कोई भी जीत सकता है इस बार विश्व कप

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Image caption तेंदुलकर का ये अंतिम विश्व कप होगा और टीम कप उनके लिए जीतना चाहती है

भारत और बांग्लादेश के विरुद्ध शनिवार को होने वाले मैच के साथ क्रिकेट विश्व कप की असली शुरुआत होगी.

इस बार जहाँ भारत को ख़िताब जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है तो वहीं संयुक्त रूप से मेज़बानी कर रहे श्रीलंका को भी कम करके नहीं आँका जा सकता.

वेस्टइंडीज़ में हुए पिछले विश्व कप में भारत और पाकिस्तान को पहले ही दौर के बाद जिस तरह बाहर होना पड़ा उसने क्रिकेट के आकाओं को टूर्नामेंट के फ़ॉर्मैट के बारे में फिर से सोचने पर मजबूर किया.

इस बार टीमों को दो ग्रुपों में बाँटा गया है. ग्रुप ए में ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, न्यूज़ीलैंड, श्रीलंका, ज़िम्बाब्वे, कनाडा और कीनिया हैं जबकि ग्रुप बी में भारत के अलावा दक्षिण अफ़्रीका, इंग्लैंड, वेस्ट इंडीज़, बांग्लादेश, आयरलैंड और हॉलैंड हैं.

कमज़ोर नहीं ऑस्ट्रेलिया

पिछले तीन बार से ऑस्ट्रेलिया ने ये ख़िताब जीता है. एक बार स्टीव वॉ की कप्तानी में और दो बार रिकी पॉन्टिंग की कप्तानी में.

पॉन्टिंग विश्व कप जीतने की हैट ट्रिक लगाना चाहते हैं मगर पिछली तीन बार के मुक़ाबले इस बार ऑस्ट्रेलिया जीतने की सबसे प्रबल दावेदार नहीं मानी जा रही.

ख़ुद पॉन्टिंग मानते हैं कि इस बार कोई भी टीम विश्व कप जीत सकती है, “इस तरह के मुक़ाबलों में कई टीमें होती हैं जो जीत सकती हैं. भारत और दक्षिण अफ़्रीका दो अहम टीमों के रूप में उभरी हैं और पिछले दिनों उनके बीच कड़ा मुक़ाबला भी हुआ है.”

पॉन्टिंग का कहना था, “मगर साथ ही पाकिस्तान ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है और आईसीसी के मुक़ाबलों में तो न्यूज़ीलैंड भी पीछे नहीं रहता. इंग्लैंड के पास भी जीतने की सर्वश्रेष्ठ संभावनाएँ हैं. इस तरह के हालात में श्रीलंका भी एक मज़बूत टीम है. यानी अभी ये कहना मुश्किल है कि जीत की सबसे प्रबल दावेदार कौन है. वैसे भी हम चाहते हैं कि हम अच्छा प्रदर्शन करें और मौक़ों का फ़ायदा उठाएँ.”

ऑस्ट्रेलिया 21 तारीख़ को ज़िम्बाब्वे के विरुद्ध अहमदाबाद में पहला मैच खेलेगी.

मैथ्यू हेडन, ग्लेन मैक्ग्रा, शेन वॉर्न या एडम गिलक्रिस्ट जैसे बड़े नाम तो इस ऑस्ट्रेलियाई टीम में नहीं हैं मगर ये टीम अब भी वनडे की नंबर एक टीम है और कई बेहतरीन युवा खिलाड़ियों के साथ आई है.

भारत मुख्य दावेदार

वैसे सिर्फ़ पॉन्टिंग ही नहीं बल्कि अन्य क्रिकेट विश्लेषक भी भारत को मज़बूत बल्लेबाज़ी और घरेलू परिस्थितियों के चलते इस बार एक मज़बूत टीम के तौर पर देख रहे हैं.

बीबीसी हिंदी के लिए इस विश्व कप पर विशेष टिप्पणी कर रहे क्रिकेटर आकाश चोपड़ा कहते हैं, “भारत निश्चित रूप से प्रबल दावेदार है. न सिर्फ़ इसलिए की घरेलू पिच पर है बल्कि भारत के पास तेंदुलकर और वीरेंदर सहवाग जैसे सलामी बल्लेबाज़ हैं.”

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Image caption धोनी का कहना है कि भारतीय टीम पर दबाव तो हमेशा ही रहता है

आकाश के अनुसार, “उसके बाद भारतीय मध्य क्रम भी काफ़ी मज़बूत है और गेंदबाज़ी में अगर ज़हीर को मिला दें तो गेंदबाज़ी भी मज़बूत हो जाती है.”

मगर घरेलू दर्शकों के सामने खेलना टीम पर दबाव भी ला सकता है. हालाँकि भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी कहते हैं कि भारतीय टीम पर दबाव तो हमेशा ही रहता है.

धोनी के अनुसार, “ये दबाव नहीं बल्कि बढ़ी हुई ज़िम्मेदारी है. मैंने हमेशा कहा है कि अगर आप भारत के लिए खेल रहे हैं तो एक भी मैच नहीं होगा जहाँ आप पर दबाव न हो.”

