मैराथन दौड़ की ढाई हज़ारवीं वर्षगांठ

Image caption मैराथन की ढाई हज़ारवीं वर्षगांठ पर ग्रीस में दौड़ का आयोजन किया गया

ग्रीस में मैराथन दौड़ की ढाई हज़ारवीं वार्षिकी मनाने के लिए कोई 12 हज़ार लोगों ने एथेंस मैराथन में हिस्सा लिया.

उन्होंने मैराथन नगर से राजधानी एथेंस की 42 किलोमीटर लंबी दौड़ में हिस्सा लेकर उस संदेशवाहक की यात्रा को साकार किया जिससे मैराथन दौड़ का जन्म हुआ था.

490 वर्ष ईसापूर्व एथेंस की सेना ने मैराथन की लड़ाई में फ़ारस की सेना को पराजित किया था. किंवदंती है कि फ़ीडिपिडिस नाम का एक संदेशवाहक 42 किलोमीटर दौड़कर विजय का संदेश लेकर एथेंस पहुंचा.

रविवार को 12,500 लोगों ने उसी रास्ते इस मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया जिस रास्ते फ़ीडिपिडिस गया था.

हालांकि ग्रीस गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है लेकिन इस दौड़ के बजट में वृद्धि की गई.

स्पॉंसरशिप के ज़रिए 15 लाख यूरो एकत्र किए गए जबकि पिछले साल नौ लाख यूरो इकट्ठा हुए थे.

ऐतिहासिक दौड़

विजेता की पुरस्कार राशि पिछले साल की तुलना में डेढ़ गुना कर दी गई है. लेकिन अधिकतर लोगों ने पैसे के कारण नहीं बल्कि इस ऐतिहासिक दौड़ में अपना नाम दर्ज कराने के लिए इसमें हिस्सा लिया.

कीनिया के रेमंड बैट ने पुरुषों की दौड़ जीती जबकि लिथुआनिया की रासा ड्राज़दौकेत महिलाओं में सबसे आगे रहीं.

ग्रीस को एक बार फिर अपने स्वर्णिम अतीत में दमकने का अवसर मिला और कुछ समय के लिए आर्थिक संकट के अवसाद से मुक्ति मिली.

एथेंस मैराथन के आयोजकों को उम्मीद है कि इस दौड़ में हिस्सा लेने आए अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की वजह से पर्यटन आय में 2.5 करोड़ यूरो की वृद्धि होगी.

ये दौड़ ख़ासी मुश्किल है क्योंकि पहले 32 किलोमीटर तक चढ़ाई पर दौड़ना पड़ता है.

किंवदंती के अनुसार फ़ीडिपिडिस इतना थक गया था और प्यासा था कि संदेश देने के बाद वहीं ढेर हो गया था.

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