड़ियों पर ज़्यादा दबाव होगा. वो कहते हैं, "दबाव तो होगा लेकिन मैं हमेशा दबाव में ज़्यादा बेहतर प्रर्दशन करता हूं. तो उम्मीद है कि लोगों के समर्थन के चलते मैं अच्छा प्रर्दशन करुंगा और पदक जीतूंगा."

निकट भविष्य में वीरधवल खाड़े राष्ट्रमंडल खेलों में पदक पाना चाहते हैं लेकिन उनकी निगाहें इन खेलों से कहीं आगे इसी साल नवंबर में होने वाले एशियाई खेल, 2011 विश्व चैम्पियनशिप और 2012 लंदन ओलंपिक पर हैं.

परिचय

वीरधवल खडे

29 अगस्त 1991 को कोल्हापुर, महाराष्ट्र, में जन्मे वीरधवल खाड़े भारत के चोटी के तैराकों में से एक हैं. उनसे उम्मीद की जा रही है कि वो भारत को राष्ट्रमंडल खेलों में तैराकी का पहला पदक दिलाएं.

वीरधवल को तैराकी अपनाने के लिए उनके पिता ने प्रेरित किया क्योंकि उनका मानना था कि टीम खेल में किसी एक खिलाड़ी की ग़लती से हार हो सकती है जबकि तैराकी जैसे व्यक्तिगत खेल में सबकुछ व्यक्ति की ख़ुद की मेहनत पर निर्भर करता है.

2001 में जूनियर नेशनल्स में वीरधवल को पहला मेडल मिला जिसके बाद वो खेल के प्रति गंभीर हो गए. आज वीरधवल 50 और 100 मीटर फ़्री स्टाइल के साथ-साथ 50 और 100 मीटर बटरफ़्लाई वर्गों में राष्ट्रीय चैंपियन हैं. इसके अलावा उनके नाम कुछ राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी हैं.

सुनिए सुनिए : वीरधवल खाडे का परिचय

उपलब्धियां

  • 2010 फ़ेडेरेशन कप एक्वाटिक्स मीट चार स्वर्ण पदक
  • 2009 एशियन तैराकी चैंपियनशिप एक रजत, तीन कांस्य पदक
  • 2009 एशियन इंडोर तैराकी चैंपियनशिप एक स्वर्ण, तीन कांस्य पदक
  • 2009 एशियन एज ग्रुप तैराकी चैंपियनशिप चार स्वर्ण, दो रजत, एक कांस्य
  • 2009 जरमन स्विमिंग चैंपियनशिप स्वर्ण, 50 मी बटरफ़्लाई
  • 2008 राष्ट्रमंडल युवा खेल तीन स्वर्ण, तीन रजत पदक
  • 2008 बीजिंग ओलंपिक खेल तीन वर्गों में हिस्सा लिया
  • 2008 सिंगापुर नेशनल स्विमिंग चैंपियनशिप दो स्वर्ण, एक रजत, एक कांस्य
  • 2008 मलेशिया इंविटेशन ओपन तीन स्वर्ण, दो रजत पदक

वीरधवल पिछले कुछ सालों से विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं. उन्होंने एशियन स्विमिंग, एशियन इनडोर, एशियन एज ग्रुप जैसी प्रतियोगिताओं में पदक भी जीते हैं.

पंद्रह साल की उम्र में वीरधवल, ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफ़ाई करने वाले अब तक के सबसे कम उम्र के तैराक बने.

2008 बीजिंग ओलंपिक्स में 50, 100 और 200 मीटर फ़्री स्टाइल वर्गों में भारत का प्रतिनिधित्व किया. दो से ज़्यादा वर्गों में भाग लेने वाले वो पहले भारतीय तैराक बने.

2008 में ही पुणे में हुए राष्ट्रमंडल युवा खेलों में वीरधवल ने तीन स्वर्ण और तीन रजत पदक जीते जो किसी भी भारतीय खिलाड़ी की ओर से जीते गए सबसे ज़्यादा पदक थे.

उसी साल वो अंतरराष्ट्रीय रैंकिग में शीर्ष सौ में जगह बनाने वाले पहले भारतीय तैराक बने जबकि 2009 में वो शीर्ष साठ में पहुंचे.


तस्वीरें

  • वीरधवल खाडे
    वीरधवल खाडे 50 और सौ मीटर फ़्रीस्टाइल और 50 और सौ मी बटरफ़्लाई में नेशनल रिकॉर्ड धारक हैं.
  • वीरधवल खाडे
    वीरधवल खाडे ने 2008 पुणे राष्ट्रमंडल युवा खेलों में तीन स्वर्ण और तीन रजत पदक जीते.
  • संदीप सेजवाल
    संदीप सेजवाल 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.
  • निहार अमीन
    वीरधवल खाडे अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के साथ ही कोच निहार अमीन को भी देते हैं.
  • तैराकी पूल
    वीरधवल खाडे और संदीप सेजवाल बैंगलोर में राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी कर रहे हैं.

कुछ खट्टा-मीठा

वीरधवल खडे

वीरधवल खाड़े अपने पिता और कोच निहार अमीन को अपना आदर्श मानते हैं और सफलता का श्रेय इन दोंनो को देते हैं.

वो मानते हैं कि तैराकी एक महंगा खेल है और विदेश की तुलना में भारत में इसके लिए बहुत कम सुविधाएँ हैं. वो मानते हैं कि अगर वो विदेश में होते तो शायद बेहतर सुविधाओं के चलते वो बेहतर परफ़ोर्म कर सकते थे.

लेकिन वो कहते हैं कि भारत में रहने के भी कई फ़ायदे हैं. वीरधवल का कहना है कि विदेश में अपने वर्ग में उनकी प्रतिस्पर्धा बहुत से और खिलाड़ियों से होती लेकिन भारत में वो शीर्ष तैराक हैं.

इसलिए जब भी पदक जीत कर आते हैं तो जिस तरह का मान-सम्मान उन्हें भारत में मिलता है वैसा शायद विदेश में नहीं मिलता.

वीरधवल कहते हैं कि तैराकी को लोकप्रिय बनाने के लिए मीडिया का भी अहम रोल है.

वो कहते हैं, "मुझे लगता है कि मीडिया को दूसरे खेलों को भी कवर करना चाहिए. जब सानिया मिर्ज़ा 10 स्थान गिर भी जाती है तो उसको बहुत बड़ी हेडलाइन बनाते हैं. लेकिन जब मैं और संदीप सेजवाल विश्व रैंकिंग में शीर्ष 60 में जगह बनाते हैं तो उसे नोटिस नहीं किया जाता. इसलिए मीडिया को बाक़ी खेलों पर भी ध्यान देना चाहिए जिससे इन खेलों को बढ़ावा मिलेगा."

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