दो रोचक मैचों की रोचक दास्तान

  • 3 मार्च 2011
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बंगलौर में इंग्लैंड और आयरलैंड के जिस मैच में लोगों को 75 ओवरों तक कोई ख़ास रुचि नहीं थी उसके अंतिम 25 ओवरों ने न सिर्फ़ रिकॉर्डों की बारिश कर दी बल्कि इस विश्व कप का पहला बड़ा उलट फेर भी कर दिया.

भारत और इंग्लैंड के बीच टाई हुए मैच और इस मैच के कुछ पहलुओं की रोचक तुलना भी की जा सकती है.

भारत ने उस मैच में पहले बल्लेबाज़ी करते हुए अंतिम पाँच ओवरों में 46 रन बनाए थे और सात विकेट गँवा दिए थे.

माना गया कि भारत वहाँ और बड़ा स्कोर खड़ा कर सकता था. मगर भारतीय पारी जब ख़त्म हुई थी तो सभी भारतीय क्रिकेटरों और प्रशंसकों के चेहरे पर संतोष का भाव था कि इंग्लैंड के सामने एक बड़ा स्कोर है और वो शायद ही इसे छू सके.

कुछ ऐसा ही इस मैच में हुआ. इंग्लैंड की टीम अंतिम पाँच ओवरों में महज़ 33 रन जोड़ सकी और चार विकेट भी गँवा दिए. उसका स्कोर और बड़ा हो सकता था.

मगर जब पारी ख़त्म हुई तो इंग्लैंड के खिलाड़ी और समर्थक आम तौर पर आश्वस्त थे कि आयरलैंड इतने बड़े स्कोर का पीछा नहीं ही कर पाएगा.

दो प्रभावी पारियाँ

भारतीय पारी के बाद सभी सचिन तेंदुलकर की पारी की चर्चा करते दिख रहे थे और कुछ ऐसा ही इंग्लैंड के साथ इस मैच में हुआ जहाँ जॉनथन ट्रॉट के 92 गेंदों में 92 रनों ने लोगों का ध्यान खींचा.

रविवार का मैच ख़त्म होने तक स्ट्रॉस मैच के हीरो बन चुके थे और तेंदुलकर की उस पारी का भारत को कुछ ख़ास फ़ायदा नहीं हुआ.

इस मैच के बाद हीरो रहे केविन ओ ब्रायन और उन्होंने तो सिर्फ़ 50 गेंदों पर शतक जड़कर विश्व कप के सबसे तेज़ शतक का रिकॉर्ड भी बना दिया. ट्रॉट की पारी कहीं पीछे छूट गई.

भारत के मैच में इंग्लैंड का दूसरा विकेट 111 के स्कोर पर गिरा और उसके बाद तीसरे विकेट के लिए हुई 167 रनों की पारी ने मैच भारत से छीन लिया.

रोचक बात ये है कि आयरलैंड का 111 के स्कोर पर ही पाँचवाँ विकेट गिरा था और उसके बाद छठे विकेट के लिए 162 रनों की साझेदारी हुई जिसने मैच इंग्लैंड की गिरफ़्त से बाहर कर दिया.

ऐतिहासिक मैच

वैसे इन रोचक बातों से निकलकर सिर्फ़ आयरलैंड की पारी को देखिए तो स्पष्ट हो जाएगा कि ये मैच विश्व कप के सबसे बेहतरीन मैचों में शुमार होगा.

आयरलैंड का पाँच विकेट 111 रनों पर गँवा देने के बाद अगले 25 ओवरों में लगभग नौ रनों के औसत से बल्लेबाज़ी करना और वो भी इंग्लैंड जैसी मज़बूत टीम के ख़िलाफ़ एक बड़ी उपलब्धि है.

केविन ओ ब्रायन की 50 गेंदों में 100 रनों की पारी देखने वाले, उस निडर पारी को शायद ही भूल पाएँ. उनके माता-पिता की आँखों में ख़ुशी के जो आँसू आए वो बेक़ार नहीं गए और जीत ने इस पूरे अनुभव को उनके जीवन की सबसे मीठी याद बना दिया.

विश्व कप में सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड श्रीलंका के नाम था जो उसने ज़िम्बाब्वे के विरुद्ध सात विकेट पर 313 रन बनाकर हासिल की थी.

मगर आयरलैंड ने टेस्ट खेलने वाले एक अहम देश के ख़िलाफ़ विश्व कप जैसे इतने बड़े मंच पर ये जीत हासिल करके दिखा दिया है कि उनकी टीम सिर्फ़ इंग्लैंड को टेस्ट खिलाड़ी निर्यात करने वाली टीम नहीं रह गई है और उनके खिलाड़ी अब इंग्लैंड की टीम में शामिल होकर नहीं बल्कि आयरलैंड की टीम में ही रहकर पहचान बनाने की क्षमता रखते हैं.

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