एशियाड 2002 में भारत का प्रदर्शन

  • 11 नवंबर 2010
Image caption बुसान एशियाई खेल भारत के लिए सबसे अच्छे साबित हुए

दिल्ली में 1982 में हुए एशियाई खेलों के बाद से बुसान एशियाड भारत के लिए अब तक का सर्वश्रेष्ठ एशियाड था. भारत को 11 स्वर्ण, 12 रजत, और 13 कांस्य पदक मिले.

लेकिन खेल ख़त्म होते होते एक बहुत ख़राब ख़बर आई कि 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक विजेता और 5000 मीटर में कांस्य पदक विजेता सुनीता रानी को प्रतिबंधित दवाओं के सेवन का दोषी पाया गया.

गॉल्फ़ में शिव कपूर ने बारिश के बावजूद शानदार खेल दिखाते हुए श्रीलंका के प्रतिद्वंद्वी को तीन स्ट्रोक्स से पछाड़ते हुए स्वर्ण पदक जीता.

इसके बाद तो सोने के तमग़े जीतने का ज़िम्मा भारतीय एथलीटों ने संभाल लिया.

अंजू बॉबी जॉर्ज लंबी कूद में सोना लाईं तो के एम बीनामोल ने 800 मीटर दौड़ और बहादुर सिंह ने गोला फेंक में स्वर्ण पदक जीता.

बारहवें दिन भारत ने एथलेटिक्स में तीन और स्वर्ण पदक झटके.

सरस्वती साहा 200 मीटर दौड़ में सबसे आगे रहीं तो नीलम जे सिंह ने महिलाओं के चक्का फेंक में स्वर्ण पदक जीता. महिलाओं का 400-4 मीटर का स्वर्ण भी भारतीयों के हिस्से रहा.

एथलेटिक्स में भारत को मिलने वाले सात स्वर्ण पदकों में से छः महिलाओं ने जीते.

टेनिस के युगल मुक़ाबले में महेश भूपति और लिएंडर पेस ने पाँच महीने बाद साथ खेलते हुए कोरियाई जोड़ी ली हंग तेक और चंग ही सियोक को हराते हुए स्वर्ण पदक जीता.

लेकिन सबसे ज़्यादा दिल टूटा हॉकी में. पाकिस्तान पर तो भारत ने पार पा लिया लेकिन फ़ाइनल में दक्षिण कोरिया उस पर हावी रहा. शून्य तीन से पिछड़ने के बाद भारत ने स्कोर बराबर किया लेकिन अंततः विश्व हॉकी में तेज़ी से उभरे दक्षिण कोरिया ने उसे हरा दिया.

कबड्डी में भारत ने न सिर्फ़ स्वर्ण जीता बल्कि फ़ाइनल में पाकिस्तान को बहुत आसानी के साथ हराया भी.

निशानेबाज़ों ने बहुत निराश किया और बिलियर्ड्स में भी परिणाम आशानुरूप नहीं आए.

गीत सेठी सिर्फ़ रजत और कांस्य पदक ही जीत पाए.

मुक्केबाज़ दूसरे चक्र से आगे बढ़ ही नहीं पाए और पुलेला गोपीचंद भी स्थानीय लड़के से सीधे गेम्स में हारकर बाहर हो गए.

कुल मिलाकर एथलेटिक्स में भारत का जलवा रहा लेकिन सुनीता रानी प्रकरण ने मुँह का मज़ा किरकिरा कर दिया.

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