ऐशेज़ में इंग्लैंड की जीत का रोमाँच

  • 29 दिसंबर 2010
ऐशेज़ की जीत की ख़ुशियाँ मनाते इंग्लैंड के खिलाड़ी
Image caption इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने ऐशेज़ बरक़रार रखने की ख़ुशियाँ मनाईं

मेलबर्न टेस्ट में जब ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी सिर्फ़ 98 रनों पर सिमट गई थी और इंग्लैंड की सलामी जोड़ी ने 159 रन जोड़े थे तभी इस मैच का नतीजा तय हो गया था और वो था इंग्लैंड की जीत.

उन्हें सिर्फ़ जीत का इंतज़ार करना था और वो मौक़ा आया बुधवार की सुबह जब इंग्लैंड ने 24 साल में पहली बार ऐशेज़ पर क़ब्ज़ा बरक़रार रखा.

पिछली बार उन्हें ऑस्ट्रेलिया में 1986-87 में जीत हासिल हुई थी और मैंने पहली बार 1991 में ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था. इस तरह से मैं इंग्लैंड की पिछली पाँच विफल सिरीज़ का गवाह रहा हूँ मगर आख़िरकार ये दर्दनाक सफ़र ख़त्म हुआ.

इस राह में कुछ सुखद क्षण भी थे मगर आम तौर पर झुंझला देने वाली बुरी यादें ही हैं.

मैं आया तो यहाँ तटस्थ रिपोर्टिंग करने के लिए था पर अगर आप अँगरेज़ हैं तो आप इंग्लैंड को ही जीतते देखना चाहते हैं. इसलिए 20 साल तक ऑस्ट्रेलियाई जीत की ख़बरें देने के बाद ये एक रोमाँचक मौक़ा था.

जीत का रोमाँच

उस क्षण का गवाह होना, उस शोर और जोश का हिस्सा होना और मैच के तुरंत बाद खिलाड़ियों से उस ख़ुशी के मौक़े पर बात करना....यही वो सारी वजहें हैं जिनकी से हम ये नौकरी करते हैं.

अगर मैं ऑस्ट्रेलिया को इंग्लैंड पर मिली जीत के पन्ने पलटूँ तो 2006-07 में 5-0 से मिली हार सबसे बुरी थी इसीलिए इस बार मिली ये जीत इतनी ख़ास भी है.

उस समय हमें पता था कि इंग्लैंड हारने वाला है क्योंकि तब खिलाड़ी खेल को लेकर फ़ोकस नहीं थे. वो पूरी तरह ग़ैर-पेशेवराना दौरा था.

खिलाड़ियों की गर्लफ़्रेंड्स और पत्नियाँ दौरे की शुरुआत से ही वहाँ मौजूद थीं, खिलाड़ियों का खेल पर ध्यान ही नहीं था, उस दौरे में तो हार तय ही थी.

कई और दौरों पर भी ऐसा ही महसूस हुआ. जब मैं ऑस्ट्रेलिया के एबीसी रेडियो के कॉमेन्ट्री बॉक्स में घुसता था इंग्लैंड के इस प्रदर्शन की मुझे भी सफ़ाई देनी पड़ती थी. वो काफ़ी शर्मनाक स्थिति होती थी और वे लोग काफ़ी हँसते थे.

पासा पलटा

इस बार पासा पलट गया था मगर ये कहना होगा कि उन लोगों ने इस हार को काफ़ी बेहतर ढंग से स्वीकार किया है.

वे शायद इस बात को मानना न चाहें मगर फ़िलहाल ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में कई ऐसे मसले उठ खड़े हुए हैं जिनका हल ढूँढ़ना होगा.

फिर ऐसी हार के बाद ही वो कमज़ोरियाँ और ज़ोर-शोर से उठ खड़ी होती हैं जिनके बारे में क्रिकेट के प्रशासकों और चयनकर्ताओं को सिर्फ़ सोचना ही नहीं होगा बल्कि कुछ करना भी होगा.

मौजूदा इंग्लैंड टीम वास्तव में काफ़ी अच्छी टीम है. टीम में जीत की एक चाह है, उनमें अनुभव है और आपस में दोस्ती है.

मुझे नहीं लगता कि इन खिलाड़ियों को इस जीत की अहमियत का अंदाज़ा भी है. इस पूरे दौरे पर उनका ध्यान क्रिकेट पर ही रहा और एक भी बार शायद वो ये सोच नहीं पाए होंगे कि जीत के बाद घर लौटने पर किस तरह का स्वागत होगा.

टीम का रवैया

Image caption ऑस्ट्रेलिया को अब नई रणनीति और योजना पर विचार करना होगा

बुधवार को वो ये सोचकर मैदान में उतरे होंगे कि 'चलो अब बस इसे निबटा दिया जाए' और अचानक.. पलक झपकी और वो हो भी गया, 'अब क्या करें ये कैसा एहसास है?'. मगर टीम का पूरा रवैया और उनकी जीत की भावना पूरे दौरे पर बिल्कुल सही रही है.

इस जीत की कुंजी रही है तैयारी. टीम के खिलाड़ियों से लेकर उन्हें मदद करने वाले सपोर्ट स्टाफ़ तक ने जी-तोड़ मेहनत की है.

कोच ऐंडी फ़्लार और कप्तान ऐंड्रयू स्ट्रॉस के बीच जो समझ है उसने भी काफ़ी मदद की है. स्ट्रॉस की टीम में इज़्ज़त है और साथी उसे पसंद भी करते हैं.

जहाँ तक उनकी कप्तानी की बात है तो उस लिहाज़ से ये सिरीज़ उनके लिए काफ़ी अच्छी रही है, उन्होंने कई अच्छे फ़ैसले किए और भाग्य ने भी उनका साथ दिया है.

मगर सिरीज़ अभी ख़त्म नहीं हुआ है. यहाँ से टीम अब मेलबर्न के लिए रवाना होगी अंतिम टेस्ट के लिए. क्या इंग्लैंड वो टेस्ट जीतकर ऐशेज़ भी जीत लेगा.

ऐशेज़ की शुरुआत में मैंने कहा था कि मैं इंग्लैंड के पक्ष में 3-1 की भविष्यवाणी करता हूँ और संभव है कि मेरी भविष्यवाणी सच भी साबित हो.

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