'फ़ोटो खिंची तो पता चला'

  • 22 नवंबर 2010
सुधा सिंह
Image caption सुधा सिंह ने तीन हज़ार मीटर स्टीपल चेज़ में स्वर्ण पदक जीता

एशियाई खेलों में तीन हज़ार मीटर स्टीपल चेज़ विजेता भारत की सुधा सिंह अब भी उस लम्हे को भूल नहीं पा रही हैं जब रेस ख़त्म हुई.

बीबीसी से बात करते हुए सुधा ने कहा, "मुझे यक़ीन ही नहीं हो रहा था कि मैंने स्वर्ण पदक जीत लिया है. जब वहां मौजूद फ़ोटोग्राफ़र मेरी तस्वीरें खींचने लगे तब मुझे अहसास हुआ कि मैंने मैदान मार लिया है."

दरअसल सुधा ने फ़ोटो फ़िनिश में चीन की जिन युआन को हराकर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता. सुधा ने 9 मिनट 55.67 सेकंड का समय निकाला, जबकि युआन ने रेस पूरी करने के लिए 9 मिनट 55.71 सेकंड लिए.

सुधा कहती हैं, "रेस पूरी होने वाली थी और मुझे लग रहा था कि मैं काफ़ी लीड ले चुकी हूं. लेकिन तभी मैंने देखा कि युआन मेरे बगल में आ चुकी है. तब मैंने दोबारा पूरा ज़ोर लगाया और रेस पूरी की."

रविवार को ही सुधा से ठीक पहले भारत की प्रीजा श्रीधरन 10 हज़ार मीटर में स्वर्ण पदक जीत चुकीं थीं. सुधा ने बताया कि प्रिजा के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद उनका भी आत्मविश्वास काफ़ी बढ़ा और उनका सारा डर ग़ायब हो गया.

वो कहती हैं, "मेरे कोच ने रेस शुरु होने से ठीक पहले मुझसे कहा कि तुम एशिया में बेस्ट हो. डरो मत, किसी और पर ध्यान मत दो. सिर्फ़ अपने आप पर ही फ़ोकस रखो."

रायबरेली की रहने वाली सुधा सिंह दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने के बावजूद पांचवे स्थान पर ही आ सकीं थीं. वो मुंबई में भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं.

सुधा शादीशुदा हैं और कहती हैं कि उनके ससुराल वालों का उन्हें पूरा सहयोग रहता है. सुधा के मुताबिक़ उनके परिवार वाले, दोस्त और रिश्तेदार बेसब्री से उनका इंतज़ार कर रहे हैं और घर वापसी पर बड़ा जश्न होगा.

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