ईडन: नाम ही नहीं दाम भी डूबा

  • 6 फरवरी 2011
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Image caption ईडेन गार्डेन का पुनरुद्धार शुरू

कोलकाता के ईडेन गार्डेन स्टेडियम में भारत-इंग्लैंड विश्वकप मैच के रद्द होने से कोलकाता के इस स्टेडियम का नाम तो ख़राब हुआ ही है, साथ ही उसे ख़ासा आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है.

भारत-इंग्लैंड के बीच 27 फरवरी को होने वाले इस मैच के रद्द होने से आयोजकों यानि क्रिकेट एसोसिएशन आफ बंगाल (सीएबी) को लगभग पांच करोड़ रुपए की चपत लगी है.

इतना ही नहीं, इस मैच के ज़रिए मोटी कमाई की योजना बना रहे राज्य के पर्यटन उद्योग को भी लगभग इतनी ही रकम से हाथ धोना पड़ा है.

वैसे तो ईडेन में विश्वकप के चार मैच होने थे लेकिन पर्यटन उद्योग और आयोजकों की निगाहें पहले मैच पर टिकी थीं. इसकी वजह यह है कि यह यहाँ पर भारतीय टीम का इकलौता मैच था.

आर्थिक संकट

इस मैच के दौरान जहां स्टेडियम के हाऊस-फ़ुल होने की उम्मीद थी, वहीं बाहर खासकर इंग्लैंड से आने वाले दर्शकों के ज़रिए पर्यटन उद्योग को मोटी कमाई की उम्मीद थी.

लेकिन अब हालत ये है कि यह मैच तो हाथ से निकला ही, अब बाक़ी के तीन मैचों का भी यही हश्र होने का खतरा मंडरा रहा है.

भारत-इंग्लैंड मैच नहीं होने की वजह से सीएबी को कम से कम पांच करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

इसमें से मैच फ़ीस के तौर पर साढ़े सात लाख अमरीकी डॉलर के अलावा टिकटों की बिक्री और विज्ञापनों के ज़रिए होने वाली कमाई शामिल है.

सीएबी के संयुक्त सचिव विश्वरूप दे कहते है, "आर्थिक नुकसान तो हुआ ही है, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान ईडेन की साख को हुआ. आर्थिक नुकसान की तो देर-सवेर भरपाई हो जाएगी. ईडेन की साख पर लगे इस धब्बे की भरपाई जल्द नहीं होगी."

विश्वरूप ने मैच शिफ़्ट होने के बाद इसकी ज़िम्मेदारी लेते हुए अपने इस्तीफ़े की पेशकश की थी.

कोलकाता की छवि

सरकारी और निजी क्षेत्र के पर्यटन उद्योग को भी लगभग पांच करोड़ रुपए की संभावित कमाई से हाथ धोना पड़ा है.

ट्रेवल एजेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ इंडिया की पूर्वी शाखा के अध्यक्ष अनिल पंजाबी कहते हैं, "खुल कर खर्च करने वाले यूरोपीय सैलानियों के सामने कोलकाता और बंगाल के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने का हाल के वर्षों में यह पहला बड़ा मौका था. लेकिन यह हमारे हाथ से निकल गया."

यहां से मैच कहीं और ले जाने के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के फ़ैसले से पहले तक यहां टूअर ऑपरेटरों को लगभग रोज़ाना इंग्लैंड के टूअर ऑपरेटरों से टूअर पैकेज, होटलों और परिवहन के साधनों की बुकिंग के बारे में ईमेल और फ़ोन आ रहे थे.

पंजाबी के मुताबिक भारत-इंग्लैंड मैच के लिए बाहर से 20 से 25 हज़ार क्रिकेट प्रेमियों के कोलकाता आने का अंदाज़ा था.

इनमें इंग्लैंड से आने वालों की तादाद ज़्यादा थी. वे आंकड़ों के हवाले बताते हैं, "इंग्लैंड से आने वाले क्रिकेटप्रेमी टूअर पैकेज पर औसतन कम से कम पंद्रह सौ डालर ख़र्च करते. इसके अलावा शहर में अपने प्रवास के दौरान वे रोज़ाना औसतन पांच सौ डालर की रकम ख़र्च करते."

कोलकाता में सालाना 25 हजार विदेशी सैलानी आते हैं. लेकिन उनमें से ज़्यादातर छात्र या मध्यवर्ग के सैलानी होते हैं. कुल 20 फ़ीसदी सैलानी ही खुले हाथों ख़र्च करते हैं.

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Image caption स्टेडियम का युद्ध स्तर पर हो रहा है पुनर्निर्माण

टूअर ऑपरेटरों का कहना है कि विश्वकप के मैच के लिए यहां आने वाले उच्चवर्ग यानि ज़्यादा ख़र्च करने वाले सैलानियों के ज़रिए कोलकाता समेत राज्य के दूसरे पर्यटन स्थलों की भी विदेशों में चर्चा होती और संभवत: ऐसे सैलानियों की आवाजाही तेज़ होती.

लेकिन मैच के रद्द होते ही इन तमाम संभावनाओं पर पानी फिर गया. विदेशों में कोलकाता की छवि अब भी मदर टेरेसा, सत्यजित रे या रवींद्रनाथ ठाकुर के ऐसे शहर के तौर पर ही है, जहां ज़्यादातर ग़रीब लोग रहते हैं.

पंजाबी कहते हैं, "भारत-इंग्लैंड मैच के ज़रिए हमें इस छवि को सुधारने में सहायता मिलती."

पर्यटन पैकेज डूबे

इस मैच को ध्यान में रखते हुए राज्य के टूअर आपरेटरों ने क्रिकेट प्रेमियों के लिए उत्तरी बंगाल के जंगल, नेशनल पार्क, दार्जिलिंग के पहाड़ और दक्षिणी बंगाल के समुद्र तटों सहित कई अलग-अलग क्रिकेट पर्यटन पैकेज तैयार किए थे.

विश्वकप के लिए इंग्लैंड के क्रिकेट प्रेमियों को इस उपमहाद्वीप के विभिन्न शहरों में ले जाने वाली ब्रिटिश कंपनी गलिवर स्पोर्ट्स ट्रेवल ने कोलकाता को अपनी प्राथमिकता में काफ़ी ऊपर रखा था.

उसने महानगर के कई आपरेटरों के साथ शुरूआती बातचीत भी की थी लेकिन ईडेन की अधूरी तैयारियों के चलते अब वो तमाम योजनाएँ धरी की धरी रह गई हैं.

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