विश्व कप में विवाद

विश्व कप विवाद

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क्रिकेट में विवादों की बड़ी गुंजाइश रही है, कभी अंपायर की भूमिका पर सवाल उठे हैं तो कभी रंगभेदी टिप्पणी वग़ैरह. क्योंकि यह तो प्रतिस्पर्धा है और यहाँ आरोप-प्रत्यारोप का होना लाज़मी है.

कभी बॉडी लाइन का तूफ़ान तो कभी कभी लिली का स्टीलबैट लाकर क्रिकेट नियमों को चुनौती देना तो कभी मियाँदाद का लिली की टिप्पणी के जवाब में बैट लेकर उन पर दौड़ पड़ना हमें नज़र आता है.

कभी मैच फ़िक्सिंग का साया इस पर मडँराया तो कभी बॉल टैम्परिंग और स्पॉट फ़िक्सिंग. कभी किसी खिलाड़ी के ख़िलाफ़ आरोप तो कभी किसी खिलाड़ी पर प्रतिबंध यह सब हिस्सा रहा है क्रिकेट का.

क्रिकेट विश्व कप में भी ऐसे कुछ विवाद ज़रूर नज़र आते हैं जिनमें कुछ तो बड़े रोचक हैं और कुछ दुख दायक चलिए पढ़ते हैं ऐसे कुछ विवादों के बारे में.

गावसकर की पारी

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जवाब में भारत ने बहुत सुस्त शुरुआत की दर्शकों ने समझा कि सुनील गावसकर गेंद की चमक ख़त्म करना चाहते हैं लेकिन जब उनकी वही रफ़्तार बनी रही तो दर्शकों में बेचैनी बढ़ने लगी. भारत के समर्थकों की चीख़ पुकार जारी रही और भारतीय खिलाड़ियों के चेहरे पर खीज देखी जा सकती थी.

हर कोई फ़ील्ड में जाकर ठीक से मैच खेलने का आग्रह कर रहा था और पुलिस उन्हें रोक रही थी. टेड ह्यूज ने बीबीसी के साथ इंटरव्यू में कहा कि भारतीय मैनेजमेंट को चाहिए था कि वह गावसकर को बाहर खींच लाते.

गावसकर ने उस मैच में 60 ओवर में नाबाद 36 रन बनाए थे और भारत तीन विकेट के नुक़सान पर 132 रन ही बना सका और 202 रनों से हार गया. गावसकर की पारी विवाद में रही.

कई तरह की बातें सामने आई. कहा गया कि भारत इससे पहले चूंकि 42 रन पर आउट हो चुका था इसलिए वह उस शर्मनाक स्थिति को दोहराना नहीं चाहताथा. कहा गया कि गावसकर को टीम को लेकर परेशानी थी. कहा गया गावसकर अकेले हो गए थे.

बहरहाल, गावसकर ने कुछ नहीं कहा. लेकिन बहुत बाद में ये माना कि वह उनकी सबसे ख़राब पारी थी और यह कि उनका फ़ार्म ख़राब चल रहा था और फ़ार्म में वापसी के लिए वह ऐसा ही करते हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि वह शून्य पर आउट थे लेकिन चूंकि किसी ने अपील नहीं की इसलिए वह आउट क़रार नहीं दिए गए. ये भी ख़बर आती रही कि इंग्लैंड के कप्तान ने गावसकर को आउट नहीं करने की योजना बनाई थी. बहरहाल इस विवाद भरे मैच को भारतीय और ख़ास तौर से गावसकर भूलना चाहेंगे.

लॉयड ने कैच छोड़ा

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कहा जाता है कि कैच पकड़ो और मैच जीतो. लेकिन दूसरे विश्व कप में फ़ाइनल में कुछ अलग ही बात हुई. लॉयड ने मैच जीतने के लिए कैच छोड़ा.

वेस्ट इंडीज़ ने इंग्लैंड के सामने 293 रनों का लक्ष्य रखा था. रिचर्ड्स ने आख़िरी गेंद परछक्का लगया था.

