‘दिल्ली की बेटी’ लापता

'दिल्ली की बेटी'
Image caption 'दिल्ली की बेटी' अभियान बीच में ही रुक गया

कुछ महीनों पहले तक दिल्ली के लगभग हर बस स्टैंड पर सात साल की एक प्यारी सी बच्ची लोगों को सभ्यता का पाठ पढ़ाती दिखाई देती थी. वह अचानक लापता हो गई है.

यहाँ बात हो रही है ‘कम ऑन दिल्ली’ नाम के उस अभियान की जिसके तहत ‘दिल्ली की बेटी’ कार्टून और कविताओं के ज़रिए राष्ट्रमंडल खेलों के लिए शहरवासियों को शिष्टाचार का पाठ पढ़ाने की कोशिश करती थी.

ये 'दिल्ली की बेटी' कभी लोगों को बात-बात पर थैंक्यू और प्लीज़ का इस्तेमाल करने को कहती, तो कभी उन्हें दिल्ली की सड़कों पर गंदगी फैलाने पर टोकती. कभी कार पूल को ‘कूल’ बता कर उसका प्रचार करती, तो कभी दिल्लीवासियों को बेवजह हॉर्न बजाने पर डाँटती.

लेकिन अब वह गुमशुदा है.

दरअसल राष्ट्रमंडल खेलों से पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने शहर के लोगों को शिष्टाचार की महत्ता समझाने का ठेका पिछले साल दिसंबर में 'डेंट्सू इंडिया' नाम की एक विज्ञापन कंपनी को दिया था.

ये संदेश लोगों तक पहुँचाने के लिए कंपनी को दस महीने का वक्त दिया गया था मगर इससे पहले कि ये बच्ची लोगों के दिमाग़ पर अपने संदेश की छाप छोड़ पाती, सरकारी फाइलों के बोझ तले उसका गला घोंट दिया गया.

विज्ञापन कंपनी डेंट्सू इंडिया के चीफ क्रिएटिव अधिकारी हरीश अरोड़ा ने इस शिष्टाचार मुहिम को एक शक्ल दी और दिल्ली की बेटी की रचना की.

उनका कहना है, “दिल्ली वालों से ज़्यादा इस मुहिम की ज़रुरत शायद किसी और शहर को नहीं थी. यहाँ अपना घर सब साफ़ रखते हैं, पर बाहर गंदगी फैलाने से कोई नहीं चूकता.”

आरोप प्रत्यारोप

कंपनी के मुताबिक ये मुहिम तीन चरणों में चलाई जानी थी.

पहले चरण में दिल्ली वालों को शहर की संस्कृति से अवगत कराया जाना था.

दूसरे चरण का मक़सद राष्ट्रमंडल खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था और खेलों के दौरान शिष्ट तरीके से व्यवहार करने की सीख देना था.

तीसरे चरण का मक़सद लोगों को इस मुहिम में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करना था और उनके सहयोग से बाक़ी दिल्लीवासियों को जागरूक करना था.

Image caption इस अभियान के ज़रिए दिल्ली वासियों को शिष्टाचार का पाठ पढ़ाने की कोशिश की गई

टेलीविज़न और रेडियो के ज़रिए भी इस अभियान का संदेश लोगों तक पहुँचाया जाना था.

लेकिन इस मुहिम की शुरुआत ही दूसरे चरण से की गई और ये तीसरे चरण में पहुँच ही नहीं पाया.

जहाँ डेंट्सू इंडिया कंपनी के अधिकारियों ने दिल्ली सरकार के उदासीन रवैये को ज़िम्मेदार ठहराया, वहीं दिल्ली सरकार के एक आला अधिकारी का कहना है कि कंपनी ने निर्धारित धन राशि से ज्यादा की माँग की जिसके कारण उन्हें ये अभियान रोकना पड़ा.

सरकार के इन आरोपों को निराधार बताते हुए कंपनी के उपाध्यक्ष गुल्लू सेन ने कहा, “हमने इस अभियान को सफल बनाने के लिए हर कोशिश की लेकिन कुछ कारणों की वजह से ये अभियान अपने मक़सद में सफल नहीं हो पाया.”

कारण क्या रहे कंपनी ने ये तो बताने से इनकार कर दिया लेकिन एक बात तो साफ़ है कि अब इस ‘दिल्ली की बेटी’ का ज़िम्मा लेने को कोई भी पक्ष तैयार नहीं.

राष्ट्रमंडल खेल दरवाज़े पर हैं और मेहमान दस्तक देने को तैयार हैं. पर अब जब ये अभियान फ़ेल हो गया है जो सवाल सामने है वो ये कि क्या दिल्ली वाले तैयार हैं अपने मेहमानों का शिष्ट ढंग से स्वागत करने के लिए?

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