ऑस्ट्रेलियाई प्रभुत्व पर लगता विराम

ऐशेज़ के साथ ऐंड्रयू स्ट्रॉस
Image caption मेलबर्न टेस्ट जीतने के साथ ही ऐशेज़ इंग्लैंड के पास बरक़रार है

अगले कुछ दिनों में सिर्फ़ ये साल ही ख़त्म नहीं होगा बल्कि ये दशक भी समाप्त हो जाएगा और क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया का इस दशक का प्रभुत्व भी शायद अब समाप्ति पर है.

मेलबर्न टेस्ट में इंग्लैंड के हाथों मिली हार ने ऐशेज़ जीतने का उसका सपना तोड़ दिया और इस शृंखला के बाद टीम के साथ ही चयनकर्ताओं को बैठकर आगे की राह सोचनी होगी.

उसके पास अब भी अगला टेस्ट जीतकर शृंखला 2-2 से बराबर करने का मौक़ा है मगर ऐसा होने पर भी दो बड़ी हारों को पीछे छोड़ना आसान नहीं होगा.

माइकल वॉन की कप्तानी में इंग्लैंड ने 2005 में अपनी ज़मीन पर ऐशेज़ पर क़ब्ज़ा किया था. एक ज़बरदस्त सिरीज़ इंग्लैंड ने 2-1 से जीती थी और दूसरा टेस्ट इंग्लैंड सिर्फ़ दो रनों से जीत पाया था, यानी मुक़ाबला एकतरफ़ा नहीं रहा था और ऑस्ट्रेलिया ने बराबरी की टक्कर दी थी.

उसके बाद 2006-07 में जब इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया गया तो ऑस्ट्रेलिया ने उसे बुरी तरह धो दिया और ऐशेज़ के इतिहास में पहली बार 5-0 से जीत हासिल की.

पिछले यानी 2009 के ऐशेज़ में इंग्लैंड ने अपनी सरज़मीं पर फिर 2-1 से जीत हासिल की पर एक बार फिर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों का औसत प्रतिद्वन्द्वियों से बेहतर था.

उसके बाद ऑस्ट्रेलिया पिछली घरेलू सिरीज़ को याद करता हुआ लौटा होगा कि 'आओ हमारे घर, तब निबट लेंगे' क्योंकि पिछली बार ऐसा ही हुआ था.

पॉन्टिंग पर निशाना

ब्रिस्बेन में जब पहले ऐशेज़ टेस्ट में इस बार ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को सिर्फ़ 260 रनों पर समेटकर ख़ुद 481 रन बनाए थे तो लगा भी था कि कहीं पिछली बार वाली कहानी दोहरा न दी जाए मगर इंग्लैंड ने ज़बरदस्त वापसी करते हुए दूसरी पारी में 517 रन बनाकर टेस्ट ड्रॉ करा लिया.

Image caption पॉन्टिंग की बल्लेबाज़ी और कप्तानी दोनों पर सवालिया निशान लगे हैं

उसके बाद दूसरे और चौथे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को मिली पारी की हार ने ऑस्ट्रेलियाई प्रभुत्व पर करारी चोट की है. इन हालात में ऑस्ट्रेलियाई प्रेस और क्रिकेट प्रशंसक सबसे पहले रिकी पॉन्टिंग पर निशाना साधेंगे.

इस सिरीज़ में पॉन्टिंग अब तक सिर्फ़ एक अर्द्धशतक ही लगा पाए हैं और कप्तानी के स्तर पर भी कोई ऐसी कमाल की बात नहीं दिख रही है.

उन्होंने सफल कप्तान का तमग़ा तब हासिल किया जब टीम में शेन वॉर्न, ग्लेन मैक्ग्रा, ब्रेट ली और ऐडम गिलक्रिस्ट जैसे खिलाड़ी मैच जिताने वाले खिलाड़ी थे.

ऐसे खिलाड़ियों के जाने के साथ ही किसी भी टीम को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है मगर अनुभवी कप्तान के रूप में पॉन्टिंग से युवा टीम को जो अपेक्षाएँ थीं वो शायद पूरी नहीं हो सकीं.

अब माइकल क्लार्क, ब्रैड हैडिन और कैमरन वाइट में से किसी एक को कप्तानी देने की वकालत की जा रही है. यूँ तो ये टेस्ट शृंखला थी मगर क्रिकेट विश्व कप से ठीक पहले इस तरह के प्रदर्शन से टीम के मनोबल पर असर पड़ेगा.

टीम में रिकी पॉन्टिंग के स्थान पर भी चर्चा होना स्वाभाविक लग रहा है, उन्होंने जिस तरह का प्रदर्शन किया वो किसी भी तरह टीम को प्रेरित करने वाला नहीं था.

अब कप्तानी की वजह से प्रदर्शन प्रभावित हुआ या प्रदर्शन ख़राब होने की वजह से कप्तानी ठीक नहीं हुई ये कहना कुछ मुश्किल है.

गेंदबाज़ी चिंताजनक

टीम गेंदबाज़ी में भी कुछ हद तक संघर्ष करती दिख रही है. ली और मैक्ग्रा क्या गए विपक्षी टीमों में ऑस्ट्रेलियाई आक्रमण का भय ख़त्म सा हो गया.

Image caption वॉर्न के जाने के बाद से ऑस्ट्रेलिया ने कई स्पिनर आजमाए हैं

मिचल जॉनसन, रायन हैरिस, डग बोलिंजर, पीटर सिडल या बेन हिलफ़ेनहॉस- इनमें से किसी एक को पूरी तरह विश्वसनीय मैच विजेता गेंदबाज़ कहना मुश्किल है.

शेन वॉर्न के जाने के बाद से टीम ने न जाने कितने स्पिनर आजमाए मगर कोई भी सफल नहीं रहा.

दूसरे टेस्ट में मिली हार के बाद माइकल बीयर को चयनकर्ताओं ने टीम में शामिल किया मगर वो 12वें खिलाड़ी ही बनकर रह गए. नैथन हॉरित्ज़ या स्टीवन स्मिथ भी कारगर साबित नहीं हुए.

वहीं दूसरी ओर जिस तरह इंग्लैंड ने इस साल पहले ट्वेन्टी-20 का विश्व कप जीता और अब ऐशेज़ में बेहतरीन प्रदर्शन किया है तो ऐसे में उनके कप्तान ऐंड्रयू स्ट्रॉस के इस दावे को हवा में नहीं उड़ाया जा सकता कि उनकी टीम अब नंबर एक के ख़िताब पर नज़र लगाए है.

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