टेस्ट क्रिकेट के सुनहरे दिन

Image caption सफ़ेद कपड़ों में खिलाड़ियों को देखने का अपना अलग मज़ा है

यह वर्ष का वह समय है जब क्रिकेट प्रेमी गुनगुनी धूप में बैठकर सफ़ेद कपड़ों में तसल्ली से कलात्मक खेल का प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को देखते हैं.

कोई आपाधापी नहीं, गेंद की बल्ले से बेरहम धुनाई की बेताबी नहीं, दर्शक भी गला फाड़कर उछलते नहीं बल्कि खिलाड़ियों के कौशल और ख़ूबियों का बारीक आकलन करते हैं.

यह वर्ष का वह समय है जब क्रिकेट का उसकी पूरी खूबसूरती के साथ लुत्फ़ लिया जाता है. हर गेंद, हर शॉट का पूरा आनंद लिया जाता है, फटाफट क्रिकेट की तरह आपके दिमाग़ में सिर्फ़ गेंद की धुनाई की गड्डमड्ड छवि नहीं होती.

यह बात मैं कभी और कर रहा होता तो लोग इल्ज़ाम लगाते कि मैं एक गुज़रे ज़माने की बात कर रहा हूँ जब न तो मोबाइल फ़ोन थे और न ही आईपीएल.

मगर आज नहीं, जब भारत टेस्ट क्रिकेट में दुनिया में नंबर वन टीम है जो यह बताता है कि यह किसी एक या दो खिलाड़ी ने बल्कि टीम की सामूहिक शक्ति है.

ऐसा लगता है कि हम फिर उसी पुराने दौर में चले गए हैं जब टेस्ट क्रिकेट ही असली क्रिकेट था, वनडे क्रिकेट पैसे कमाने के लिए होने वाला बचकाना गेम था.

यह सपने जैसा ही लगता है कि भारत अपने क्रिकेटिंग शेड्यूल में बदलाव करके वनडे मैचों की क़ीमत पर टेस्ट क्रिकेट खेल रहा है.

एक ऐसा देश जिसने दुनिया को आईपीएल दिया, एक ऐसा देश जो पिछले दो वर्षों से अपनी पूरी ऊर्जा टेस्ट क्रिकेट की हवा निकालने में लगाता रहा है, आज क्रिकेट की जड़ों को सींचने के लिए भारत अतिरिक्त प्रयास कर रहा है जो बिल्कुल ही सूख गईं थीं.

टेस्ट पावर के रूप में भारत जिस तरह उभरा है वह बहुत कुछ एक समय अजेय समझे जाने वाले ऑस्ट्रेलिया की तरह है, भारत ने बहुत ही कठिन परिस्थितियों में फँसने के बाद ज़ोरदार इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करते हुए मैच जीते हैं.

भारत ने कठिन मैचों में ग़ज़ब का आत्मविश्वास दिखाया है और अब जिस गेम को लुप्तप्राय समझा जा रहा था वह एक बार फिर से फलने-फूलने लगा है.

तेंदुलकर को धीरज के साथ खेलते देखने, लक्ष्मण का संयम और सहवाग के शानदार शॉट इन सबसे मिलकर भारत की जीत का जो समां बनता है उसका मज़ा ही कुछ और है, यह वह दौर नहीं है जब खिलाड़ी व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाते थे और टीम हार जाती थी.

भारतीय टीम के पहले पायदान पहुँचने की ख़ुशी में ही बोर्ड ने इस सुझाव को मान लिया है कि टेस्ट क्रिकेट के खिलाड़ियों का मेहनताना वनडे क्रिकेट से अधिक होना चाहिए.

इस बात के लिए बोर्ड को बधाई देनी चाहिए कि उसने टेस्ट मैच की फ़ीस बढ़ाकर सात लाख रुपए कर दी है जो वनडे की मैच फ़ीस का लगभग दोगुना है.

उन लोगों को इस फ़ैसले के बाद काफ़ी अच्छा महसूस हो रहा होगा जिन्होंने बोर्ड से यह बदलाव करवाया है, हालाँकि उनमें से ज्यादातर खिलाड़ी अपने शानदार करियर के अंतिम दौर में हैं.

(लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार हैं)

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