कितनी टिकेगी ये दीवानगी

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Image caption विश्व कप के स्वरूप में बदलाव किया गया है

विश्व कप अब चंद दिनों की दूरी पर है और दिनों-दिन अब यही सिर्फ़ एकमात्र खेल की ख़बर बन कर रह गया है.

एक महीने पहले शुरू हुए विश्व कप से जुड़े कार्यक्रमों में इस महत्वपूर्ण एक दिवसीय प्रतियोगिता के कई पहलू और पक्षों की पड़ताल हो रही है, जिसने खेल के रूप में क्रिकेट के चेहरे को बदल कर रख दिया.

बीते दिनों की यादें ताज़ा करने के साथ-साथ इस पर व्यावहारिक चर्चा हो रही है कि इस प्रतियोगिता से क्या उम्मीद की जा सकती है और क्या नहीं.

क्रिकेट के दीवानों की संख्या को देखते हुए कहा जा सकता है कि ये प्रतियोगिता भारत के लिए सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिता है.

कॉरपोरेट जगत इसे एक बड़े मौक़े की तरह देख रहा है ताकि वो अपने उत्पादों का विज्ञापन और इस तरह समाचार के प्रवाह को नियंत्रित कर सके, जिससे ये विश्व कप उसके लिए एक फ़ायदेमंद उपभोक्ता ब्रांड के रूप में स्थापित हो सके.

इसी क्रम में अब तक की विश्व कप जीतने वाली टीमों के कप्तान एक साथ मंच पर आ रहे हैं और बीते दिनों की याद में लोगों को सराबोर कर रहे हैं, तो मौजूदा भारतीय टीम के खिलाड़ी कप जीतने के ख़्वाब की चर्चा कर रहे हैं.

कार्यक्रम

ऐसे कार्यक्रमों की ब्रांडिंग भारतीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का एक समूह कर रहा है, जो अपने व्यावसायिक विकास के लिए इस प्रतियोगिता का दोहन करना चाहते हैं.

लेकिन किसी को शिकायत नहीं है. खिलाड़ी धनवान हो रहे हैं, प्रायोजक अपने ब्रांड के बारे में लोगों को जागरुक कर रहे हैं और मीडिया भी इन विज्ञापनों से मिलने वाले राजस्व से मालामाल हो रही है.

यह एक सहजीविता का रिश्ता है, जो सभी हिस्सेदारों को लाभ पहुँचा रहा है, शायद सच्चे फ़ैन्स को छोड़कर.

जिन लोगों ने लाखों-लाख निवेश किए हैं, वे दुनिया को ये यक़ीन दिला रहे हैं कि इस प्रतियोगिता के ईर्द-गिर्द मुश्किल सवाल नहीं हैं और इस खेल के हित में इन पर बहस की आवश्यकता भी नहीं है.

विश्व कप से पहले इससे जुड़े कार्यक्रम में बार-बार यही समझाया जा रहा है कि भारत और विश्व कप एक दूसरे के लिए बने हैं.

लेकिन इन सबके बीच हम उन चुनौतियों की अनदेखी के अभ्यस्त हो गए हैं, जिनका सामना न सिर्फ़ एक दिवसीय क्रिकेट कर रहा है, बल्कि विश्व कप भी.

हम सभी जानते हैं कि वर्ष 2007 में लंबा खिंचा विश्व कप पूरी तरह से पिट गया था. जिसके कारण इस विश्व कप के फ़ॉर्मेट में बदलाव किया गया है.

अनावश्यक

व्यावसायिक ज़रूरतों और भारत जैसी बड़ी टीमों को लंबे समय तक प्रतियोगिता में बने रहने के लिए अब ऐसा फ़ॉर्मेट बनाया गया है, जिसके कारण लंबा समय बेमानी लगता है.

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Image caption टिकट लेने के लिए भारी भीड़ जुट रही है

तो क्या ग्रुप स्टेज तक लोगों में उत्साह बना रहेगा? ग्रुप स्टेज से आठ टीमें क्वार्टर फ़ाइनल में प्रवेश करेंगी. क्या भारत के दर्शक उन मैचों को भी देखेंगे, जिनमें उनकी टीम हिस्सा नहीं लेगी?

विश्व कप के तुरंत बाद आईपीएल का आयोजन है, तो विश्व कप में कॉरपोरेट जगत और दर्शकों का क्या रुख़ रहेगा, ये भी देखने वाली बात होगी.

टी-20 फ़ॉर्मेट की बढ़ती लोकप्रियता, ख़ूब पैसे के साथ-साथ आकर्षक और बड़े भारतीय बाज़ार के कारण कई लोग विश्व कप जैसी प्रतियोगिता को भी 'अनावश्यक उत्तेजना' मानने लगे हैं.

(लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार हैं)

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