वो यादगार लम्हा भूल नहीं सकता

क्रिकेटर कीर्ति आज़ाद इमेज कॉपीरइट bbc
Image caption कीर्ति आज़ाद 1983 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य थे.

विश्व कप जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा होना कीर्ति आज़ाद के करियर की उपलब्धियों में से एक है. विश्व कप में उन्होंने एक विकेट लिया और 15 रनबनाए. उन्होंने 1983 विश्व कप में कुल तीन मैच खेले जिनमें फ़ाइनल और सेमीफ़ाइनल शामिल था.

उस महान जीत की कुछ दिलचस्प यादें कीर्ति आज़ाद ने बाँटी बीबीसी के साथ.

“लॉर्डस का वो मैच जो हम 25 जून 1983 को खेले थे, आज भी कभी जब ज़हन में आता है तो मेरे शरीर में सिरहन सी दौड़ जाती है. उस भावना को शब्दों में कह पाना बहुत कठिन होगा क्योंकि कभी सोचा भी नहीं था कि हम जीतेंगे. सोचा था कि सेमीफ़ाइनल तक पहुंच जाएं तो बहुत बड़ी बात होगी.

जिस दिन मुझे पता चला कि मेरा नाम टीम में है तो मैंने मज़ाक में सोचा कि मुफ़्त में दो महीने की छुट्टियां मिल गई हैं, घूमने को मिलेगा. लेकिन मज़ाक में सोची गई बात के बिल्कुल विपरीत हुआ और हम विश्व कप जीत गए.

उस समय हमारी टीम में केवल दो ही खिलाड़ी थे जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धाक थी--एक सुनील गावस्कर और दूसरे हमारे कप्तान कपिल देव. हम पर उस समय उतना दबाव नहीं था जितना शायद मौजूदा भारतीय टीम पर है.

जब हमने विश्व कप की ट्रॉफ़ी हाथ में उठाई, तो हतप्रभ हो गए. वेस्ट इंडीज़ जैसी टीम, जिसमें डेसमंड हेन्स, गोर्डन ग्रीनिज, विवियन रिचर्ड्स जैसे सरीखे खिलाड़ी थे, उस टीम को हराना और फिर लॉर्ड्स के उस मंच पर खड़ा होना जहां पर पहले दो बार वेस्टइंडीज़ खड़ी हुई थी, ये सब बहुत रोमांच से भरा हुआ था. मैदान पर तिरंगा लहरा रहा था और हज़ारों लोग मैदान पर आ चुके थे. वो एक ऐसा स्मरण है जो ज़हन से उतर ही नहीं सकता. जब तक मृत्यु शैय्या पर नहीं जाऊंगा, तब तक वो यादगार लम्हा भूल नहीं सकता.

भारत लौट कर जिस तरह से आवभगत हुआ, उसका शब्दों में वर्णन करना मुश्किल हो जाता है.”

(बीबीसी संवाददाता साइमा इक़बाल से बातचीत पर आधारित)

संबंधित समाचार