मैच फ़िक्सिंग का इतिहास

  • 5 सितंबर 2010
सरफ़राज़ नवाज़
Image caption सरफ़राज़ नवाज़ ने पहली बार मैचफ़िक्सिंग का आरोप लगाया था

पाकिस्तानी क्रिकेट में बात सट्टेबाज़ी और मैच फ़िक्सिंग, आरोप, पोल-खोल से होते हुए प्रतिबंधों और जुर्माने तक पहुंची तो अंदाज़ा हुआ कि कुछ है जिसकी पर्दादारी थी.

पाकिस्तानी क्रिकेट में पहली बार सट्टेबाज़ी या नाजायज़ तरीक़े से पैसा बनाने की बात पाकिस्तानी तेज़ गेंदबाज़ सरफ़राज़ नवाज़ की ज़ुबानी सुनने को आई थी.

उन्होंने 1979-80 में भारत का दौरा करने वाली पाकिस्तानी टीम के कप्तान आसिफ़ इक़बाल की तरफ़ उंगली उठाई थी कि भारतीय कप्तान के साथ उन्होंने जो टॉस किया था उनके अनुसार वह टॉस संदिग्ध था.

लेकिन चूंकि उनके पास कोई पुख़्ता सबूत नहीं था इसलिए उनके इल्ज़ाम को मात्र इल्ज़ाम के तौर पर ही देखा जाता रहा.

सरफ़राज़ नवाज़ ने इस तरह के मैच फ़िक्सिंग और सट्टेबाज़ी के इल्ज़ाम शारजाह क्रिकेट के संस्थापक अब्दुर्रहमान बुख़ातिर पर भी लगाए और उन्होंने पाकिस्तानी तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ लाहौर की अदालत में इस संदर्भ में मुक़दमा भी दायर किया था.

पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे लंबे समय तक कोच और प्रबंधक इंतिख़ाब आलम का ये बयान रिकार्ड पर मौजूद है कि 'मैच फ़िक्सिंग होती है'.

क़ुरान पर क़सम

Image caption इमरान ख़ान स्पॉट फ़िक्सिंग और मैचफ़िक्सिंग में फ़र्क़ करते हैं.

इस बारे में उन्होंने मैच बचाने के लिए पाकिस्तानी खिलाड़ियों से क़ुरान पर क़सम लेने की एक घटना के अलावा ये बात भी बताई कि जब शारजाह में उन्हें और इमरान ख़ान को ये ख़बर मिली कि खिलाड़ी पाकिस्तान की हार पर पैसा लगा रहे हैं तो इमरान ख़ान ने पलटवार के तौर पर रनर-अप की इनामी रक़म को जीत पर लगा दिया था. वो मैच पाकिस्तानी टीम जीत गई थी.

वर्ष 1983-84 में ऑस्ट्रेलिया का दौरा करने वाली पाकिस्तानी टीम में शामिल क़ासिम उमर भी इसी प्रकार के आरोप के साथ आए कि उस दौरे में खिलाड़ियों को जान-बूझ कर ख़राब खेलने के लिए धन-दौलत और शराब-शबाब की पेशकश की गई थी.

ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी शेन वॉर्न, टिम मे और मार्क वॉ ने 1995 में सलीम मलिक पर मैच फ़िक्सिंग का इल्ज़ाम लगाया कि पाकिस्तान को मैच हारने के लिए भारी रक़म की पेशकश की गई थी.

इसी दौरान दक्षिणी अफ़रीका और ज़िम्बॉब्वे के दौरे में शामिल विकेट कीपर राशिद लतीफ़ और बल्लेबाज़ बासित अली ने सलीम मलिक पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का एलान कर दिया था.

ये दोनों खिलाड़ी सलीम मलिक की कप्तानी में श्रीलंका का दौरा करने वाली टीम में भी शामिल थे. यहां खेली गई सिंगर ट्रॉफ़ी सबसे से ज़्यादा संदिग्ध रही थी.

इल्ज़ाम से बरी

Image caption वसीम अकरम पर भी शिकंजा कसा गया था.

सलीम मलिक के मैच फ़िक्सिंग में शामिल होने के आरोपों के सामने आने के बाद पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के जज फ़ख़रुद्दीन इब्राहीम को जांच की ज़िम्मदारी सौंपी लेकिन मलिक पर आरोप लगाने वाले ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी पाकिस्तान आकर बयान देने के लिए तैयार न हुए.

