पाक को भरोसा भारत में सब ठीक...

राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तानी टीम के ज़्यादातर सदस्य 29 सितंबर को भारत पहुँच रहे हैं.

पाकिस्तान की तरफ़ से 75 लोगों का दल दिल्ली आएगा जिसमें खिलाड़ी, कोच, मैनेजर और अधिकारी शामिल हैं. खिलाड़ी कुल सात वर्गों में हिस्सा लेंगे. इसमें हॉकी, बॉक्सिंग, शूटिंग, स्कवॉश, टेनिस, भारोत्तोलन और कुश्ती शामिल है.

मेलबर्न खेलों में पाकिस्तान ने एक स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य समेत पाँच मेडल जीते थे. इस बार कैसी है पाकिस्तानी खिलाड़ियों की तैयारी, ख़ासकर तब जब वहाँ आई ज़बरदस्त बाढ़ के कारण हालात बहुत अच्छे नहीं रहे हैं. और खेलों की तैयारी को लेकर भारत की आलोचना पर क्या है पाकिस्तान की प्रतिक्रिया.

पाकिस्तान ओलंपिक संघ के तहत ही राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी चल रही है. संघ के अध्यक्ष लेफ़्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सईद आरिफ़ हसन कहते हैं कि बाकी देशों की तरह पाकिस्तान में भी ऐसी ही तैयारियों को लेकर नकारात्मक रिपोर्टें हैं. उनसे कई बार पूछा गया कि पाकिस्तान पर इसकी राय है लेकिन ये बात से बचते नज़र आए.

उनका कहना था, "मीडिया की प्रतिक्रिया तो ख़राब है लेकिन जहाँ तक खिलाड़ियों का सवाल है तो सब खेलों का इंतज़ार कर रहे हैं. हम तो 29 को ही पहुंचेंगे. मेरा ख्याल है कि चीज़ें ठीक हो जाएँगी. मेरी शुभकामनाएँ भारत के साथ हैं."

पदक की उम्मीद

भारोत्तोलन में छह पाकिस्तानी खिलाड़ी भाग लेंगे जिसमें पिछली बार अपने देश को एकमात्र स्वर्ण दिलाने वाले शुजाउद्दीन मलिक भी शामिल हैं. अपने प्रेक्टिस सेशन से वक़्त निकालते हुए शुजाउद्दीन मलिक ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि तैयारी पूरी है.

उनका कहना था, "हम एक साल से लगे हुए हैं, बहुत मेहनत की है.कोशिश होगी कि पिछला रिकॉर्ड बेहतर किया जाए. मेलबर्न में भी भारत से कड़ा मुकाबला हुआ था. इस बार भी स्वर्ण पदक के लिए लडूँगा. हमारा दल दो से तीन स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद कर रहा है."

वहीं टेनिस में पाकिस्तान की निगाहें एहसाम उल क़ुरैशी पर टिकी हैं जो भारत के रोहन बोपन्ना के डबल्स पार्टनर भी हैं. अमरीकी ओपन के डबल्स मुकाबले के फ़ाइनल में पहुँचने के बाद क़ुरैशी पिछले हफ़्ते से कॉमनवेल्थ की तैयारियों में जुटे हुए हैं.

वे कहते हैं, "राष्ट्रमंडल खेल अलग ही होता है. यहाँ आप अपने देश के लिए खेलते हैं. जितने भी समय है मेरे पास मैं पूरी कोशिश करूँगा प्रेटिक्स करने की. पर उम्मीद करता हूँ कि रोहन के साथ मैच न हो क्योंकि बड़ा ही अजीब सा लगता है ऐसे में. क़ुरैशी कहते हैं कि अगर रोहन के ख़िलाफ़ खेलना ही पड़ा तो दोनों में इतना तालमेल है कि वे इसे प्रोफ़ेश्नली लेंगे."

बॉक्सिंग में भी पाकिस्तान को रजत पदक मिला था.पाकिस्तान बॉक्सिंग फ़ेडरेशन के सचिव मोहम्मद अकरम खान का कहना है कि बॉक्सिंग टीम ने एक माह से कैंप लगाया हुआ है जहाँ कई अन्य देशों के खिलाड़ी भी आए हुए हैं.

उन्होंने बताया, "49, 52, 56, 60, 75 और 91 किलोग्राम वर्ग में हम छह बॉक्सर भेज रहे हैं.52 किलोग्राम वर्ग में हारून शाहिद खेलेंगे जो बॉक्सर आमिर खान के रिश्तेदार हैं.भारत के साथ हमारा अच्छा मुकाबला होगा."

पाकिस्तान में हाल ही में ज़बरदस्त बाढ़ आई है जिससे बहुत ज़्यादा तबाही हुई है. खिलाड़ी, कोच और अधिकारी सब मानते हैं कि इस वजह से देश में माहौल ग़मगीन है हालांकि सबका कहना है कि खेलों की तैयारी से इस पर कुछ ख़ास असर नहीं पड़ा है.

भारोत्तोलन टीम के कोच राशिद महमूद कहते हैं, "तैयारी पर सैलाब का असर नहीं पड़ा है.कैंप इस्लामाबाद में है और ज़्यादातर खिलाड़ी पंजाब से हैं. हमारे खिलाड़ी बाढ़ प्रभावित इलाकों से नहीं है. लेकिन ये ज़रूर है कि चारों ओर उदासी का माहौल रहा है. हम कोशिश करेंगे कि खेलों में मेडल जीतें ताकि अपने देशवासियों को ख़ुशियों को कुछ पल दे सकें."

हिंदुस्तान आने की तमन्ना

Image caption मेलबर्न खेलों में शूटिंग में पदक जीतने वाले इरशाद अली

वैसे पाकिस्तानी खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए राष्ट्रमंडल महज़ एक खेल आयोजन ही नहीं है बल्कि वे इसे हिंदुस्तान आने का एक मौका भी मानते हैं.

पाकिस्तान बॉक्सिंग फ़ेडरेशन के सचिव मोहम्मद अकरम खान कहते हैं, "सरकार के स्तर पर भले ही दोनों देशों के रिश्ते ख़राब रहे हों लेकिन खिलाड़ियों के स्तर पर हमेशा ठीक रहे हैं. सब आना-जाना चाहते हैं. मेरा तो आधे से ज़्यादा परिवार भारत में ही रहता है-बदायूँ में,बरेली में, दिल्ली में. मैं तो कई बार भारत आया हूँ, अपना घर है."

टेनिस खिलाड़ी क़ुरैशी भी कहते हैं कि बतौर खिलाड़ी जब भी वो हिंदुस्तान आए हैं तो वो मौका उनके लिए ख़ास रहा है. वैसे राष्ट्रमंडल खेलों में पाकिस्तान का रिकॉर्ड कोई बहुत अच्छा नहीं रहा है.पाकिस्तान ने पहली 1954 में खेलों में हिस्सा लिया और छह पदक जीते थे. उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1958 में कार्डिफ़ में था जहाँ उसने 10 पदक जीते. वहीं 1974 से लेकर 86 तक हुए खेलों में पाकिस्तान लगभग 20 साल तक ग़ायब रहा.

मेलबर्न खेलों में पाकिस्तान पदक तालिका में 17वें नंबर पर था. 1954 के बाद से अब तक पाकिस्तान कुल 60 पदक जीत चुका है जिसमें 22 स्वर्ण शामिल हैं.

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