इंग्लैंड ने जवाब में धीमी शुरूआत की और बॉयकॉट ने दोहरे अंक तक पहुंचने के लिए 17 ओवर ले लिए. एक बार वह रिचर्ड्स को मारने के लिए बाहर निकले तो ग़लत शॉट खेल गए और कप्तान लॉयड ने उस आसान से कैच को छोड़ दिया.

उससे पहले दूसरी तरफ़ खेल रहे ब्रियरली का कैच भी वह छोड़ चुके थे. रिचर्ड्स को लॉयड ने जब बताया कि उन्होंने जान बूझकर कैच छोड़ा था तो उन्हें चैन मिला.

लॉयड ने कहा कि हम दिन भर उन दोनों को खेलते देख सकते थे क्योंकि जितने ओवर वो खेल रहे थे उतनी कीलें उनके ताबूत में लग रही थीं.

बहरहाल लॉयड ने बाद में कहा कि उन्होंने जानबूझकर कैच नहीं छोड़ा था क्योंकि यह मैच जीतने की एक ख़राब तकनीक थी.

ही बाक़ी आठ विकेट गंवा दिए.

गार्नर ने पांच विकेट और क्रॉफ़्ट ने तीन विकेट लिए. पहला दोनों विकेट होल्डिंग ने लिया था.

अंपायरिंग का क्या क़सूर

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ये पहले विश्व कप की बात है. मैच था पाकिस्तान और वेस्ट इंडीज़ के बीच, पाकिस्तान ने सात विकेट के नुक़सान पर 266 रन बनाए थे. माजिद ख़ान, मुशताक़ मोहम्मद और वसीम राजा ने अर्ध शतक लगाए थे.

जब वेस्ट इंडीज़ की पारी शुरू हुई तो सरफ़राज़ नवाज़ की तूफ़ानी गेंदबाज़ी के सामने वेस्ट इंडाज़ का कोई खिलाड़ी जम कर न खेल सका.

166 रन पर वेस्ट इंडीज़ का आठवां विकेट गिर चुका था. वेस्ट इंडीज़ लगभग मैच हार चुकी थी. अपील पर अपील जारी थी कि 203 पर नवां विकेट गिर गया और होल्डर का विकेट भी सरफ़राज़ ने लिया.

सातवे नंबर पर बल्लेबाज़ी करने आए डेरेक मरे सिर्फ़ टिके हुए थे और उनका साथ दे रहे थे एंडी रॉबर्ट्स और दनों ने मिलकर आख़िरी विकेट के लिए 64 रनों की नाबाद पारी खेली.

और इस प्रकार पाकिस्तान सेमी फ़ाइनल में प्रवेश करने से रह गया और वेस्ट इंडीज़ ने आगे चलकर विश्व कप में ख़िताबी जीत हासिल की.

डेरेक मरे की वह पारी वनडे में उनकी बेहतरीन पारी रही और दसवें विकेट की यह विश्व कप की सबसे बड़ी साझेदारी रही लेकिन पाकिस्तान को दो गेंद रहते इस मैच का हारना बहुत दिनों तक सताता रहा.

एक गेंद और 21 रन

1992 के विश्व कप में पहली बार दक्षिण अफ़्रीका की टीम प्रतिबंध के बाद उतरी थी जिससे क्रिकेट जगत में एक नया उत्साह भी था और दूसरी टीमों में एक तरह का संकोच भी था कि न जाने उनकी टीम कैसी है.

दक्षिण अफ़्रीका ने धमाकेदार खेल भी दिखाया और धमाके के साथ सेमीफ़ाइनल में प्रवेश किया.

विवाद की कोई गुंजाइश नज़र नहीं आ रही थी लेकिन ऑस्ट्रेलिया के मौसम और क्रिकेट के डकवर्थ लुईस नियम ने दक्षिण अफ़्रीका को जो नुक़सान पहुंचाया उसे क्रिकेट प्रेमी भूल नहीं पाए.

मैच था इंग्लैंड और दक्षिण अफ़्रीका का. खेल 10 मिनट की देर से शुरू हुआ और लंच में से यह समय काट लिया गया लेकिन कोई ओवर नहीं काटा गया.

