इस बार शोर ज़्यादा है

  • 28 सितंबर 2010

पिछले दिनों खेलगाँव की यात्रा के दौरान हमें जो कमरे दिखाए गए वो किसी पाँच सितारा होटल से कम नहीं थे.

लेकिन बाद में बीबीसी की एक्सक्लूजिव तस्वीरों ने कुछ और ही कहानी बयाँ की.

उसके बाद से मिडिया में खेल गाँव की जो आलोचना हो रही है, उससे सवाल उठता है कि क्या ये कमियाँ सिर्फ भारत की तैयारियों में है या बाकी अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भी इस तरह की कमियाँ होती है.

यही सवाल जब हमने राष्ट्रमंडल खेलों के ब्रैडं एबेंसडर समरेश जंग से पूछा तो समरेश जंग ने कहा " कोई भी खेल सौ प्रतिशत ठीक नहीं हो सकते. हर जगह कोई ना कोई कमी रहती है. "

जब हमने उनसे उनके अनुभव के बारे में पूछा तो समरेश कहते है " इसी साल हम इंगलैड में शॉटगन प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गए हैं तो भारतीय खिलाड़ियों को बस तक में नहीं चढने नहीं दिया गया था. और बीजिंग में तो हमे हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क विभाग से अनुमति मिलने में पाँच घंटे तक इंतज़ार करना पडा. फर्क सिर्फ इतना है कि इन खेलों के दौरान लोग शोर कुछ ज़्यादा कर रहें हैं."

विश्व एथलेटिक चैंपियनशिप में लंबी कूद का पदक जीत चुकी अंजु बॉबी जॉर्ज भी इन खबरों से परेशान हैं.

अंजु बॉबी जॉर्ज कहती है " मैचेस्टर खेलों के दौरान हमें तो युनिवर्सिटी हॉस्टल में रुकना पड़ा था और एथेंस ओलंपिक के खेलगाँव में तो हमारे पहुँचने तक निर्माण कार्य जारी था. हर खेल में ऐसे होता है, ये कोई पहला मामला नहीं हैं."

सिडनी ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता कर्णम मल्लेशवरी कहती है कि अगर ये काम छह महीने पहले पूरा हो जाता तो इतनी बुरी खबरे मिडिया में नहीं छाई होती.

कर्णम मल्लेशवरी कहती हैं, " थोडी बहुत कमियाँ तो हर जगह होती है पर भारत में दिक्कत ये हुई की कोई भी काम पहले पूरा नहीं हुआ. सभी कमियाँ जल्दबाज़ी की वजह से हुई, पुल टूट गया, ये भी खबरों में ज्यादा इसीलिए छाया रहा क्योंकि ये घटना खेल आयोजन के इतने करीब थी."

भारत की उड़न परी पीटी ऊषा मानती है कि छोटी-मोटी परेशानियाँ तो होती रहती हैं, पीटी ऊषा भी स्वीकार करती है की वो इन खबरों से आहत हैं.

पीटी ऊषा कहती हैं " मैने राष्ट्रमंडल खेल से लेकर ओलंपिक तक के खेलगाँव देखें है. वहाँ तो कोई पाँच सितारा सुविधाएं नहीं दी जाती. यहाँ शिकायते कुछ ज्यादा है, वो इसलिए की यहाँ खेलगाँव देर से पूरा हुआ. पर मैं ये नकारात्मक खबरे नहीं सुनना चाहती. मुझे भरोसा है कि भारत सफल खेलों का आयोजन कर सकता है. "

राष्ट्रमंड़ल खेल आयोजन क्या सफल होगा ये तो 14 अक्टुबर को पता चलेगा, पर ये तय है कि तैयारियों का अंतिम दौर सकारात्मक नहीं रहा है.

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