खेल गाँव में जारी है सरगर्मी

  • 23 सितंबर 2010
खेल गाँव

देश-विदेश में राष्ट्रमंडल खेल गाँव की स्थिति की हुई भारी आलोचना के बाद गुरुवार को पूरे दिन यहाँ सरगर्मी छाई रही. कभी सुरेश कलमाडी तो कभी दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित खेल गाँव का चक्कर लगाती रहीं.

इस बीच बीबीसी को मिली खेल गाँव की एक्सक्लूसिव तस्वीरों ने वहाँ की ख़राब स्थिति को और उजागर किया है. खेल गाँव में मीडियाकर्मियों को नए मीडिया सेंटर तक तो जाने की अनुमति मिली.

लेकिन इतनी आलोचनाओं के बावजूद किसी को भी खेल गाँव के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली. मीडिया सेंटर के अंदर और बाहर बड़ी संख्या में खड़े पत्रकार बड़े-बड़े अधिकारियों को अंदर आते-जाते देखते रहे.

बीबीसी को सूत्रों से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक़ दो दिन बाद भी स्थिति में कुछ ज़्यादा सुधार नहीं हुआ है. ये ज़रूर है कि सरकारी एजेंसियाँ जी-जान से स्थिति को बेहतर बनाने की कोशिश में जुटी हुई हैं.

नज़ारा

मीडिया सेंटर जाने के क्रम में हमें जो नज़ारा देखने को मिला, उससे तो यही लगता है कि सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम हैं. जगह-जगह मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं और अंदर जाने वाले लोगों की कड़ाई से जाँच की जा रही है.

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के साथ खेल गाँव का जायज़ा लेने पहुँचे पूर्वी दिल्ली के सांसद संदीप दीक्षित ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि स्थिति बेहतर हैं.

उन्होंने कहा, "हमने देखा कि बहुत ज़्यादा समस्या नहीं है. बरसात के कारण थोड़ी समस्या है. कुछ एजेंसियों ने उतनी तत्परता से सफ़ाई नहीं की थी, जितनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों की अपेक्षा रहती है."

उन्होंने कहा कि अब फ़्लैट्स के बाहर की स्थिति काफ़ी सुधर गई है. लेकिन फ़्लैट्स 60 प्रतिशत तैयार है. बाक़ी में काम चल रहा है और जैसे-जैसे खिलाड़ी आएँगे, उस समय फ़्लैट्स तैयार मिलेंगे.

इस बीच भारतीय एथलीटों का एक दल खेल गाँव पहुँच चुका है. सुरेश कलमाडी का दावा है कि भारतीय एथलीट वहाँ की व्यवस्था से ख़ुश होंगे और कोई भी टीम राष्ट्रमंडल खेलों से नहीं हटेगी.

लेकिन अब तो आने वाला समय बताएगा कि इस दावे में कितना दम है.

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