इसके बाद स्थानीय समयनुसार जब इंग्लैंड की पारी 6.10 तक ख़त्म नहीं हो सकी तो इंग्लैंड की पारी में से ओवर कम कर दिया गया और मैच हो गया 45 ओवरों का जिसमें इंग्लैंड ने 252 रन बनाए.

दक्षिण अफ़्रीका ने खेल शुरू किया और वे 42.5 ओवरों में छह विकेट के नुक़सान पर 231 रन थे.

लेकिन फिर डकवर्थ लुईस नियम लागू हुआ और जब दोबारा खेल शुरू हुआ तो दक्षिण अफ़्रीका को एक गेंद पर 21 रन बनाने थे.

और स्कोर बोर्ड पर जब यह लिखा आया तो पता चला कि दक्षिण अफ़्रीका तो मैच हार चुका है, बस औपचारिकता ही बची है.

नहीं तो मैच में लोगों की दिलचस्पी और उत्साह अपने चरम पर था. दक्षिण अफ़्रीका इतिहास रचने से वंचित हो चुका था.

'जंपिंग जावेद'

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जावेद मियांदाद और विवाद एक दूसरे के पर्याय बन चुके थे मैदाने के अंदर और बाहर दोनों जगह ये एक दूसरे के साथ रहे.

बात चाहेऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज़ रॉडनी हॉग के रन आउट की हो या फिर लिली से बहस हो, अब्दुल क़ादिर को मैदान के बहार चाक़ू लेकर डराना हो बात ये है कि जावेद अपनी तरह का क्रिकेट खेलते थे.

उन्होंने छह विश्वकप में हिस्सा लिया और छोटी-मोटी घटनाएं तो होती रहीं.

लेकिन बात है 1992 विश्व कप में भारत-पाकिस्तान मैच की. यह एक तथ्य है कि विश्व कप में पाकिस्तान भारत से कभी नहीं जीता हालांकि ज़्यादा मैच जीतने का श्रेय पाकिस्तान के पास ही.

जब इन दोनों देशों में मैच हो रहा हो तो खिलाड़ी ज़बर्दस्त दबाव में होते हैं. यहां तक कि दर्शकों में भी यह दबाव महसूस किया जाता है.

यह विश्व कप का 16वां मैच था. भारत ने 49 ओवर में सात विकेट पर 216 रन बनाए थे जो पाकिस्तान के लिए लक्ष्य हासिल करना ज़्यादा मुश्किल नहीं था. आमिर सुहैल और जावेद मियांदाद ने पाकिस्तान का स्कोर दो विकेट के नुक़सान पर 100 के पार पहुंचा दिया था.

फिर अचानक पाकिस्तान का विकेट गिरना शुरू हो गया सुहैल 62 रन बनाकर आउट हो गए. मलिक 12 रन बनाकर चलते बने, इमरान ख़ान शुन्य पर रन आउट हो गए. वसीम अकरम को विकेट कीपर मोरे ने चार रन पर स्टंप कर दिया.

भारती खिलाड़ियों में उत्साह बढ़ता गया और पाकिस्तानी ख़ेमे में हताष... मोरे विकेट के पीछे बार-बार उछल-उछल कर अपील कर रहे थे मियांदाद पर दबाव बढ़ता जा रहा था...

और उसको ख़त्म करने के लिए अचानक मियांदाद ने मोरे से कुछ कहा और फिर मोरे की तरह कूद कर नक़ल उतारने लगे.

ऐसा दृश्य पहले किसी ने नहीं देखा था. पश्चिमी मीडिया ने दूसरे दिन 'जंपिंग जावेद' के नाम से ख़बर छापी और मियांदाद की वह तस्वीर लोगों की याद का हिस्सा बन गई.

मियांदाद ने 110 गेंद पर 40 रन बनाए और श्रीनाथ की गेंद पर बोल्ड हो गए. पाकिस्तान 43 रनों से मैच हार गया.

1996 विश्व कप में...

