एशियाई खेलों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

भारत के लिए शुक्रवार इन एशियाई खेलों का सबसे स्वर्णिम दिन रहा जबकि उसके एथलीट्स ने चार स्वर्ण पदक जीतकर भारत को पदक तालिका में छठे स्थान पर पहुँचा दिया.

कुल पदकों के हिसाब से ये भारत का आज तक एशियाई खेलों में सबसे अच्छा प्रदर्शन है.

सबसे पहला स्वर्ण पदक आया कबड्डी से जहाँ पहले महिलाओं ने थाईलैंड को 14 के मुक़ाबले 28 अंकों से हरा दिया.

पुरुषों के वर्ग में कबड्डी के 1990 में एशियाड में शामिल किए जाने के बाद से भारत आज तक कभी स्वर्ण हारा ही नहीं और एक बार फिर वही हुआ जबकि भारत ने ईरान को 37-20 के स्कोर से हराकर दिन का दूसरा स्वर्ण पदक जीता.

एथलेटिक्स एक बार फिर भारत के लिए पदक लाया.

सबसे पहले महिलाओं की पाँच हजा़र मीटर की रेस में प्रीजा श्रीधरन और कविता राउत देश का प्रतिनिधित्व कर रहीं थीं.

उन्होंने 10 हज़ार मीटर रेस में स्वर्ण और रजत जीता था मगर इस रेस में वे रजत और काँस्य जीत सकीं. वैसे उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और भारत का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया.

प्रीजा ने 15 मिनट 15.89 सेकेंड और कविता राउत ने 15 मिनट 16.54 सेकेंड्स में ये रेस जीती.

इसके बाद कविता ने कहा, “हमारे कोच ने कहा था कि पदक से पहले अपने समय पर ध्यान रखना. अपनी गति से भागना दूसरों के हिसाब से नहीं और अगर दूसरे तुम्हारी गति से भागें तो अंत में जब वो अपनी गति बढ़ाएँ, तुम लोग भी बढ़ा लेना.”

एथलेटिक्स का स्वर्ण

इसके बाद भारत को एथलेटिक्स का स्वर्ण दिलाया चार गुणा चार सौ मीटर की महिलाओं की रिले टीम ने. उन्होंने तीन मिनट 29.02 सेकेंड्स में ये रेस पूरी की.

भारत ने 2006 के दोहा एशियाई खेलों में भी ये स्वर्ण पदक जीता था. भारतीय टीम की सदस्य थीं मंजीत कौर, सिनी जोस, अश्विनी अक्कुनजी और मनदीप कौर.

जीत के बाद बीबीसी हिंदी से बात करते हुए मंजीत कौर ने कहा, “ये मेरा तीसरा एशियाई खेल है और तीसरी बार मैंने स्वर्ण जीता है. हमें थोड़ा तनाव इस बात को लेकर था कि राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक आया था तो यहाँ भी स्वर्ण लाना है.”

लेकिन टीम ने उस दबाव को पीछे छोड़ते हुए आसानी से रेस जीत ली.

मुक्केबाज़ी

Image caption विजेंदर सिंह ने मुक्केबाज़ी में स्वर्ण दिलाया

इसके बाद सभी की नज़रें लगीं थीं मुक्केबाज़ी के मुक़ाबलों पर जहाँ तीन भारतीय मुक्केबाज़ फ़ाइनल में थे.

पहला मुक़ाबला था पुरुषों के 64 किलोग्राम वर्ग में जहाँ संतोष कुमार विरोठू कज़ाख़स्तान के दानियार येलेउसिनोव के विरुद्ध रिंग में थे.

दानियार ने आसानी से 16-1 से मुक़ाबला जीत लिया. अगला मुक़ाबला भारत के स्टार मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह का 75 किलोग्राम वर्ग में था.

विजेंदर ने पिछले एशियाई खेलों में, बीजिंग ओलंपिक में और दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में काँस्य पदक ही जीता था. उनका मुक़ाबला था उज़बेकिस्तान के अब्बोस अतोएव से.

वही अब्बोस जिन्होंने विजेंदर को पिछले साल की विश्व चैंपियनशिप में सेमीफ़ाइनल में ही 7-3 से हरा दिया था.

इस टूर्नामेंट में संयम बनाकर खेल रहे विजेंदर ने पहले राउंड में 2-0 से बढ़त ली, दूसरे में उसे बढ़ाकर 5-0 किया और तीसरे में 7-0 से स्वर्ण पदक जीत लिया.

लेकिन उसके बाद 91 किलोग्राम वर्ग में अमनप्रीत सिंह सीरिया के प्रतिद्वंद्वी से हार गए.

सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

इसके अलावा शतरंज में भारत की पुरुषों की टीम को काँस्य पदक मिला. रोलर स्पोर्ट्स में अनूप कुमार यम को अकेले और भरत कुमार पांचाल के साथ जोड़ी में भी काँस्य पदक मिले.

भारत 14 स्वर्ण, 17 रजत और 33 काँस्य को मिलाकर कुल 64 पदकों के साथ पदक तालिका में छठे स्थान पर है.

भारत का इससे पहले का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1982 के नई दिल्ली एशियाई खेलों का था जहाँ उसने कुल 57 पदक जीते थे.

वहीं चीन ने 197 स्वर्ण, 117 रजत और 98 काँस्य पदकों के साथ एशियाड का आज तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया.

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