....कुछ मीठा हो जाए

चॉकलेट
Image caption खिलाड़ियों को चॉकलेट्स भी दिए जाएँगे

राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर कड़वी बातें तो बहुत हो गईं....चलिए कुछ मीठे की बात करते हैं. मीठे की यानी खान-पान की. खाने की बात हो, भारत उससे जुड़ा हो तो कहना ही क्या.

राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भारत आ रहे खिलाड़ियों के लिए एक आकर्षण खाना तो होगा ही.

भ्रष्टाचार और कमीशन खाने के आरोपों के बीच राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति खिलाड़ियों, अधिकारियों और खेलों के दौरान मुस्तैदी से काम करने वाले सुरक्षाकर्मियों के खान-पान की व्यवस्था की बात लगता है भूल ही गई थी.

तभी तो इस महीने की 21 तारीख़ को उनकी नींद खुली और उन्होंने कैटरिंग सर्विस के लिए ठेका देने का काम पूरा किया. लेकिन दावा ये कि देर आए हैं पर दुरुस्त हैं.

देरी से ही सही जिन कंपनियों को ठेका मिला है, वे उत्साह में हैं और उन्होंने अपनी तैयारी शुरू की है. कई कंपनियों को इस काम में काफ़ी अनुभव है और इस अनुभव के आधार पर उन्हें ठेका भी मिला है.

तैयारी

तो एथलीटों और बाक़ी लोगों की पेट-पूजा के लिए क्या है तैयारी. पहले रेलवे में कैटरिंग करने वाली जानी-पहचानी कंपनी आईआरसीटीसी के ग्रुप महाप्रबंधक और कॉमनवेल्थ खेलों के लिए प्रोजेक्टर मैजेजर अनीत सिंह अपनी तैयारियों के बारे में बता रहे हैं.

वे कहते हैं, "तीन प्रकार के फल देना अनिवार्य है. चाय के साथ कुकीज हैं. ग्रैनोला बार है. खाने में दो प्रकार के शाकाहारी डिश हैं. एक भारतीय डिश हमने जोड़ा है. एक मीठा भी है. मांसाहारी में चिकन सैंडविच की व्यवस्था है."

आईआरसीटीसी को सिर्फ़ एक क्लस्टर का ठेका मिला है. जिसमें दो आयोजन स्थल हैं तालकटोरा स्टेडियम और एसपी मुखर्जी स्टेडियम. इन दोनों आयोजन स्थलों पर इस कंपनी को अलग-अलग लाउंजेज़ में एथलीटों और अन्य लोगों के लिए खान-पान का इंतजाम करना है.

लेकिन सबसे ज़्यादा क्लस्टर का काम मिला है सेवेन सीज कंपनी को, जिन्हें कई आयोजन स्थलों पर खिलाड़ियों, अधिकारियों के साथ-साथ मीडिया की भी सेवा करनी है.

अब इनके भी मेन्यू भी एक नज़र डाल लेते हैं. कंपनी के सेल्स और मार्केटिंग के निदेशक सुमित कपूर का कहना है कि मेन्यू आयोजन समिति ने पहले ही तय कर दिया है, उन्हें तो सिर्फ़ उस पर काम करना है.

तो क्या कुछ ख़ास होगा इनके मेन्यू में, सुमित कपूर कहते हैं, "मेन्यू में एनसीजीबार के अलावा कुकीज हैं. चाय, कॉफी है. कोल्ड ड्रिंक हैं. सैंडविच भी है और चिकन काठी भी. पित्ज़ा है. मफ़िन हैं और पेस्ट्री भी."

सुमित कपूर की कंपनी को काम बहुत ज़्यादा मिला है. लेकिन उनकी तैयारी भी अच्छी है और कंपनी का कहना है कि देश की इज़्ज़त के साथ वे कोई समझौता नहीं करेंगे.

लेकिन अगर इन दोनों कंपनियों के अधिकारियों की बात करें और उनके मेन्यू पर जाएँ, तो लगता यही है कि ज़्यादा से ज़्यादा आइटम पैक्ड हैं और सिर्फ़ सैंडविच या काठी रोल को छोड़ दिया जाए तो किचन में कम ही काम होगा.

नाकाम कोशिश

हमारी लाख कोशिशों के बावजूद गेम्स विलेज के लिए कैटरिंग सेवा का ठेका हासिल करने वाली ऑस्ट्रेलियन कंपनी डेलावेयर नॉर्थ की साझेदार ताज सैट्स के अधिकारी ने आयोजन समिति के निर्देश पर हमसे बात करने से इनकार कर दिया.

ये है पारदर्शिता का दावा. आयोजन समिति के अधिकारी ने मुझे फ़ोन करके कहा कि इस मुद्दे पर ताज को बात न करने का निर्देश है. अब क्या करें.

अगर आयोजन समिति इतनी पारदर्शिता भी नहीं दिखाना चाहती, तो बात कैसे बनेगी.

दिल्ली की एक और कैटरिंग कंपनी एएफ़पी मैन्यूफ़ैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड को आयोजन समिति के कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और सुरक्षाकर्मियों के लिए खान-पान के इंतजाम का काम मिला है.

कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी अश्विनी बत्रा का कहना है कि प्राथमिकता क्वालिटी है और इसके साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

अश्विनी बत्रा कहते हैं, "हमें ख़ास दिशा-निर्देश है. हम हाइजीन का ख़्याल रख रहे हैं. हमारी कंपनी आईएसओ प्रमाणित कंपनी है. हम इसकी अच्छी पैकिंग करके लोगों तक भेजेंगे."

कई कंपनियाँ जहाँ आयोजन समिति के मेन्यू से संतुष्ट हैं तो कई कंपनियाँ इसमें बदलाव की सिफ़ारिश भी कर रही हैं. आख़िर असली महारत तो उन्हें ही है.

बदलाव

आईआरसीटीसी के अनीत सिंह कहते हैं, "आयोजन समिति ने कहा है कि एक सैंडविच और एक अन्य चीज़ दे दीजिए. लेकिन हमने कहा कि ये काफ़ी कम हो जाएगा. इसलिए हमने मेन्यू में कुछ चीज़ें जोड़ दी हैं."

Image caption चाय-कॉफी के लिए मशीनें लगाई जाएँगी

खान-पान के मुद्दे को प्राथमिकता न देने से एक मुश्किल ज़रूर हुई है.

आयोजन समिति की प्रक्रिया काफ़ी बड़ी है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ रसोई से खाना जगह-जगह पहुँचा देना है. पुलिस वेरिफ़िकेशन से लेकर कई ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें समय लग रहा है.

सेवेन सीज के सुमित कपूर कहते हैं, "हमारे पास लोगों की कमी नहीं है. लेकिन अभी हमें टेंडर मिला है. इसलिए हमें लोगों का पुलिस वेरिफ़िकेशन करना पड़ रहा है. ड्राइवर रजिस्टर्ड होने चाहिए. गाड़ी सील होनी चाहिए."

सुरक्षा के मुद्दे पर आयोजन समिति का ऐसा करना आवश्यक भी है. सुरक्षा की बात अपनी जगह, खान-पान में लापरवाही भी मुश्किल खड़ी कर सकती है.

तो उम्मीद कीजिए कि भारतीय स्वादिष्ट खाने की अच्छी यादें लेकर विदेशी एथलीट और अधिकारी यहाँ से विदा होंगे.

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