चीन में हिट हैं विजेंदर

मुक्केबाज़ विजेंदर का जादू भारत में ही क्यों यहाँ चीन तक में चल रहा है.वैसे तो जब तक चीनी मुक्केबाज़ रिंग में थे, चीनी समर्थकों की आवाज़ के आगे किसी की आवाज़ सुनाई ही नहीं दे रही थी मगर संतोष, विजेंदर और मनप्रीत के मुक़ाबलों से पहले तक चीनी मुक्केबाज़ों के मुक़ाबले ख़त्म हो चुके थे.

उसके बाद तो भारतीय समर्थक इतनी तादाद में थे कि उन्हीं की आवाज़ सबसे ज़्यादा सुनाई दे रही थी.

मार ..... को, जो बोले सो निहाल, भारत माता की जय, जीतेगा भई जीतेगा-इंडिया जीतेगा के नारे ही सुनाई दे रहे थे.

विजेंदर के मुक़ाबले के बाद तो लोग एथलीट्स के स्टेडियम में आने वाले दरवाज़े के पास जाकर खड़े हो गए और विजेंदर बाहर आओ, विजेंदर बाहर आओ चिल्लाने भी लगे.

गेट के पास अच्छी ख़ासी भीड़ जमा देखकर सुरक्षाकर्मी भी थोड़े चौकन्ने हो गए मगर लोग इतने जोश में थे कि वे वहाँ से तब तक नहीं डिगे जब तक उन्हें ये नहीं पता चल गया कि विजेंदर तो मुक़ाबले के तुरंत ही बाद बस में बैठकर खेल गाँव वापस चले गए.

बेचारे प्रशंसक ज़ोर-ज़ोर से ये कहते हुए चले गए कि विजेंदर हम तुम्हारे लिए आए और तुम चले भी गए.

मगर भारतीय अधिकारियों ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा कि वे विजेंदर के फ़ाइनल वाले दिन आएँ तो विजेंदर से मुलाक़ात हो जाएगी.

स्टेडियम में हिंदी गाना

मुक्केबाज़ी में किसी भी मुक़ाबले के बाद जिस देश का मुक्केबाज़ जीतता था उस देश का कोई गाना या संगीत बजाया जा रहा था.

सेमीफ़ाइनल में भारत के नौ मुक्केबाज़ थे और उनमें से पाँच मुक्केबाज़ जीत गए.

सबसे पहले कविता गोयत का मुक़ाबला था मगर वो हार गईं और उसके बाद सुरंजय सिंह को भी विवादास्पद रूप से हार का सामना करना पड़ा.

मगर तीसरे मुक़ाबले में विकास कृष्ण को जीत मिली. अभी बाउट ख़त्म हुई ही थी कि गाना सुनाई दिया- पप्पू कांट डांस साला.

स्टेडियम में एक हिंदी गाना बजता सुनकर अच्छा लगा.मगर फ़िल्म जाने तू या जाने ना का ये गाना किसने सुझाया और क्यों सुझाया ये पता नहीं चला.

इसे मुक्केबाज़ी के मुक़ाबले के बाद बजाने की वजह भी नहीं समझ आई पर पाँचों बार भारतीय मुक्केबाज़ों के जीतने पर यही गाना बजता रहा.

विजेंदर और सेमीफ़ाइनल

बात जब मुक्केबाज़ों की चली है तो विजेंदर का बात बार-बार निकलती है. जब राष्ट्रमंडल खेलों के सेमीफ़ाइनल में हारे थे तो उन्होंने कहा था कि क़िस्मत में जब काँस्य ही लिखा है तो सोना कहाँ से मिलेगा.

उससे पहले बीजिंग ओलंपिक में भी उन्हें काँस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा था क्योंकि वो वहाँ भी सेमीफ़ाइनल से आगे नहीं बढ़ पाए थे.

अब फ़ाइनल में पहुँचने का मतलब है कि काँस्य से तो वो आगे बढ़ गए और मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मैं काँस्य से नहीं बल्कि काँस्य मुझसे प्यार करता है मगर इस बार बात आगे बढ़ चुकी है.

वो इस बार स्वर्ण जीत पाएँ इसलिए काफ़ी ध्यान-योग भी कर रहे हैं.

उनका कहना था कि अंक गँवाने के बाद जो ग़ुस्सा आता है उसको रोककर आराम से खेलने के लिए वो ध्यान योग कर रहे हैं और इसका फ़ायदा भी हो रहा है.

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