सट्टेबाज़ी के आरोप में गिरफ़्तारी

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Image caption विश्व की लोकप्रियता को देखते हुए सट्टेबाज़ी के ख़िलाफ़ मुहिम

दिल्ली पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि पुलिस ने सट्टा लगाने वाले चार गिरोहों का भंडाफोड़ किया है और विश्व कप के दौरान ग़ैरक़ानूनी सट्टा लगाने के आरोप में दिल्ली और मुंबई में नौ लोगों को गिरफ़्तार किया है.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अशोक चांद ने बताया है कि पुलिस ने मध्य और उत्तरी दिल्ली के एक होटल और तीन फ़्लैटों में छापा मारकर कई लैपटॉप, मोबाइल फ़ोन और दूसरे उपकरण बरामद किए हैं, जिनकी मदद से क्रिकेट मैचों पर सट्टा लगाया जा रहा था.

उनका कहना है कि उन्हें सट्टा चलाने वाले इस गिरोह के बारे में एक गुप्त सूचना मिली थी.

पुलिस ने आठ सट्टेबाज़ों को गिरफ़्तार किया है जिनके पास से दो करोड़ 80 लाख रुपए बरामद हुए हैं जिसे उन्होंने भारत और बांग्लादेश के बीच शनिवार को हुए मैच के दौरान जमा किया था.

अशोक चांद के अनुसार सट्टेबाज़ मैच के दौरान सट्टा लगवाने और उसे रिकॉर्ड करने के लिए मोबाइल फ़ोन के दो सेट इस्तेमाल कर रहे थे.

मुहिम

मैच के बाद वह अपने फ़ायदे और नुक़सान का हिसाब लगाया करते थे. भारतीय पुलिस ने छह सप्ताह तक चलने वाले इस विश्व कप के दौरान स्पॉट सट्टेबाज़ी के ख़िलाफ़ बड़ी मुहिम चलाई है.

अशोक चांद ने बताया है कि गिरफ़्तार किए गए सट्टेबाज़ों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस तरह की गतिविधियो में शामिल दूसरे लोगों को भी गिरफ़्तार कर लिया जाए.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मुंबई में भी एक क्रिकेट सट्टेबाज़ को भारत-बांग्लादेश मैच के दौरान सट्टा स्वीकार करते हुए गिरफ़्तार किया गया है.

हालांकि भारत में खेलों में सट्टेबाज़ी ग़ैर कानूनी है लेकिन इसका चलन दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है और सट्टेबाज़ों और अपराधियों के बीच गठजोड़ भी बढ़ रहा है.

वर्ष 2000 में स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोप में पकड़े जाने पर दक्षिण अफ़्रीका के कप्तान हैंसी क्रोनिए, भारत के मोहम्मद अज़हरउद्दीन,पाकिस्तान के सलीम मलिक और उप महाद्वीप के तीन अन्य खिलाड़ियों पर या तो जु्र्माना लगाया गया था या उन पर प्रतिबंध लगाया गया था.

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