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1996 का विश्व-कप कई मायनों में विवादों भरा रहा क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने सुरक्षा कारणों से श्रीलंका जाने से इनकार कर दिया और श्रीलंका को बिना मैच खेले ही विजयी घोषित कर दिया गया.

जिस दिन कोलंबों में मैच होना था उस दिन ऑस्ट्रेलिया की टीम मुंबई के एक होटल में आराम कर रही थी और पूरा श्रीलंका इसे अपना अपमान मान रहा था. इसी प्रकार वेस्ट इंडीज़ ने भी श्रीलंका के ख़िलाफ़ अपना मैच नहीं खेला कारण वही था.

बहरहाल श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया की फ़ाइनल में लाहौर में भिड़ंत हुई और श्रीलंका ने आसानी के साथ विश्व-कप जीत लिया.

उदघाटन समारोह के बारे में भी विवाद रहा, विसडन ने लिखा कि कोलकता में हुआ उदघाटन समारोह पूरी तरह फ़्लाप रहा, लेज़र शो ने काम नहीं किया, प्रोग्राम संचालक बोर थे.

दूसरा विवाद

शुरूआत रही बिना नुक़सान के वे 84 रन पर पहुंच चुके थे कि सईद अनवर को श्रीनाथ ने आउट कर दिया.

आमिर सुहैल लय में थे प्रसाद की एक गेंद को बाउंड्री के बाहर मार कर आमिर सुहैल ने प्रसाद को चिढ़ाया "जाओ गेंद को जाकर लाओ.."

अगली गेंद पर सुहैल ने फिर वही शॉट लगाने की कोशिश की मगर उनका ऑफ़ स्टंप उखड़ चुका था और प्रसाद ने उसी जोश में कहा, "जाओ घर ....."

लेकिन इन सबसे बड़ा विवाद ईडेन गार्डेन्स में श्रीलंका-भारत मैच के दौरान सामने आया.

भारत श्रीलंका के विरुद्ध अच्छी स्थिति में था, 252 रनों का पीछा करते हुए भारत ने एक विकेट के नुक़सान पर 98 रन बना लिए थे.

अचानक विकेटों के गिरने का सिलसिला ऐसे शुरू हुआ मानों पतझड़ आ गया हो.

22 रन बनाने के क्रम में सात विकेट गिर गए. दर्शकों ने बोतल फेंकनी शुरू कर दी और आग लगा दी.

फिर ये हुआ कि मैच आगे जारी ने रह सका 34.1 ओवर में भारत आठ विकेट पर 120 रन ही बना सका था.

मैच को रद कर दिया गया और श्रीलंका को विजयी घोषित कर दिया गया.

विश्व कप गिरा दिया...

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1999 के विश्व कप में दक्षिण अफ़्रीका ने भारत के विरुद्ध अपने पहले मैच में रेडियो सिस्टम का प्रयोग किया. उनके कप्तान और तेज़ गेंदबाज़ एलन डोनाल्ड को पास माइक्रोफ़ोन थे और वह पवेलियन में मौजूद अपने कोच बॉब वूल्मर के साथ जुड़े हुए थे.

बॉब उन दोनों को ड्रेसिंग रूम से ही गाइड कर रहे थे. पानी के लिए हुए ब्रेक में मैच रेफ़री बीच में आया और बाद में आईसीसी ने उस तरीक़े को अपनाने का विरोध कर उससे खड़े विवाद को ख़त्म कर दिया.

1999 के ही विश्व कप में दक्षिण अफ़्रीका के आक्रामक और सलामी बल्लेबाज़ हर्षचल गिब्स ने स्टीव वॉ का एक सीधा-साधा कैच हाथ में लेकर तेज़ी से उछालने के क्रम में छोड़ दिया और वह भी ऐसे समय में जबकि ऑस्ट्रेलिया विश्व-कप के सूपर सिक्स से बाहर होने वाली थी.

उसी मसय वॉ ने गिब्स से कहा था, "दोस्त तुमने तो वर्ल्ड कप गिरा दिया."