और इस तरह जस्टिस इब्राहीम ने सबूत न मिलने की बुनियाद पर सलीम मलिक को मैच फ़िक्सिंग के इल्ज़ाम से बरी कर दिया.

मज़ेदार बात ये है कि सलीम मलिक पर उंगली उठाने वाले शेन वॉर्न, टिम मे और मार्क वॉ ने ख़ुद 1994 के उसी श्रीलंकाई दौरे में एक सटोरिए से पैसा लेकर जानकारी देने की बात स्वीकार की जिसके नतीजे में उन पर जुर्माना लगा.

अब ये अलग बात है कि ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड ने ये जुर्माना ख़ामोशी के साथ अदा किया जिसका पता तीन साल बाद चला.

इससे पहले 1998 में पाकिस्तान ने एक तीन सदस्यी कमेटी बनाई जिसने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में वसीम अकरम, सलीम मलिक और एजाज़ अहमद को अंतिम रिपोर्ट आने तक टीम से दूर रखने की बात कही थी.

उस रिपोर्ट के मुताबिक़ कमेटी के सदस्य वसीम अकरम के टीम में शामिल किए जाने के ख़िलाफ़ थे लेकिन उस समय के पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष ख़ालिद महमूद ने सारी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए वसीम अकरम को टीम में शामिल होने के लिए दक्षिण अफ़्रीका भेज दिया था.

ख़ालिद महमूद और पूर्व क्रिकेटर माजिद ख़ान जो उस समय पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ़ एक्ज़ेक्यूटिव थे, उनके बीच गहरे विरोध की वजह भी यही थी क्योंकि माजिद ख़ान इस मामले में बहुत कड़ा रुख़ रखते थे.

पाकिस्तानी क्रिकेट में मैच फ़िक्सिंग के इल्ज़ाम लगातार लगते रहे, नतीजतन पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड के कहने पर पाकिस्तान सरकार ने सितंबर, 1998 में जज मलिक मोहम्मद क़यूम के नेतृत्व में एक अदालती आयोग का गठन किया.

मलिक क़यूम की जांच प्रक्रिया काफ़ी लंबी चली. उसमें खिलाड़ियों और अधिकारियों के बयान रिकॉर्ड किए गए.

आजीवन पाबंदी

मलिक क़यूम ने अपनी रिपोर्ट में सलीम मलिक और तेज़ गेंदबाज़ अताउर्रहमान पर आजीवन पाबंदी की सिफ़ारिश की जबकि वसीम अकरम, वक़ार यूनिस, इंज़मामुल हक़, मुश्ताक़ अहमद, अकरम रज़ा और सईद अनवर पर जुर्माने लगाए.

इस रिपोर्ट में अकरम को भविष्य में कप्तानी न देने और मुश्ताक़ अहमद को कोई ज़िम्मेदारी न देने की सिफ़ारिश की थी और खिलाड़ियों की आय पर नज़र रखने के लिए कहा था.

उसी बीच पाकिस्तान सरकार ने भी बोर्ड पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया. पाकिस्तान के जवाबदेही ब्यूरो ने वसीम अकरम को लंदन से बुलाया और उन्हें ज़बर्दस्त चेतावनी दी.

पहले उनका जीना मुश्किल किया गया फिर अकरम, मलिक और एजाज़ अहमद तीनों को सारे इल्ज़ाम से बरी कर दिया गया. यही नहीं सलीम मलिक को वर्ल्ड कप की टीम में शामिल किया गया (पहले उनका नाम टीम में नहीं था) और मोईन ख़ान को हटा कर अकरम को कप्तानी दे दी गई.

लेकिन मैच फ़िक्सिंग मामले में नाटकीय मोड़ उस समय आया जब जस्टिस क़यूम की रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पहले ब्रितानी पत्रिका न्यूज़ आफ़ द वीक ने सलीम मलिक को कैमरे के सामने उसी तरह फंसाया जैसा कि कुछ दिन पहले मज़हर मजीद को किया गया है.

इसी दौरान उस समय पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष जनरल तौक़ीर ज़िया ने जस्टिस क़यूम की रिपोर्ट जारी कर दी.

मज़े की बात ये है कि उस समय के पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड के डायरेक्टर ऑपरेशंस यावर सईद ने इसे आकलन कह कर मानने से इनकार कर दिया लेकिन बाद में पता चला कि रिपोर्ट सही थी.

