एशियाई खेलों की भव्य शुरूआत

उदघाटन समारोह

चीन के दक्षिणी शहर ग्वांगजो में परंपरा से हटते हुए एशियाई खेलों का किसी बड़े स्टेडियम से बाहर उदघाटन हुआ है.

ग्वांगजो की मुख्य नदी जूजियाँग या पर्ल रिवर के किनारे हुए इस उदघाटन समारोह का मुख्य आकर्षण पानी से जुड़ी प्रस्तुतियाँ थीं.

ये नदी शहर में काफ़ी पवित्र मानी जाती है और उसी के बीच में एक छोटा सा द्वीप जैसा है हाइशिनसा. वहीं पर नाव की आकृति में बने आयोजन स्थल में ये कार्यक्रम हुआ.

एथलीट्स भी 45 नावों पर सवार होकर पर्ल रिवर के बीच से गुज़रते हुए उदघाटन स्थल तक पहुँचे. हर नाव पर ख़ूबसूरत ढंग से बत्तियाँ जल रहीं थीं और उसी के ज़रिए हर देश या क्षेत्र का एक प्रमुख स्थल उस नाव पर दिखाया गया था.

भारतीय खिलाड़ी निशानेबाज़ गगन नारंग की अगुआई में स्टेडियम तक जिस नाव पर आए उस पर ताज महल की आकृति बनी थी.

नदी के दोनों ओर लोग खड़े होकर एथलीट्स का अभिवादन कर रहे थे.

पानी पर आधारित प्रदर्शन

Image caption उदघाटन समारोह का थीम 'जल' था और लगभग हर प्रस्तुति में पानी किसी न किसी रूप में मौजूद रहा.

लगभग 35 हज़ार दर्शकों से भरे उस आयोजन स्थल में पानी के फ़व्वारों को बेहद ख़ूबसूरती से पेश किया गया. छोटे-छोटे बच्चों ने उस पानी के बीच में आकर रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुति दी.

लोग तार और रस्सियों के सहारे आसमान में करतब दिखाते हुए नज़र आए तो पास ही में खड़े ग्वांगजो टावर से जब आतिशबाज़ी निकली तो ऐसा लगा कि वो पूरा टावर ही फुलझड़ी बन गया हो.

उदघाटन कार्यक्रम में ग्वांगजो की पूरी संस्कृति दिखाई गई कि किस तरह अब चीन के तीसरे सबसे बड़े इस व्यावसायिक शहर का विकास हुआ है और लोगों का जीवन कैसे कभी पानी के इर्द-गिर्द ही घूमता था.

उत्तर कोरिया, ईरान और इराक़ के एथलीट्स का दर्शकों ने ख़ास तौर पर काफ़ी ज़ोरदार स्वागत किया. सबसे अंत में चीन का दल वहाँ पहुँचा और उत्साहित दर्शक तालियाँ बजाते हुए खड़े हो गए.

सुरक्षा

Image caption चीन के राष्ट्रपति हू जिनताओ ने खेलों की उदघाटन की घोषणा की.

चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने खेलों के उदघाटन की घोषणा की. राष्ट्रपति हू की घोषणा के तुरंत बाद पूरा आयोजन स्थल एक बार फिर आतिशबाज़ी से रंग गया.

हालाँकि उसके बाद उस आतिशबाज़ी का धुआँ उस जगह पूरी तरह फैल गया था. वर्षा की स्थिति में बादलों को हटाने की व्यवस्था रखने वाले आयोजकों ने शायद इस बात पर ध्यान नहीं दिया था कि नदी के किनारे जब आतिशबाज़ी होगी और पूरा धुआँ लोगों के बीच फैल जाएगा तब उसका निदान क्या होगा.

इन खेलों के लिए ज़बरदस्त सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और स्थानीय लोगों पर काफ़ी रोकथाम भी थी. उदघाटन समारोह के आस पास ज़्यादा भीड़ नहीं दिखी और गाड़ियाँ उस रास्ते पर रोक दी गईं थी.

अंत में एशियाई खेलों की मशाल जलने के साथ ही उदघाटन समारोह समाप्त हुआ और अब विभिन्न देशों के ये एथलीट्स शनिवार से 42 खेलों में 476 स्वर्ण पदकों के लिए दाँव लगाएँगे.

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