नज़र मेडल परः अलका तोमर

परिचय

अलका तोमर का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले के सिसोली गाँव में हुआ था.

पारिवार के सभी सदस्य पहलवान थे इसलिए अलका को भी इस खेल को खेलने में कोई परेशानी नहीं हुई. वर्ष 1998 में अलका भी देश के लिए कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने लगी.

खानदानी कोच जबर सिंह सोम से अलका ने कुश्ती सीखी, उन्होंने ही अलका के पिता, चाचा और भाई को भी पहलवानी सिखाई थी.

अलका के पिताजी चाहते थे कि वह कुश्ती में करियर बनाएं लेकिन माँ को बेटी का कुश्ती सीखना थोड़ा अटपटा लग रहा था. थोड़ा बहुत विरोध समाज का भी हुआ कि ये क्या हो रहा, लेकिन उनके पिताजी ने किसी की बातों पर ध्यान नहीं दिया और और इस राह पर अलका चल निकली.

पिता की उम्मीद पर अलका खरी उतरी और कई पदक जीतकर उनका नाम रोशन कर दिया. तब से लेकर अब तक अलका ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा.

वर्ष 2006 में दोहा में आयोजित एशियाई खेलों में अलका ने 55 किलोग्राम वर्ग में काँस्य पदक हासिल की तो वहीं चीन में आयोजित सीनियर कुश्ती प्रतियोगिता में भी उन्हें एक काँस्य पदक मिला.

उनकी अब तक की उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2007 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया.

खेलों की तैयारी

राष्ट्रमंडल खेल की तैयारी को लेकर वह आश्वास्त हैं. विदेशी कोच बहुत अच्छी ट्रैनिंग दे रहीं हैं. कोच की कोशिश रहती है कि खिलाड़ियों को कम से कम दो दिन, तीन दफ़ा अभ्यास कराया जाय.

पदक के लिए खिलाड़ी इतने ललायित है कि व्यस्त दिनचर्या के बाद अगर समय मिलता है तो खिलाड़ी खुद अभ्यास करते हैं.

आगामी राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने के लिए अलका पूरी तरह तैयार हैं. वह पूरे जोश से लबालब होकर कहती हैं, "मुझे ज़्यादातर प्रतियोगिता में पदक मिल चुका है, अब मेरी नज़र ओलंपिक में पदक जीतने पर है."

तस्वीरें

कुछ खट्टा-मीठा

ऐसा नहीं है कि एक उम्दा महिला पहलवान होने नाते अलका हमेशा अभ्यास ही करती रहती हैं और मेडल जीतने के बारे में ही सोचती रहती हैं.

हाँ कोई प्रतियोगिता नज़दीक हो तो ऐसा करना लाज़मी हो जाता है लेकिन जब ऐसा कोई इवेंट नहीं होता है तो अलका फ़िल्में देखना, शॉपिंग करना पसंद करती हैं.

फ़िल्मों में सन्नी दयोल अभिनीत फ़िल्में अलका को बहुत अच्छी लगती है. सन्नी दयोल अभिनीत फ़िल्लों के बारे में वह शर्माते हुए झेंप कर कहती है, "सन्नी दयोल की फ़िल्में मुझे बहुत अच्छी लगती है क्योंकि वह मेरा एक्शन हीरो है."

हालांकि आजकल वह कम फ़िल्में देखती हैं लेकिन फ्री टाईम मिलने पर शॉपिंग करना नहीं भूलती है.

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