तुलना सचिन और स्ट्रॉस के शतक की

सचिन और स्ट्रॉस के रन रेट की तुलना करता ग्राफ़
Image caption सचिन और स्ट्रॉस के रन रेट की तुलना करता ग्राफ़ दिखाता है कि तेंदुलकर ने धीमी शुरुआत के बाद तेज़ी से रन बनाए

बंगलौर में भारत और इंग्लैंड के बीच टाई हुए मैच में सचिन तेंदुलकर हों या एंड्रयू स्ट्रॉस दोनों भले ही अपनी टीम को अंत तक न ले जा सके हों मगर दोनों ने अब तक के विश्व कप की दो बेहतरीन पारियाँ खेलीं.

नीचे दिखाए गए दो वैगन व्हील्स और ऊपर लगे उनके स्कोर वाले ग्राफ़ दिखाते हैं कि किस खिलाड़ी ने कहाँ और किस गति से रन बनाए. इनकी मदद से दोनों की पारियों को नज़दीक़ी से समझा जा सकता है.

तेंदुलकर का ये 47वाँ शतक था मगर इंग्लैंड के विरुद्ध ये सिर्फ़ दूसरा ही था. उन्होंने आराम से स्कोर को आगे बढ़ाया और इंग्लैंड के विरुद्ध एक बड़ा स्कोर खड़ा करने वाले शिल्पी की भूमिका निभाई.

जब वह विस्फोटक बल्लेबाज़ वीरेंदर सहवाग के साथ खेल रहे थे तो दूसरे छोर पर 37 वर्षीय ये खिलाड़ी आराम से खड़ा रहा और सहवाग के पैवेलियन लौट जाने के बाद नौवें ओवर में उन्होंने पहली दोनों गेदों को बाउंड्री की राह दिखाई.

उन्होंने लगातार दो गेंदों पर ये शॉट लगाए और वो भी स्क्वायर एरिया से थोड़ा पीछे लेग साइड में बहुत ही सफ़ाई के साथ.

वहाँ से उन्होंने स्कोर बढ़ाने का ज़िम्मा सँभाल लिया और दूसरे विकेट के लिए गौतम गंभीर के साथ हुई साझेदारी में उनकी प्रमुख भूमिका रही.

Image caption तेंदुलकर का वैगन व्हील

पॉल कॉलिंगवुड की गेंदों पर दो छक्के लगे. पहला स्ट्रेट ड्राइव था जबकि दूसरा उसी ख़ूबसूरती से मिडविकेट के पार था.

इसके अलावा ग्रैम स्वॉन की गेंदों पर तीन छक्के और उन्होंने जड़े. दो लॉन्ग ऑन के ऊपर से और जबकि तीसरा मिड विकेट पर से.

तेंदुलकर का वैगन व्हील वाला ग्राफ़ दिखाता है कि उनके 10 चौकों में से एक भी लेग साइड पर स्क्वायर की ओर नहीं लगा और उसकी वजह ये भी थी कि उस इलाक़े में स्ट्रॉस ने दो खिलाड़ी खड़े कर रखे थे.

वहीं बाक़ी हर क्षेत्र में तेंदुलकर के चौकों की छाप साफ़ दिखती है.

इंग्लैंड ने जब 339 के लक्ष्य का पीछा करना शुरू किया स्ट्रॉस ने तेज़ी से रन बनाने शुरू किए क्योंकि टीम को जीतने लायक़ रन रेट के आस-पास रहना था और सात रन प्रति ओवर से कम पर इंग्लैंड जीतने की उम्मीद नहीं कर सकता था.

Image caption स्ट्रॉस का वैगन व्हील

स्ट्रॉस ने कुल 18 चौके मारे और उसमें से दो तो पहले ही ओवर में थे एक लेग ग्लांस और दूसरा ज़बरदस्त स्क्वायर कट.

तेंदुलकर ने पहले धीरे-धीरे स्कोर को बढ़ाया और फिर वहाँ से रन गति बढ़ा दी जबकि स्ट्रॉस ने शुरू से ही हर गेंद पर रन के औसत से शुरुआत की और फिर उसके बाद इयन बेल के साथ एक बड़ी पारी भी खेली.

स्ट्रॉस अटैकिंग शॉट खेलने वाले खिलाड़ी नहीं हैं इसलिए उन्होंने उन्हीं इलाक़ों में शॉट लगाए जहाँ वो सबसे अच्छी तरीक़े से लगा सकते हैं. स्क्वॉयर ऑफ़ द विकेट और बिहाइंड स्क्वॉयर.

आँकड़ों के हिसाब से तो स्ट्रॉस की पारी तेंदुलकर की पारी से बेहतर थी फिर वो चाहे कुल रनों की बात हो या स्ट्राइक रेट की. तेंदुलकर ने 120 और स्ट्रॉस ने 158 रन बनाए थे. वहीं स्ट्रॉस का स्ट्राइक रेट 108.96 और तेंदुलकर का 104.34 था.

मगर मैच देखने वाले किसी भी व्यक्ति से अगर आप पूछें तो ये कहना ठीक नहीं होगा कि इंग्लैंड के कप्तान की पारी तेंदुलकर की पारी से बेहतर थी, इसलिए मैच के नतीजे के हिसाब से चलते हुए हम भी दोनों पारियों की ख़ूबसूरती को टाई मान सकते हैं.

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