दिल्ली में धीमी रफ़्तार के लिए रहें तैयार

अगर आप दिल्ली में रहते हैं और अक्तूबर में दूल्हा बनकर बारात निकालने की हसरत रखते हैं तो आप शायद ऐसा न कर पाएँ. बारात तो छोड़िए रोज़मर्रा का सफ़र भी मुश्किल होने वाला है. वजह है राष्ट्रमंडल खेल. खेलों के कारण सितंबर अंत से लेकर मध्य अक्तूबर तक दिल्ली में विशेष ट्रैफ़िक नियम लागू रहेंगे.

भारत का दिल कहे जाने वाली दिल्ली में एक करोड़ से भी ज़्यादा लोग बसते हैं. और लगभग इतने ही वाहन दिल्ली और आसपास के इलाक़ों की सड़कों पर दौड़ते हैं.पिछले साल आई विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज़्यादा मौतें भारत में ही होती है. दिल्ली का हाल भी कुछ अलग नहीं है.

आम दिनों में ही दिल्ली का ट्रैफ़िक संभलते नहीं संभलता. सड़क दुर्घटनाएँ, ट्रैफ़िक जाम साधारण बात है. राष्ट्रमंडल खेलों में तो हज़ारों खिलाड़ियों, अधिकारियों और अतिथियों का जमावड़ा रहेगा. इस सब से निपटने के लिए दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस ने राष्ट्रमंडल खेलों के लिए विशेष नियम बनाए हैं.

दिल्ली के कई सड़क मार्गों पर नीली पट्टी वाली कॉमनवेल्थ लेन बनाई जा रही है जिसपर आम लोग गाड़ी नहीं चला पाएँगे. यानी पहले से ही गाड़ियों के बोझ तले दबी सड़कों पर और अफ़रातफ़री. विशेष पुलिस आयुक्त (ट्रैफ़िक) अजय चढ्ढा भी मानते हैं कि खेलों के दौरान लोगों को आने-जाने में मुश्किल होगी. उनका कहना है कि कुछ सड़कें केवल दो लेन की हैं और एक लेन बंद रहने से असुविधा होगी ही इसलिए उन मार्गों पर जाने से बचें.

राष्ट्रमंडल खेल फ़ेडरेशन के अध्यक्ष माइक फ़ेनेल जब अगस्त में तैयारियों का जायज़ा लेने दिल्ली आए थे तो उनकी बड़ी चिंताओं में ट्रैफ़िक एक बड़ा मुद्दा था.

उनका कहना था, “ट्रैफ़िक को लेकर हमारी चिंता बनी हुई है क्योंकि दिल्ली में ट्रैफ़िक इतना है कि सड़कें पर कन्जेशन हो जाती हैं, सड़कों खचाखच गाड़ियों से भर जाती हैं. मीडिया से हम अपील करते हैं कि वो खेलों से पहले यातायात संबंधी संदेश लोगों तक पहुँचाए.”

इससे आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान ट्रैफ़िक को संभालना कितनी बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है.

'जानकारी नहीं केवल डरावा है'

खेलों के दौरान ट्रैफ़िक के बोझ को कम करने के लिए तीन से 14 अक्तूबर तक कई स्कूल बंद रहेंगे. समापन समारोह के दिन सरकारी दफ़तरों, बैंकों में छुट्टी होगी. लोगों को अभ्यस्त करने के लिए ट्रैफ़िक ट्रायल हो रहे हैं जब राष्ट्रमंडल खेलों के लिए बनी लेन पूरी तरह बंद कर दी जाती है.

1982 में दिल्ली में हुए एशियाई खेलों के दौरान यातायात प्रबंधन में किरण बेदी ने बड़ा रोल निभाया था. कड़की से काम करने वाली किरण का नाम क्रेन बेदी पड़ गया था. उनकी क्या राय है राष्ट्रमंडल की यातायात योजना पर?

वे कहती हैं, “मैं पूर्व डीसीपी ट्रैफ़िक होते हुए भी सारे नियमों को लेकर अंजान हूँ, आम नागरिक होने के नाते मेरे मन में केवल डर है, जानकारी नहीं है. मीडिया के ज़रिए केवल इतना पता है कि सड़कों पर विशेष लेन बनाई गई है राष्ट्रमंडल खेलों के लिए, उस पर गए तो सज़ा होगी. अब तक केवल धमकाया गया है, डराया गया है, सूचना कोई नहीं दी गई. इसलिए कई लोग कह रहे हैं कि हम दिल्ली छोड़कर चले जाएँगे.”

1982 के एशियाई खेलों से तुलना करते हुए किरण बेदी कहती हैं,"एशियाई खेलों से कई महीने पहले से ही पुलिस लोगों तक जाकर सूचना पहुँचाती थी, नियम बनाने से पहले लोगों से राय भी लेते थे. लोगों की सुविधा और खेलों की सुरक्षा ज़रूरतों के बीच संतुलन बिठाकर हमने यातायात नियम बनाए थे. इस चीज़ की ज़बरदस्त कमी है इस बार."

पर क्या आम लोग इन पाबंदियों से ख़ुश हैं? उन्हें पता भी है कि खेलों के लिए विशेष यातायात नियम बनाए गए हैं.?

दिल्ली में रहने वाले के लाल बुज़र्ग हैं और कहते हैं, “ख़बरों में सुना ज़रूर है कि कोई विशेष लेन होगी लेकिन कब से लागू होगी कुछ पता नहीं. लोगों को परेशानी तो ज़रूर होगी. ट्रैफ़िक पुलिस अगर ठीक से प्रबंधन करे तो दिक्कत कुछ कम की जा सकती है.”

वहीं दिल्लीवासी श्याम सुंदर तो काफ़ी नाराज़ हैं. उनका कहना है कि अगर लोग आ-जा नहीं पाएँगे तो रोज़ी रोटी कैसे कमाएँगे और मालिक अलग डाँटेगा कि देर से क्यों आए.

'नियम मानो, नहीं तो सज़ा'

लोग ख़ुश हों या नाख़ुश लेकिन पुलिस का कहना है कि नियम कड़ाई से लागू होंगे. विशेष पुलिस आयुक्त (ट्रैफ़िक) अजय चढ्ढा का कहना है, “इस समय अवधि के दौरान ज़ीरो टॉलरेंस नीति रहेगी. मोटर वाहन एक्ट 115 के तहत राष्ट्रमंडल खेल लेन की घोषणा की जाएगी. नियम का उल्लंघन करने वालों पर दो हज़ार रुपए जुर्माना होगा.”

राष्ट्रमंडल खेल कितने सुचारू रूप से संचालित होते हैं और कितने दर्शक स्टेडियमों में खेल देखने आ पाते हैं ये यातायात प्रबंधन पर भी निर्भर करेगा.

इसके अलावा ये सुनिश्चित करना भी ज़रूरी होगा कि नौकरीपेशा लोग अपने काम धंधे पर जा पाएँ, रोज़ी रोटी कमा पाएँ. भारी-भरकम ट्रैफ़िक को देखते हुए ये सब संभालना दिल्ली पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा.

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