'गंदगी है.. पर शर्म की बात नहीं'

अब से ठीक दो दिन बाद खेल गाँव अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए खोला जाने वाला है.जिस खेल गाँव को दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की जान और आन कहा जा रहा था, अब उसे लेकर आयोजन समिति को शर्मसार होना पड़ रहा है.

राष्ट्रमंडल फ़ेडरेशन के मुख्य कार्यकारी माइक हूपर ने बिना किसी लाग लपेट और तल्ख़ अंदाज़ में कहा है कि गेम्स विलेज के रिहाइशी इलाक़े इतने गंदे हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के रहने लायक़ नहीं.

इतना सब बवाल होने के बाद राष्ट्रमंडल आयोजन समिति ने दिल्ली में पत्रकार वार्ता बुलाई. समिति के महासचिव ललित भनोट के मुताबिक़, "इसमें कोई शर्म की बात नहीं, बड़े बड़े आयोजनों में छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं. ये तो अच्छा है कि ये सब खिलाड़ियों के आने से पहले हो गया..हम सब ठीक कर लेंगे.''

उन्होंने तो यहाँ तक कहा कि विदेशी लोगों के लिए साफ़ सफ़ाई का मापदंड भारतीयों के लिए सफ़ाई के मापदंड से अलग हो सकता है.

इससे पहले हूपर ने बयान दिया था कि खेल गाँव में सघन सफ़ाई की ज़रूरत है और वहाँ शौचालय ऐसे हैं जो काम नहीं करते. उन्होंने कहा कि लोगों ने अख़बार में ख़बर पढ़ी होगी कि वहाँ मैला पड़ा हुआ है. ये ख़बर सच है.

'अभी तो 36 घंटे हैं'

लेकिन ललित भनोट की मानें तो खिलाड़ियों के आने में अभी वक़्त है, 36 घंटों में सफ़ाई का वो काम हो जाएगा जो इतने महीनों में नहीं हुआ.

उधर न्यूज़ीलैंड के टीम मैनेजर डेव करी ने तो यहाँ तक आशंका जता दी है कि राष्ट्रमंडल खेल शायद न हो पाएँ. उनका कहना था, अगर खेल गाँव तैयार नहीं हुआ, और खिलाड़ी यहाँ नहीं रुक पाए तो ज़ाहिर है कि इसका मतलब ये भी हो सकता है कि खेल न हो.

ज़ाहिर है मामला गंभीर है. इसका अंदाज़ा इसी से लगाया सकता है कि राष्ट्रमंडल खेल फ़ेडरेशन के अध्यक्ष माइकल फ़ेनेल को भारत सरकार के कैबिनट सचिव को पत्र लिखकर गंदगी का मामला उठाना पड़ा.

इससे पहले माइक हूपर ने बताया कि गंदगी का मामला सबसे पहले 15 सितंबर को किए गए दौरे में सामने आया था लेकिन तब आश्वासन दिया गया था कि 19 सितंबर तक सब ठीक हो जाएगा. लेकिन 19 सितंबर को जो सूरते-हाल था वो अन्य देशों के प्रतिनिधियों को नागवार गुज़रा.

अब राष्ट्रमंडल फ़ेडरेशन ने सीधे केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने का कहा है. हूपर के मुताबिक़ कैबिनेट सचिव ने आज सुबह खेल गाँव का दौरा भी किया था. दावा किया जा रहा है कि सब ठीक हो जाएगा..वैसे दावा तो ये भी किया गया था कि दिल्ली में बना खेल गाँव बीज़िंग गेम्स विलेज से भी बेहतर है.

अब बड़ा और चिंताजनक सवाल ये है कि दो दिन के अंदर-अंदर गंदगी को दूर कर खेल गाँव को साफ़ और चाकचौबंद कैसे किया जाएगा. हूपर की नसीहत है कि इसके लिए उचित संसाधन, उपकरण,प्रशिक्षित स्टाफ़ और अच्छे प्रबंधकों की ज़रूरत है जो इस बात को समझे कि उनके पास एक दिन और चंद घंटो की ही मोहलत है.

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