कॉमनवेल्थ के लिए चिकित्सा सुविधाएं

ऐम्स ट्रॉमा सेंटर
Image caption ऐम्स ट्रॉमा सेंटर में राष्ट्रमंडल खेलों के लिए अलग से विंग बन रहा है.

नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल अब सर पर आ गए हैं और अब भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या खेलों के शुरु होने तक सभी तैयारियां पूरी हो पाएंगी.

राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों के ही सिलसिले में इन दिनों खिलाड़ियों से लेकर दर्शकों तक को चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए काम चल रहा है.

इन तैयारियों के अंतर्गत विभिन्न स्टेडियम, खेल गांव, मीडिया सेंटर और प्रगति मैदान स्थित अंतर्राष्ट्रीय ब्रॉडकास्टिंग सेंटर में खिलाड़ियों और अन्य अधिकारियों के लिए मेडिकल रुम और दर्शकों के लिए फ़र्स्ट एड यानि प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं होंगी.

इनके अलावा तीन अस्पताल, जीबी पंत, राम मनोहर लोहिया और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानि एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भी चिकित्सा के इंतज़ाम किए गए हैं.

स्टेडियम में तैयारी

त्यागराज स्टेडियम में नेटबॉल की प्रतियोगिताएं होंगी.

वहां खिलाड़ियों का मेडिकल रुम तो तैयार है लेकिन फ़िलहाल वह ख़ाली पड़ा है.

एक अधिकारी ओ पी भाटिया का दावा है कि तैयारियां पूरी हो चुकी हैं.

भाटिया कहते हैं, “हमारा चिकित्सा का कमरा पूरी तरह से तैयार है. एम्स से 36 डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ़ को भी नियुक्त कर दिया गया है. वह लोग जुलाई में एक परीक्षण के दौरान पूरी रिहर्सल कर चुके हैं."

ओपी भाटिया ने कहा कि इसके अलावा दर्शकों के लिए दो फ़र्स्ट एड सेंटर्स भी हैं जहां डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ़ होगा.

ओ पी भाटिया आगे बताते हैं, “खेल के मैदान में भी एक डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ़ तैनात रहेंगे. अगर कोई खिलाड़ी खेलते हुए चोटिल होता है तो उसे मात्र 30 सेंकड में ट्रॉली पर रखकर मेडिकल रुम में पहुंचाया जा सकेगा. वहां खिलाड़ी की स्थिति नियंत्रित करने के बाद उसे एक चिकित्सा अधिकारी के साथ एम्बुलेंस में एम्स ट्रॉमा सेंटर भेज दिया जाएगा. इसके अलावा दर्शकों के लिए हमारे सातों गेट पर सात पुलिस की गाड़ियां तैनात होंगी जिनमें फ़र्स्ट एड की सुविधाओं के अलावा स्ट्रैचर भी होगा. आपातकालीन स्थिति में ये गाड़ियां मरीज़ को तुरंत एम्स पहुंचाएंगी.”

अस्पतालों में तैयारी

Image caption जी बी पंत अस्पताल का एमरजेंसी ब्लॉक राष्ट्रमंडल खेलों के बाद आम जनता के लिए इस्तमाल होगा.

अस्पतालों की तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए हम जीबी पंत और एम्स ट्रॉमा सेंटर गए.

एम्स ट्रॉमा सेंटर में ख़ास खेलों के लिए अलग से विंग बन रहा है जो बाद में आम जनता के लिए इस्तमाल होगा.

जीबी पंत अस्पताल में मौजूदा सुविधाओं में से बीस प्राइवेट कमरों के अलावा पहले से बन रहे एमरजेंसी ब्लॉक को भी शुरु में राष्ट्रमंडल खेलों के लिए इस्तमाल किया जाएगा.

हालांकि यहां भी काम अभी पूरा नहीं हुआ है लेकिन वॉर्ड में बेड लग चुके हैं और उपकरण भी आ गए हैं.

साथ ही जिस तेज़ रफ़्तार से बाक़ी बचा काम चल रहा है, उससे अधिकारियों के 15 सितम्बर तक सब इंतज़ाम पूरे होने के दावे पर यकी़न किया जा सकता है.

ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉक्टर एमसी मिश्रा के अनुसार उनके काम के दो पहलू हैं, “हमारा काम दो तरह का है. एक तो किसी खिलाड़ी को अस्पताल में दाख़िल करने की ज़रुरत हो और दूसरा (जे एल एन और त्यागराज स्टेडियम में) किसी भी आपात स्थिति में हताहतों को हमारे यहां लाया जाएगा. हम दोंनो ही स्थितियों के लिए पूरी तरह से तैयार है. हमारे डॉक्टरों और बाकी स्टाफ़ की बेसिक ट्रेनिंग हो चुकी है और कुछ और ट्रेनिंग मौलाना आज़ाद में अभी चल रही है.”

सड़कों पर ट्रैफ़िक

लेकिन दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफ़िक का हाल और आए दिन के लगने वाले जाम देखकर सवाल ये उठता है कि क्या मरीज़ समय से अस्पताल पहुंच भी पाएंगे?

Image caption सड़कों पर इस तरह की अलग लेन खिलाड़ियों और चिकित्सा सुविधाओं के लिए बनाई गई है.

ओ पी भाटिया के अनुसार ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए भी इंतज़ाम किए गए हैं, “दिल्ली की सड़कों पर एक अलग से कॉमनवैल्थ गेम्स लेन बनाई गई है जिसमें 23 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक किसी और वाहन को चलाने की इजाज़त नहीं होगी. इस लेन में पुलिस की निगरानी में सिर्फ़ खिलाड़ियों की बस या एंबुलैंस ही चलेंगी.”

दैनिक सेवाओं पर असर

सोचने वाली बात ये भी है कि जीबी पंत, ट्रॉमा सेंटर और आर एम एल, तीनों ही सरकारी अस्पताल हैं जहां हर रोज़ हज़ारों की संख्या में देश भर से मरीज़ इलाज कराने आते हैं.

इन अस्पतालों में सीमित सुविधाओं के चलते मरीज़ों को लंबे समय तक अपनी बारी आने का इंतज़ार करना पड़ता है.

ऐसे में इन अस्पतालों का कुछ हिस्सा सिर्फ़ खेलों के लिए अलग से रखना कितना उचित है?

जी बी पंत अस्पताल के राष्ट्रमंडल खेलों के एक अधिकारी डॉक्टर राजीव सागर की माने तो अस्पताल के रोज़ाना के काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

डॉक्टर सागर कहते हैं, “नए एमरजेंसी ब्लॉक के अलावा हमारे पास छह सौ से ज़्यादा बिस्तर है, जिसमें से हमने सिर्फ़ बीस प्राइवेट वॉर्ड ही खेलों के लिए अलग रखे हैं. इसलिए आम आदमी को कोई मुश्किल नहीं होगी. सिर्फ़ प्राइवेट वॉर्ड के मरीज़ हैं जिन्हें थोड़ी सी दुविधा हो सकती है, लेकिन ये सिर्फ़ एक ही महीने की बात है. बाद में सब सामान्य हो जाएगा.”

तो अब इंतज़ार है नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के सफलतापूर्वक आयोजन का, जिससे दिल्लीवालों को अपनी परेशानियों के बावजूद कुछ तो अच्छा सिला मिले.

संबंधित समाचार