वॉ ने एक यादगारी पारी के ज़िरिए न सिर्फ़ उस मैच में जीत हासिल की बल्कि विश्व कप जीत लिया. हर्षचल गिब्स ने दक्षिण अफ़्रीका की पारी में शतक लगाया था और जीत के लिए 272 रनों का बड़ा लक्ष्य छोड़ा था.

विवाद ये नहीं था कि वह कैच कैसे गिरा बल्कि बात ये सामने आई कि शेन वार्न ने पहले ही कह रखा था कि गिब्स कैच गिराएगा और वैसा ही हुआ.

बाद में शेन वार्न ने कहा कि वह उसकी बहुत जल्दी ख़ुशी मनाने की प्रवृति से वाक़िफ़ थे और उसी की बुनियाद पर उन्होंने यह बात कही थी.

लेकिन आज तक ये विवाद ख़त्म नहीं हो सका कि गिब्स ने जान-बूझ कर कैच छोड़ा था या फिर शेन वार्न क्रिकेट के इतने महान खिलाड़ी हैं जो दूसरे खिलाड़ियों के प्रवृति को इस क़दर जानते हैं कि उसकी बुनियाद पर भविष्यवाणी कर सकें.

बहरहाल, ऑस्ट्रेलिया का फिर दक्षिण अफ़्रीका से सेमीफ़ाइनल में मुक़ाबला हुआ, ऑस्ट्रेलिया ने 214 रनों का लक्ष्य रखा और गिब्स और कर्स्टीन बड़ी आसानी से खेल रहे थे.

जवाब में दक्षिण अफ़्रीका 10 ओवरों में बिना किसी नुक़सान के 43 बना चुका था. शेन वार्न का जादू ख़त्म हो चुका था कि आचानक स्टीव वॉ ने वार्न को बुलाया और वार्न ने गिब्स को जिस प्रकार शानदार तरीक़े से आउट किया उसने उनकी उस गेंद की याद दिला दी जिसने इंग्लैंड के माइक गैटिंग का विकेट लिया था.

बॉब वूल्मर की मौत...

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2007 का विश्व कप क्रिकेट की सबसे दुखद घटना का साक्षी है.

पाकिस्तान के दक्षिण अफ़्रीकी कोच बॉब वूल्मर को उनके होटल के कमरे में मृत पाया गया और वह भी पाकिस्तान की शर्मनाक हार और विश्व कप से विदाई की रात को.

इससे पहले ही पाकिस्तान पर मैच फ़िक्सिंग का इल्ज़ाम था और कई खिलाड़ियों को सज़ा भी दी गई थी.

पाकिस्तान की एक नई टीम के हाथों हार और फिर बॉब वूल्मर की मौत ने कभी न ख़त्म होने वाला विवाद खड़ा कर दिया था.

जमैका की पुलिस ने हत्या का संदेह ज़ाहिर किया, पाकिस्तानी खिलाड़ियों के गले तक मैच फ़िक्सिंग में फंसे होने की आशंका जताई जाने लगी, खिलाड़ियों से अलग-अलग पूछताछ होने लगी.

दूसरी ओर भारत भी बंग्लादेश से मैच हार कर विश्व कप के पहले दौर से ही बाहर हो गया और वह भी ऐसे में जबकि उसे विश्व-कप का दावेदार माना जा रहा था. ॉ

बहरहाल पाकिस्तानी खिलाड़ियों को इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई और जमैका पुलिस ने यह कहकर केस बंद कर दिया कि बॉब वूल्मर की मौत सामान्य थी और उनकी हत्या नहीं की गई थी.

तरह तरह की अफ़वाहें गश्त करने लगीं और पूरे उपमहाद्वीप की दिलचस्पी क्रिकेट विश्व-कप में कम हो गई क्योंकि उनकी पसंद की टीमें तो बाहर ही हो चुकी थीं.

फिर भी जब जब 2007 के विश्व कप की बात होगी लोगों के मन में ये सवाल ज़रूर उभरेंगे कि क्या भारत और पाकिस्तान की टीमों ने मैच तो नहीं फ़िक्स किया था...