'लोग फूल, मिठाई और पैसे फेंक रहे थे'

  • 16 फरवरी 2011
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Image caption 83 के फ़ाइनल में बिन्नी ने लॉयड का कीमती विकेट लिया.

भारत को विश्व कप दिलाने में रॉजर बिन्नी की अहम भूमिका रही. पूरी प्रतियोगिता में उन्होंने बेहतरीन गेंदबाज़ी की और बल्ले से भी योगदान दिया.

1983 विश्व कप के शुरू में ही उन्होंने अपने इरादे साफ़ कर दिए थे. शुरुआती लीग मैच में जब भारत ने वेस्टइंडीज़ को हराया था तो रॉजर ने तीन विकेट चटकाए थे और 27 रन बनाए थे.

विश्व कप में उन्होंने सबसे ज़्यादा विकेट लिए. उनके खाते में 18 विकेट गए और कुल 73 रन बनाए.

फ़ाइनल में उन्होंने क्लाइव लॉयड को कपिल देव के हाथों कैच आउट करवाया था जबकि सेमीफ़ाइनल में उन्होंने फ़ाउलर समेत इंग्लैंड के दो विकेट लिए थे.

बीबीसी से बात करते हुए रॉजर बिन्नी ने इस यादगार जीत की यादें ताज़ा कीं.

बढ़ता गया आत्मविश्वास

"टूर्नामेंट की शुरुआत में हम नर्वस नहीं थे लेकिन बहुत ज़्यादा आत्मविश्वास भी नहीं था.

मगर हमने पहले ही मैच में वेस्ट इंडीज़ जैसी मज़बूत टीम को हरा दिया और फिर मैच-दर-मैच हमारा अपने आप पर भरोसा बढ़ता चला गया.

इंग्लैंड में हम एक जगह से दूसरी जगह बस में जाते थे. ज़्यादातर वक़्त पूरी टीम साथ में ही समय बिताती थी तो हमारी आपसी समझ-बूझ भी बढ़ती चली गई.

पहले मेरे रूम पार्टनर श्रीकांत थे, फिर मोहिंदर अमरनाथ मेरे रूम पार्टनर बने. बाद में कुछ दिनों तक मैंने और किरमानी ने रूम शेयर किया. इस वजह से हम चारों के बीच ज़बरदस्त दोस्ती हो गई."

कपिल ने दिया हौसला

"फ़ाइनल में हम सिर्फ़ 183 रन बनाकर आउट हो गए तो भारतीय प्रशंसकों के बीच सन्नाटा छा गया. वो हमसे नाराज़ थे कि हम इतने कम स्कोर पर कैसे ऑल आउट हो गए.

सबने वेस्ट इंडीज़ की जीत तय मान ली. लंच ब्रेक में पहले 15-20 मिनट तक कोई किसी से बात नहीं कर रहा था.

तब हमारे कप्तान कपिल ने कहा तुम लोगों को हो क्या गया है. अभी हम हारे तो नहीं है. तुम लोग दुखी क्यों हो. हम लोग पूरी ताकत लगाकर लड़ेंगे. और उनके लिए मुश्किल खड़ी कर देंगे.

बस, फिर क्या था. कपिल की बात सुनते ही हम सब उत्साहित हो गए. और मैदान में ज़बरदस्त प्रदर्शन किया. और वेस्ट इंडीज़ को हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की.

मैंने निशानी के तौर पर एक स्टंप अपने पास रख लिया. वो अब भी मेरे पास है.

हमें तो यक़ीन नहीं हो रहा था कि हम जीत गए. फिर अगले दिन जब सोकर उठे. अख़बार पढ़े. लोगों की प्रतिक्रिया देखी तब जाकर अहसास हुआ कि हमने क्या कारनामा कर दिखाया."

लोग मिठाई और पैसे फ़ेंक रहे थे

"जब हम जीतकर भारत लौटे तो क्या नज़ारा था. एयरपोर्ट से लेकर वानखेड़े स्टेडियम तक सिर्फ़ लोग ही लोग दिख रहे थे.

भीड़ पूरे रास्ते में खड़ी थी. और हम पर मिठाई, पैसों और फूलों की बारिश हो रही थी.

हमें लोगों का इतना प्यार मिला कि बस पूछिए मत."

(बीबीसी संवाददाता साइमा इक़बाल से बातचीत के आधार पर)

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