विश्व कप क्रिकेट और मास्टर ब्लास्टर

सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर के नाम आज बल्लेबाज़ी का लगभग सारा रिकॉर्ड है. उन्होंने 444 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेल कर कुल 17629 रन बनाए हैं. वनडे में एकमात्र दोहरा शतक लगाने वाले वे अकेले बल्लेबाज़ हैं. 46 शतक और 93 अर्धशतक उनकी महान बल्लेबाज़ी का सबूत है.

लेकिन इस महान खिलाड़ी की विश्व कप जीतने की ख़्वाहिश अभी तक पूरी नहीं हो सकी है. हालांकि उनके रहते भारत फ़ाइनल में भी पहुँचा है और वे विश्व कप में भी सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी भी हैं. उन्होंने कुल 36 मैच की 35 पारी में चार बार नाबाद रहकर 1796 रन बनाए हैं. उनका सर्वाधिक स्कोर 152 रहा है और औसत 57.93. उन्होंने चार शतक और 13 अर्धशतक लगाए हैं. जबकि दो बार शून्य पर आउट हुए है.

तेंदुलकर के विश्व कप अभियान की शुरुआत 1992 में हुई. उस वक़्त तक वह भारत के सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी के तौर पर अपने आप को स्थापित कर चुके थे. हालाँकि ये कप भारत के लिए बहुत ज़्यादा उत्साहवर्धक नहीं था लेकिन भारत की ओर से तेंदुलकर ने कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन के बाद सात पारियों में सर्वाधिक 283 रन बनाए. उन्होंने सर्वाधिक 84 रनों की पारी खेली और कुल तीन अर्धशतक लगाए.

तेंदुलकर का दूसरा विश्व कप 1996 का विश्व कप था जो भारत-पाकिस्तान-श्रीलंका में खेला गया और भारत ख़िताब के प्रबल दावेदारों में था. तेंदुलकर ने इस वक़्त तक मध्य क्रम छोड़ कर पारी की शुरूआत शुर कर दी थी और साथ ही शतक बनाने का सिलसिला भी.

प्रदर्शन

1996 के विश्व कप में तेंदुलकर ने दुनिया के किसी भी खिलाड़ी से ज़्यादा 537 रन बनाए. सात पारियों में उन्होंने 87.16 की औसत से ये रन बनाए जिनमें दो शतक और तीन अर्धशतक शामिल थे. इस संस्करण के अपने पहले ही मैच में तेंदुलकर ने कीनिया के ख़िलाफ़ 127 रनों की नाबाद पारी खेली और भारत को जीत दिलाई. दूसरा मैच वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ ग्वालियर में था और तेंदुलकर ने रन आउट होने से पहले 70 रन बना लिए थे.

Image caption वर्ष 2007 का विश्व कप सचिन के लिए भी बहुत बुरा रहा

तीसरी मैच ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ था. हालांकि भारत मैच हार गया लेकिन यह विश्व कप के यादगार मैचों में से एक है. ऑस्ट्रेलिया ने 258 रन बनाए उनके चार खिलाड़ी रन आउट हुए. शुरू में ही भारत का दो विकेट गिर चुका था. तेंदुलकर ने सावधानी के साथ खेलना शुरू किया. मुंबई में पहली बार फ़्लडलाइट में हुए मैच में तेंदुलकर ने मैकग्रा, वॉर्न और फ़्लेमिंग को सीमा रेखा के पार पहुँचाया.

तेंदुलकर 90 रन बनाकर खेल रहे थे जब विकेट कीपर इयन हिली ने मार्क वॉ की वाइड गेंद पर तेंदुलकर को सटम्प कर दिया. संजय मंजरेकर ने कोशिश तो बहुत की लेकिन भारत 16 रनों से मैच हार गया. इस विश्व कप के चौथे मैच में तेंदुलकर ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ 137 गेंदों पर 137 रन बनाए और भारत की ओर से आधे से ज़्यादा रन बनाए. श्रीलंका ने ये मैच छह विकेट से जीत लिया.

ज़िम्बॉब्वे और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ तेंदुलकर ने यादगार पारी नहीं खेली लेकिन भारत मैच में विजयी रहा. श्रीलंका के ख़िलाफ़ कोलकता में खेले गए सेमीफ़ाइन में तेंदुलकर ने सबसे ज़्यादा 65 रन बनाए लेकिन ये मैच किसी और वजह से याद किया जाता है.

1999 का विश्व कप तेंदुलकर के लिए ज़्यादा यादगार नहीं रहा हालाँकि उन्होंने सात मैचों में 253 रन बनाए जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल रहे. मध्यक्रम में बल्लेबाज़ी करते हुए तेंदुलकर ने कीनिया के ख़िलाफ़ 140 रनों की नाबाद पारी खेली थी. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ महत्वपूर्ण मैच में तेंदुलकर ने 45 रन बनाए और मैच जीतने के बाद भी भारत सुपर सिक्स से आगे न जा सका.

वर्ष 2003 में खेला गया विश्व कप भारत के लिए भी यादगार रहा और तेंदुलकर ने 11 पारियों में 673 रन बनाए, जिसमें एक शतक और छह अर्ध शतक थे. पहले ही मैच में तेंदुलकर ने नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ 52 रन बनाए. तीसरे मैच में ज़िम्बॉब्वे के ख़िलाफ़ तेंदुलकर ने 81 रन बनाए और भारत मैच जीता. नामीबिया के ख़िलाफ़ भारत ने 181 रन से जीत हासिल की और तेंदुलकर ने 152 रन बनाए जबकि इंग्लैंड के ख़िलाफ़ तेंदुलकर ने 50 रन बनाए. भारत को जीत 82 रनों से जीत मिली.

यादगार पारी

सेंचुरियन में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ तेंदुलकर ने सबसे यादगार पारी खेली जिसमें वसीम अकरम, वक़ार यूनिस और शोएब अख़्तर की एक नहीं चली. तेंदुलकर ने आउट होने से पहले सिर्फ़ 75 गेंदों पर 98 रन बनाए और भारत को यादगार जीत दिलाई. उसके बाद तेंदुलकर श्रीलंका के ख़िलाफ़ एक और शतक से चूक गए जब उन्हें 97 रनों पर डी सिल्वा की गेंद पर संगकारा ने लपक लिया.

Image caption सचिन के प्रशंसकों की संख्या बहुत है

कीनिया के ख़िलाफ़ फिर तेंदुलकर ने 83 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली और भारत को 91 रनों से जीत हासिल हुई. फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया के विशाल स्कोर का सारा बोझ तेंदुलकर के कांध पर था और वह इस दबाव को न सह सके और जल्द ही एक चौका लगाकर पवेलियन लौट गए. बाक़ी तो औपचारिकताएँ थी.

तेंदुलकर का पाँचवाँ विश्व कप जितना तेंदुलकर के लिए निराशाजनक रहा उतना ही भारत के लिए. भारत पहले राउंड में ही बाहर हो गई और सिर्फ़ तीन मैच खेलने को मिले. तेंदुलकर ने कुल 64 रन बनाए जिसमें एक नाबाद अर्धशतक शामिल था. एक बार फिर विश्व कप भारत-श्रीलंका-बंगलादेश में हो रहा है, तेंदुलकर फ़ॉर्म में हैं. भारत दुनिया के नंबर एक टीम की दावेदार है.

तेंदुलकर के बल्ले पर होंगी सबकी नज़रें. भारतीय उनका 50 शतक विश्व कप में देखना चाहेंगे. ये सब उसी समय मुमकिन है जब तेंदुलकर का बल्ला 1996 और 2003 की तरह बोले.

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