एकाग्रता बढ़ाने के लिए साँप पकड़िए!

तीरंदाज़ी भले ही भारत में रामायण और महाभारत से जोड़ी जाती हो मगर इस खेल में प्रभुत्व दक्षिण कोरिया का रहा है.

एशियाई खेलों में दक्षिण कोरिया ने पुरुष टीम का स्वर्ण पदक लगातार आठवीं बार जीत लिया. तीरंदाज़ी में ऐसा प्रभुत्व किसी और देश का कभी नहीं रहा है. तीरंदाज़ी एशियाड में नौ बार शामिल हुई है और उसमें से आठ बार कोरिया को मिली ये जीत उसकी कहानी कहती है.

यहाँ के मीडिया में छपी एक ख़बर से तनाव में उनकी एकाग्रता बनाए रखने की जड़ का पता चलता है. वैसे ये ख़बर कितनी सच है कितनी झूठ इसकी पुष्टि तो नहीं की जा सकी.

ख़बर ये है कि कोरियाई महिला टीम को साँपों को पकड़ने और उन्हें सँभालने में माहिर किया गया है जिससे वे एकाग्रचित्त हो सकें और प्रतियोगिता में तनाव के मौक़े पर इसका फ़ायदा उन्हें मिले.

इतना ही नहीं ख़बर तो चीनी तीरंदाज़ों के बारे में भी है और वो ये कि एशियाई खेलों की तैयारी में उन्हें बाघ की पूँछ छूने जैसे काम दिए गए जिससे उनकी एकाग्रता ठीक रहे.

अब सोचिए कोरिया का साँप का कारनामा और चीन का बाघ वाला. पुरुष और महिला टीम मुक़ाबलों में इन्हीं दोनों को स्वर्ण और रजत मिला.

दोनों मुक़ाबलों में काँस्य भारत के पास आया, जहाँ तक पता चला है भारतीय तीरंदाज़ों से ऐसा कुछ नहीं करवाया गया.

वैसे भारतीय तीरंदाज़ी महासंघ अब किसी चिड़ियाघर से संपर्क साध रहा हो तो पता नहीं.

एशियाड में अफ़्रीकी

एथलेटिक्स में महिलाओं की 10 हज़ार मीटर की दौड़ में अंतिम चक्कर से पहले तक तो बहरीन की धावक ही सबसे आगे चल रही थी, मगर उनको देखकर आप कतई नहीं कह सकते कि वह किसी खाड़ी देश से हैं.

उसकी वजह ये है कि दरअसल वह इथियोपिया में जन्मी हैं मगर अब बहरीन का प्रतिनिधित्व करती हैं.

पिछले कुछ वर्षों से बहरीन और क़तर ने अफ़्रीकी मूल के धावकों को अपने यहाँ की नागरिकता देकर दौड़ाना शुरू किया है नतीजा ये कि लंबी दूर की ज़्यादातर दौड़ वही लोग जीतते हैं.

सोमवार को भी पुरुषों की 400 मीटर दौड़ का फ़ाइनल फ़ेमी ओगुनोडे ने जीत लिया और वो भी क़तर की न होकर नाइजीरियाई हैं.

इससे पहले पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में बहरीन ने स्वर्ण और क़तर ने रजत और काँस्य जीता मगर वे धावक मूलतः कीनियाई हैं.

पिछले एशियाई खेलों में पुरुषों की 800, 1500, 5000, 10 हज़ार मीटर और मैराथन दौड़ कीनियाई मूल के धावकों ने ही जीती थी.

अफ़्रीकी देशों में जब इन धावकों को मौक़े नहीं मिलते तो वे खाड़ी के देशों का प्रतिनिधित्व करने चले आ रहे हैं.

खाड़ी देशों का तर्क है कि जब यूरोपीय और अमरीकी देश दूसरे देशों के एथलीट्स को अपने यहाँ की नागरिकता देकर दौड़ा सकते हैं तो वे क्यों नहीं.

ट्रैक पर ये स्थिति देखकर कुछ लोग मज़ाक करते सुने गए कि कहीं कल को ये देश यूसैन बोल्ट को भी अपने यहाँ से दौड़ने के लिए न ले आएँ.

कभी इधर-कभी उधर

ये तो चलिए किसी एक ही देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

मगर कज़ाख़स्तान की हॉकी टीम की तीन खिलाड़ियों को इसलिए निलंबित कर दिया गया क्योंकि उन्होंने इस साल विश्व कप के लिए हुए क्वालिफ़ायर मुक़ाबलों में बेलारूस का प्रतिनिधित्व किया था.

टूर्नामेंट के अधिकारियों ने इन एशियाई खेलों में अब उन तीनों खिलाड़ियों के हिस्सा लेने पर रोक लगा दी है.

इतना ही नहीं कज़ाखस्तान ने इससे पहले जिन भी टीमों के विरुद्ध मैच खेले थे उन सभी टीमों को कज़ाखस्तान पर 5-0 के स्कोर से विजेता घोषित किया गया है.

ये मसला एशियाई ओलंपिक परिषद, एशियाई हॉकी महासंघ और अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ को भी भेजा गया है और तीनों खिलाड़ियों पर और भी कार्रवाई हो सकती है.

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