'गेंद सर पर लगने से दिमाग ठिकाने पर आ गया'

बलविंदर सिंह संधू और गॉर्डन ग्रीनिज इमेज कॉपीरइट bbc
Image caption फ़ाइनल में बलविंदर सिंह संधू ने गॉर्डन ग्रीनिज का क़ीमती विकेट लिया.

बलविंदर सिंह संधू का विश्व विजेता टीम में अहम स्थान है. वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ फ़ाइनल में उन्होंने 11वें नंबर पर बल्लेबाज़ी करते हुए विकेटकीपर सैयद किरमानी के साथ 22 रन जोड़े थे.

भारत के कुल 183 रनों के छोटे से स्कोर में ये आख़िरी 22 रन बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए.

बल्लेबाज़ी करते समय वेस्ट इंडीज़ के तेज़ गेंदबाज़ मैल्कम मार्शल की एक गेंद उनके सर पर ज़ोर से लगी थी. लेकिन संधू ने हिम्मत नहीं हारी और और फिर गेंदबाज़ी करते समय वेस्टइंडीज़ के सलामी बल्लेबाज़ गॉर्डन ग्रीनिज का कीमती विकेट लिया था. ये वेस्टइंडीज़ का पहला विकेट था.

जब दोबारा भारत को विकेट की ज़रूरत थी तो बलविंदर सिंह संधू ने बच्चुस का विकेट भारत को दिलवाया. विश्व कप में उन्होंने कुल आठ विकेट लिए थे और 28 रन भी जोड़े थे.

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"फ़ाइनल में वेस्ट इंडीज़ के तेज़ गेंदबाज़ मैल्कम मार्शल का बाउंसर मेरे सर पर लगा था. मेरे कानों में सीटियां बजने लगीं.

मुझे कुछ गोलियां दी गईं. पता नहीं कौन सी गोलियां थीं वों. हो सकता है विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की ही गोलियां रही हों. लेकिन जब जब हम 183 रनों पर आउट होने के बाद गेंदबाज़ी के लिए जा रहे थे तो मेरा पूरा ध्यान दर्द से हट कर खेल पर आ गया.

जब हम ड्रेसिंग रूम से मैदान में जा रहे थे तो कपिल देव ने मुझसे कहा कि तू मेरे साथ गेंदबाज़ी की शुरुआत करेगा. कपिल बोला कि तू बस एक विकेट निकाल ले तेरा काम समझ ले पूरा हो गया. बस मेरा पूरा ध्यान उसी पर लग गया.

मैंने गार्डन ग्रीनिज को आउट कर दिया. मैच के बाद सबने मुझसे पूछा कि मैंने ग्रीनिज को कैसे आसानी से आउट कर दिया, तो मैंने कहा कि मार्शल की गेंद मेरे सर पर लगी जिससे मेरे सारे नट-बोल्ट सही जगह पर आ गए और मेरा दिमाग चलना शुरू हो गया. और मैंने ग्रीनिज को आउट कर दिया.

पूरे टूर्नामेंट में हमें प्रशंसकों का ज़बरदस्त प्यार मिला. हमारे मैच देखने बड़ी तादाद में भारतीय आते थे. कई तो ऐसे प्रशंसक थे जो हमारे साथ ही यात्रा करते थे. उनके समर्थन से हमारा आत्म विश्वास भी काफ़ी बढ़ा.

फ़ाइनल में जीत के बाद हम सब जैसे बच्चे बन गए और जो नाचना शुरु किया कि रुकने का मानो कोई नाम ही नहीं ले रहा था.

फिर जब हम भारत वापस लौटे तब लोगों का प्यार और उत्साह देखकर हमें एहसास हुआ कि हमने कितना बड़ा मैदान मारा है.

मेरे दोस्तों का नज़रिया मेरे प्रति बदल गया. वो तो मुझे कोई बहुत बड़ी हस्ती मानने लगे. उनका रवैया पहले जैसा होने में काफ़ी वक़्त लग गया.

सच मानिए हमारी इस जीत ने भारतीय क्रिकेट को एक नए ही आयाम पर पहुंचा दिया. "

(बीबीसी संवाददाता प्रतीक्षा घिल्डियाल से बातचीत पर आधारित)

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