स्टेडियम तैयार, पर कितने

दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के लिए स्टेडियम तैयार दिखने लगे हैं. हालांकि इन स्टेडियम में अब भी आखिरी क्षण के काम चल रहे हैं.

पिछले दिनों में स्टेडियम तैयार न होने को लेकर सड़क से लेकर संसद तक शंकाए छाई रही हैं.

इस तरह की आशंकाओं को दूर करने के लिए आयोजन समिति की ओर से पत्रकारों को विभिन्न स्टेडियम का दौरा करवाया गया.

पत्रकारो के जिन स्टेडियम में ले जाया गया उनमें जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, सिरी फ़ोर्ट स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, डॉक्टर कर्णी सिंह शूटिंग रेंज, श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्विमिंग पूल कॉम्पलेक्स, त्यागराज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, तालकटोरा इनडोर स्टेडियम शामिल हैं.

नेटबॉल के लिए बना त्यागराज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पूरी तरह से तैयार दिखा और इस स्टेडियम ने प्रभवित किया.

बॉक्सिंग के लिए बने तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में खेल का रिंग तो तैयार है पर आखिरी समय की रंगाई पुताई का काम यहाँ भी चलता दिखाई दिया.

श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्विमिंग पूल कॉम्पलेक्स मे तैराकी के मुकाबले होने हैं, ये आयोजन स्थल भी तैयार दिखा. पर एक मोटी कमी भी दिखाई दी.

यहाँ पर अभी तक गोता लगाने के लिए बने तल पर रबर टायल नहीं लगी है. ये वही आयोजन स्थल हैं जहाँ ट्रायल खेलों के दौरान टायल हट जाने से तैराक के घायल होने की खबर आई थी. अब आयोजकों ने दावा किया है वो सभी कमियाँ पूरी कर ली गई हैं.

सिरी फ़ोर्ट स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स मे स्क्वॉश और बैडमिंटन के मुकाबले होने है. ये आयोजन स्थल भी तैयार दिखा.

नेहरू स्टेडियम

जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम राष्ट्रमंडल खेलों के उदघाटन और समापन समारोह के साथ एथलेटिक्स, भारोत्तोलन, लॉन बाउल्स के मुक़ाबले होंगे. ये मैदान ऐसा है जिस पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हैं.

सतरंगी रोशनी में नहाया स्टेडियम आपको प्रभावित करता है पर स्टेडियम में साज़ो-सामान लगाने का काम काफी फैला हुआ दिखाई दिया. काम को पूरा करने की आपाधापी मे मज़दूर लगे हुए थे. इस काम के देखकर हमारे मन में शंका हुई कि क्या ये काम इतनी जल्दी पूरा हो भी पाएगा या नहीं.

डॉक्टर कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में भी काम अभी पूरा नहीं हुआ है. जिस शूटिंग रेंज में फाइनल मुकाबले होने हैं उस पर अब भी काम चल रहा है. हालांकि खेल आयोजन के लिए जिम्मेवार अधिकारी ने दावा किया कि ये काम समय पर पूरा हो जाएगा.

ये सब स्टेडियम लगभग तैयार दिखे पर अब असल में इनकी परीक्षा तो खेल आयोजन के समय ही होगी.

इन सब आयोजन स्थलों का दौरा करने के बाद ये कहा जा सकता है कि जिस काम के समय पर पूरा होने पर आशंका जताई जा रही थी, वो शंका अब हटती नज़र आ रही है.

पर इसका ये मतलब कतई नहीं हैं कि काम के समय पर पूरा करने की जंग को आयोजन समिति जीत चुकी है.

आख़िरी क्षणों का काम अब भी बाकी है और आयोजन समिति का समय से संघर्ष अब भी जारी है.

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