हिल गया क्रिकेट जगत

Image caption मोहम्मद अज़हरुद्दीन पर भी आजीवन पाबंदी लगाई गई.

क्रिकेट की दुनिया उस वक़्त हिल कर रह गई जब दिल्ली पुलिस ने दक्षिण अफ़्रीका के कपतान हैंसी क्रोनिए पर मैच फ़िक्सिंग का इल्ज़ाम लगाया और इस सिलसिले में एक कथित भारतीय सटोरिये से उनकी टेलीफ़ोन पर बातचीत पेश कर दी.

पहले तो क्रोनिए ने इनकार किया लेकिन फिर सटोरिये से संबंध और लेन-देन का अपना जुर्म मान लिया. दो साल बाद एक छोटे जहाज़ दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई.

वर्ष 2000 में भारत ने भी मैच फ़िक्सिंग के नासूर को ख़त्म करने के लिए कुछ कड़े क़दम लिए जिसके नतीजे में कप्तान अज़हरुद्दीन और अजय शर्मा पर आजीवन पाबंदी लगा दी गई जबकि अजय जडेजा और मनोज प्रभाकर पर पांच-पांच साल की पाबंदी लगाई गई.

पाकिस्तानी क्रिकेट में मैच फ़िक्सिंग की जांच करने वाले चौथे जज जस्टिस करामत भंडारी थे जिन्हें 1999 के विश्व कप में भारत और बंग्लादेश के ख़िलाफ़ हारे गए मैचों की जांच की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी.

जस्टिस करामत ने अपनी जांच में पाकिस्तानी टीम को मैच फ़िक्सिंग के इल्ज़ाम से बरी कर दिया.

यहां ये बात ग़ौरतलब है कि दक्षिण अफ़्रीकी क्रिकेट बोर्ड के उस समय के अध्यक्ष डॉक्टर अली बाक़र ने वर्ल्ड कप में पाकिस्तानी मैचों और अंपायर जावेद अख़्तर पर भी शक ज़ाहिर किया था. लेकिन वो अपना बयान देने पाकिस्तान नहीं आए.

बाहर भी फ़िक्सिंग

Image caption शेन वार्न पर भी जुर्माना लग चुका है.

ऑस्ट्रेलिया के कप्तान एलन बोर्डर ने 1993 में पूर्व पाकिस्तानी खिलाड़ी मुश्ताक़ मोहम्मद पर इल्ज़ाम लगाया था कि उन्होंने कथित तौर पर इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मैच हारने के बदले उन्हें 50 हज़ार डॉलर की पेशकश की थी.

वर्ष 1997 में भारतीय ऑलराउंडर मनोज प्रभाकर ने कपिल पर दो मैच हारने के लिए भारी रक़म की पेशकश का आरोप लगाया था.

ब्रितानी क्रिकेट खिलाड़ी क्रिस लुइस ने इंग्लैंड के तीन खिलाड़ी पर पैसे लेकर ख़राब प्रदर्शन का इल्ज़ाम लगाया था जो ग़लत साबित हुआ और ख़ुद लुइस को नशीले पदार्थों की तस्करी मामले में 13 साल की सज़ा हो गई.

इंग्लैंड के विकेट कीपर एलेक स्टिवर्ट को 2001 में सटोरियों को पैसा ले कर जानकारी देने के इल्ज़ाम से बरी कर दिया गया.

श्रीलंकाई कप्तान मरवन अटापट्टू पर इस प्रकार का इल्ज़ाम 2004 में लगा लेकिन सबूत न होने के कारण उन्हें आरोप से बरी कर दिया गया.

उसी साल कीनिया के मोरिस ओडुंबे पर बुकमेकर से पैसा लेने का इल्ज़ाम साबित हो गया और उन पर पांच साल की पाबंदी लगा दी गई.

वर्ष 2007 के विश्व कप के दौरान पाकिस्तानी क्रिकेट कोच बॉब वूलमर की अचानक मौत ने अटकलों का सिलसिला शुरु कर दिया और उनकी मौत को क़त्ल क़रार दिया जाने लगा लेकिन जमैका की पुलिस ने इसे प्राकृतिक मौत कहा.

वेस्टइंडीज़ के मॉर्लिन समुएल्ज़ पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया गया क्योंकि उन पर इल्ज़ाम था कि उन्होंने भारतीय दौरे में स्टोरियों को जानकारी दी थी.

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