पाकिस्तानी टीम को वाहवाही, कलमाड़ी की हूटिंग

  • 4 अक्तूबर 2010

राष्ट्रमंडल खेलों के शुरु होने से पहले जितनी आलोचना भारत को झेलनी पड़ी, उदघाटन समारोह के दिन उतनी ही वाहवाही भारत को मिली. दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में हुए उदघाटन समारोह को स्टेडियम में बैठकर देखना अपने आप में अलग ही अनुभव रहा. भारतीय खिलाड़ी जब मार्च पास्ट के लिए स्टेडियम में उतरे तो लोगों ने स्टेडियम में खड़े होकर और तालियों की ज़बरदस्त गड़गड़ाहट के बीच उनका स्वागत किया.

भारतीय टीम के बाद जिस देश को सबसे ज़्यादा तालियाँ मिली वो थी पाकिस्तान की टीम. यूँ तो भारतीय दर्शकों ने हर छोटे-बड़े देश की टीमों का अभिनंदन किया लेकिन पाकिस्तानी खिलाड़ी जैसे ही मैदान पर आए, स्टेडियम में हलचल सी मच गई.इंग्लैंड की टीम ने भी लोगों का दिल जीता-अपने पहनावे से. उनका पहनावा भारतीय रंग में रंगा था.

क्या ये वही रहमान है?

वो लम्हे जब स्टेडियम में सबसे ज़्यादा जोश देखा गया उनमें वो पल भी शामिल था जब एरआर रहमान मंच पर आए. उन्होंने खेलों का एंथम 'इंडिया बुला लिया' गाया और लोगों ने उस पर जमकर तालियाँ और सीटियाँ बजाई. उस समय ये देखकर हैरानी हो रही थी कि ये वही रहमान हैं जिनके गाने इंडिया बुला लिया की आम लोगों में इतनी आलोचना हुई थी और कहा गया था कि रहमान ने गाने के साथ न्याय नहीं किया.

बाद में रहमान ने अपने मशहूर गाने जय हो पर भी प्रस्तुति दी. इस गाने पर तो क्या भारतीय और क्या विदेशी सब झूमे. ऑस्कर जीतने के बाद से रहमान का गाना जय हो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मशहूर हो चुका है.

कलमाड़ी को मिली ठंडी प्रतिक्रिया

खेलों के दौरान कई लोगों ने भाषण दिया और कई लोगों को अच्छी वाहवाही मिली. पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का नाम आते ही लोगों ने ख़ूब तालियाँ बजाई. क्वींस बैटन लेकर जब विजेंदर सिंह और सुशील कुमार भी जब मैदान पर आए तो दर्शकों ने ज़बरदस्त स्वागत किया.

लेकिन जब राष्ट्रमंडल आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी मंच पर आए तो बहुत से लोगों ने नारेबाज़ी की और हूटिंग की. ज़ाहिर है कई लोगों को कलमाड़ी रास नहीं आए. हालांकि जब उन्होंने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री वाजपयी का शुक्रिया अदा किया तो लोगों ने ज़रूर तालियाँ बजाई. वैसे आयोजन शुरु होने से पहले कलमाड़ी ने ख़ूब फ़ोटोसेशन करवाया था. और हाँ उन्होंने अपने भाषण में पूर्व राष्ट्रपति का नाम ग़लत बोला. उन्होंने नाम लिया अब्दुल कलाम आज़ाद.

वुवुज़ेला की गूँज

दक्षिण अफ़्रीका में हुए फ़ुटबॉल कप से मशहूर हुए वुवुज़ेला नेहरू स्टेडियम में भी दिखाई दिया. दक्षिण अफ़्रीका की टीम जब मार्च पास्ट के लिए मैदान पर उतरी तो कई खिलाड़ियों के हाथ में वुवुज़ेला था.

यहाँ तक की दर्शक दीर्घा में भी कई लोग वुवुज़ेला के साथ थे. फ़ुटबॉल विश्व कप के दौरान वुवुज़ेला काफ़ी हिट रहा था और उसके शोर को लेकर शिकायत भी हुई थी. हालांकि नेहरू स्टेडियम में ऐसी कोई शिकायत किसी को नहीं थी.

सांसदों को परेशानी और मच्छरों का डर

उदघाटन समारोह देखने के लिए आए कई सांसदो के पास आमंत्रण पत्र तो था लेकिन बहुत से सांसद इधर उधर भटकते नज़र आए. दरअसल उन्हें ग़लत गेट पर भेज दिया गया था. भाजपा नेता कलराज मिश्र भी हमें ऐसे ही गेट पर मिले. वे ग़लत गेट पर पहुँचे हुए थे. दरअसल कई दर्शकों को भी ये शिकायत थी उन्हें सही दिशा बताने वाला कोई नहीं था और इतने बड़े स्टेडियम में उन्हें भटकना पड़ा.

वहीं विदेशों से आए कई प्रतिनिधि डेंगू को लेकर काफ़ी डरे हुए थे. वे अपने साथ ख़ास लोशन लाए थे जो उन्हें कीड़ों और मच्छरों से बचा सकें. लेकिन सुरक्षा चेकिंग प्वाइंट पर जब चेकिंग हुई तो उन्हें लोशन अंदर लाने नहीं दिया गया जिसे लेकर कुछ देर तक बहस भी हुई. विदेशी लोगों ने काफ़ी जिरह की लेकिन चेकिंग वालों ने लोशन अंदर नहीं लाने दिया. अंतत इन लोगों ने चेकिंग पर अपने लोशन सौंपने से पहले उसे अच्छे से अपने शरीर पर मला..डेंगू का डर साफ़ दिख रहा था

मिनी वर्ल्ड

नेहरू स्टेडियम में अजब ही नज़ारा था. दुनिया के अलग-अलग देशों के लोग हर ओर देखने को मिले. कानों में अलग-अलग भाषाओं के स्वर सुनने को मिल रहे थे. उससे भी दिलचस्प था विभिन्न देशों के रंग बिरंगे पोशाक और लिबास जिसे लेकर लोगों में काफ़ी उत्सुकता थी. ऐसे पारंपरिक लिबास कम ही देखने को मिलते हैं. ऐसा लग रहा था मानो मिनी वर्ल्ड हो. भारत से भी अलग-अलग हिस्सों से लोग आए हुए थे. हमने जिन लोगों से बात की वे लखनऊ, अमृतसर से लेकर मणिपुर तक के इलाक़ों से आए थे.

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