सिर मुँडाए और ओले पड़े

  • 26 नवंबर 2010
मलेशियाई टीम

मलेशियाई हॉकी टीम फ़ाइनल में पाकिस्तान के विरुद्ध पूरी तरह तैयार होकर आई थी.

इस तैयारी में सिर्फ़ मैदान में अभ्यास की ही तैयारी नहीं थी बल्कि भारत के विरुद्ध सेमीफ़ाइनल जीतने वाली टीम के खिलाड़ियों ने नज़र उतरवाने की प्रक्रिया में बाल घुटवा दिए.

मलेशिया के सिख खिलाड़ी बलजीत सिंह को छोड़कर सभी खिलाड़ी गंजे दिख रहे थे मगर ये टोटका काम नहीं आया और मैच तो बराबरी तक भी नहीं पहुँचा.

बल्कि भारत के विरुद्ध मैच में पेनल्टी कॉर्नर के ज़रिए दनादन गोल करने वाले मलेशियाई खिलाड़ी इस मैच में एक भी पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील नहीं कर सके.

निराश भारतीय

भारतीय हॉकी टीम टूर्नामेंट में स्वर्ण जीतने की पूरी उम्मीद और तैयारी से आई थी. मलेशिया के विरुद्ध सेमीफ़ाइनल में खेल के अंतिम मिनटों में गोल हो जाने से बाज़ी पलट गई और टीम अतिरिक्त समय में हार गई.

उस हार का दर्द अब तक टीम के सभी सदस्यों के चेहरे पर साफ़ दिख रहा है. काँस्य पदक के लिए हुए मैच में भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही टीमें जैसे आधे मन से खेल रही हों.

न भारत को पदक जीतकर कुछ ख़ास उल्लास हुआ और न ही दक्षिण कोरिया को ये पदक हार जाने का कोई ख़ास ग़म.

टीम के सभी सदस्यों के चेहरे लटके हुए थे और इस्तीफ़ा दे चुके मैनेजर हरेंद्र सिंह आँसू नहीं रोक सके.

कप्तान राजपाल सिंह ने भी उन्हें सांत्वना दी और बाक़ी मीडियाकर्मियों ने भी मगर हार की चोट उनके दिल पर काफ़ी गहरी थी और वह नम आँखों के साथ ही ड्रेसिंग रूम की ओर बढ़ गए.

चीयरलीडर्स का असर

Image caption चीयरलीडर्स निर्देशों से नाराज़ हैं

बिकनी पहने ख़ूबसूरत चीयरलीडर्स एशियाई खेलों में बीच वॉलीबॉल का एक प्रमुख आकर्षण हैं और वे काफ़ी भीड़ भी आकर्षित करती हैं.

मगर कुछ दिनों पहले यमन के एक खिलाड़ी ने कहा कि इंडोनेशिया के विरुद्ध उनके मैच में टीम इसलिए हार गई क्योंकि खिलाड़ी चीयरलीडर्स को निहारने में लगे थे.

बाद में उस खिलाड़ी ने कहा भी कि उन्होंने ये बात मज़ाक में ही कही थी और उन लड़कियों की वजह से बीच वॉलीबॉल को लोकप्रियता मिल रही है.

मगर आयोजकों ने बात को गंभीरता से लिया और लड़कियों को लचक और मटक थोड़ा क़ाबू में रखने के लिए कहा गया.

इन चीयरलीडर्स का दल इस निर्देश से थोड़ा सा ख़फ़ा भी है क्योंकि उनके मुताबिक़ एक तो वो लोग कई बार दिन में 18 घंटे तक प्रदर्शन करती हैं और उस पर से भी उनकी सराहना करने के बजाए उन्हें तड़क-भड़क कम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं.

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