धोनी मानते हैं कि युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के साथ भारतीय टीम काफ़ी मज़बूत है.

ये सचिन तेंदुलकर का अंतिम विश्व कप माना जा रहा है और भारतीय टीम विश्व कप जीतकर उन्हें समर्पित करना चाहती है.

श्रीलंका और पाकिस्तान

मगर भारतीय उप महाद्वीप में अहम भूमिका स्पिनरों की भी मानी जा रही है क्योंकि पिच से उन्हें मदद मिलने की संभावना है.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की पूरी कोशिश है कि इस विश्व कप को मैच फ़िक्सिंग की संभावनाओं से बचाकर रखा जाए और पाकिस्तान के तीन खिलाड़ियों पर विश्व कप से कुछ ही दिन पहले प्रतिबंध ने कड़े तेवर के संकेत भी दिए हैं.

मगर इस पूरे घटनाक्रम से अलग पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफ़रीदी अच्छे प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त हैं, “पिछले तीन विश्व कप में मैंने बतौर एक खिलाड़ी हिस्सा लिया और इस बार मैं टीम का कप्तान हूँ इसलिए काफ़ी आत्मविश्वास है इस बार. इस बार ज़िम्मेदारी ज़्यादा है मगर हमारे पास अच्छे खिलाड़ी हैं. टीम पिछले कुछ समय से मुश्किल दौर से गुज़री है मगर अब हमारे खिलाड़ी जानते हैं कि इस टूर्नामेंट की क्या अहमियत है.”

पाकिस्तान का पहला मैच 23 तारीख़ को कीनिया के विरुद्ध कोलंबो में है. ग्रुप के सारे मैच पाकिस्तान श्रीलंका में ही खेल रहा है.

श्रीलंका ग्रुप स्तर पर सिर्फ़ एक मैच खेलने मुंबई जाएगा वरना उसके भी सारे मैच श्रीलंका में ही हैं.

घरेलू परिस्थितियों की वजह से श्रीलंका भी इस बार काफ़ी मज़बूत दावेदार है. श्रीलंकाई कप्तान कुमार संगकारा का कहना है कि लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीम को फ़ायदा होगा.

संगकारा के अनुसार, “इस बार का फ़ॉर्मैट ऐसा है कि अगर आप क्वॉर्टर फ़ाइनल तक पहुँच जाते हैं तो दो अच्छे मैच खेलकर आप विश्व कप के फ़ाइनल में जा सकते हैं. इसलिए ज़रूरी है कि टीम लगातार अच्छा प्रदर्शन करती रहे. उसके बाद क्वॉर्टर फ़ाइनल और सेमीफ़ाइनल में आपका प्रदर्शन कितना अच्छा होगा वो काफ़ी अहम रहेगा. ”

श्रीलंका का पहला मैच कल कनाडा के विरुद्ध कोलंबो में है.

दक्षिण अफ़्रीका पर नज़रें

वैसे भारत के ही ग्रुप में दो और टीमें ऐसी हैं जो सेमीफ़ाइनल की प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं. इंग्लैंड और दक्षिण अफ़्रीका. इनमें से इंग्लैंड की टीम ने ऑस्ट्रेलिया में ऐशेज़ सिरीज़ तो जीती मगर फिर वनडे सिरीज़ में 6-1 से बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा.

ट्वेन्टी-20 विश्व कप की चैंपियन टीम के कप्तान ऐंड्रयू स्ट्रॉस उससे विचलित नहीं हैं, “ऑस्ट्रेलिया के मुक़ाबले यहाँ के हालात बिल्कुल अलग हैं. हमारे लिए अहम होगा कि हम कितनी जल्दी इन हालात के मुताबिक़ ख़ुद को ढाल लेते हैं. इसके अलावा इस टूर्नामेंट में किसी मुक़ाबले को हम आसान नहीं मान सकते और इस टूर्नामेंट की सफलता के हिसाब से देखा जाए तो ये अच्छा भी है.”

इंग्लैंड 22 तारीख़ को हॉलैंड के विरुद्ध नागपुर में पहला मैच खेलेगी.

मगर अब तक कई बार ख़िताब के नज़दीक़ पहुँचकर अंतिम मौक़े पर लड़खड़ा जाने वाली टीम दक्षिण अफ़्रीका के लिए ये एक और मौक़ा होगा बेहतरीन फ़ॉर्म के सहारे विश्व कप जीतने का.

इसी टूर्नामेंट तक टीम की कप्तानी सँभाल रहे ग्रैम स्मिथ ने बताया कि एबी डि विलियर्स, हाशिम आमला या ज़्याक कालिस, डेल स्टेन, मोर्ने मॉर्केल या इमरान ताहिर वग़ैरह ऐसे खिलाड़ी हैं जिन पर विपक्षी टीम की नज़रें रहेंगी.

दक्षिण अफ़्रीका का पहला मैच वेस्टइंडीज़ के विरुद्ध 24 तारीख़ को नई दिल्ली में है.

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