बुधवार तक तैयार होगा खेलगाँवः शीला

  • 26 सितंबर 2010
खेलगाँव

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा है कि कॉमनवेल्थ खेलों के लिए खेलगाँव का काम बुधवार से पहले पूरा नहीं हो सकेगा.

लगभग 4000 लोग खेलगाँव को एथलीटों के लिए तैयार करने में जुटे हुए हैं.

कॉमनवेल्थ खेलों का शुभारंभ अगले रविवार को होना है और उसके लिए तमाम देशों से एथलीट दिल्ली पहुँचने लगे हैं.

केन्या, स्कॉटलैंड और भारत के एथलीट खेलगाँव में रहने भी लगे हैं.

लेकिन कुछ प्रतियोगी पहले ही खेलगाँव और आयोजन की व्यवस्था पर आपत्ति जताने के बाद खेलों से अपने नाम वापस ले चुके हैं.

इन आलोचनाओं के बीच शीला दीक्षित ने रविवार को खेलगाँव का दौरा कर वहाँ हो रहे काम-काज की समीक्षा की.

उन्होंने कहा,"सोमवार तक लगभग 66 फ़्लैट दे दिए जाएँगे और बुधवार तक सारा काम पूरा कर लिया जाएगा."

राहत

Image caption राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी की काफ़ी आलोचना हो रही है

इस बीच दिल्ली पहुँचकर होटल में रह रहे इंग्लैंड टीम के एथलीटों ने कहा है कि वे सोमवार को खेलगाँव चले जाएँगे.

दिल्ली से बीबीसी संवाददाता राहुल टंडन का कहना है कि इंग्लैंड टीम की इस घोषणा से परेशान आयोजकों को राहत मिलेगी.

बीबीसी स्पोर्ट्स की संवाददाता सोनाली शाह ने जानकारी दी है कि स्कॉटलैंड की टीम शनिवार को दिल्ली पहुँचने के बाद खेलगाँव चली गई है.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार स्कॉटलैंड के एथलीटों ने कहा कि वे ख़ुश हैं हालाँकि अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है.

दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों की समय पर तैयारी नहीं हो पाने को लेकर आयोजकों को भारी आलोचना झेलनी पड़ रही है.

कोताही

कॉमनवेल्थ खेल संघ के मुख्य कार्यकारी माइक हूपर ने बीबीसी से कहा है कि समस्याओं के लिए उनके संगठन को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि उनका संघ मार्च से ही आयोजकों पर दबाव डाल रहा है जब उनके लोगों ने पहली बार दिल्ली जाकर तैयारियों का जायज़ा लिया.

माइक हूपर ने कहा,"ये लोग समझ नहीं रहे थे, या समस्या कितनी बड़ी है इसे समझने के लिए तैयार नहीं थे."

उन्होंने कहा कि जबसे इन समस्याओं की बात सामने आई है, काम में तेज़ी आई है.

दिल्ली कॉमनवेल्थ खेल भारत में खेलों के इतिहास में और कॉमनवेल्थ खेलों के इतिहास में अभी तक का सबसे महँगा खेल आयोजन बन चुका है.

अभी तक के अनुमान के अनुसार खेलों पर 10 अरब डॉलर से अधिक ख़र्च हो चुका है.

दिल्ली खेलों की तैयारी के लिए सात साल का समय दिया गया था मगर 2008 के पहले तक बहुत कम काम शुरू किया गया.

अभी तक खेलों के टिकटों की भी बिक्री बहुत धीमी रही है.

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