अच्छी गेंदबाज़ी के बिना टूटेगा ख़्वाब?

  • 8 मार्च 2011
भारतीय टीम इमेज कॉपीरइट AFP

पिछले दिनों भारत को एकमात्र विश्व कप जिताने वाले पूर्व कप्तान कपिल देव ने ये कहा कि क्रिकेट में गेंदबाज़ों को सिर्फ़ मज़दूर समझा जाता है.

इस पर मीडिया में ख़ूब चुटकी ली गई, लेकिन कपिल ने इसके साथ कई अहम बातें भी कहीं. पिचों को लेकर और ख़ासकर भारतीय गेंदबाज़ों की कमज़ोरी को देखते हुए.

इस विश्व कप में भारतीय टीम एक सपना लेकर उतरी है. सपना अपनी ज़मीन पर विश्व कप जीतने का. वर्ष 1983 की विजय को अब 28 साल हो चुके हैं.

इन 28 वर्षों में कई बार भारतीय टीम ने विश्व कप में बढ़िया प्रदर्शन किया. वर्ष 2003 में तो टीम फ़ाइनल में भी पहुँची, लेकिन हार गई.

कपिल का कहना है कि भारत की ज़मीन पर पिचें ऐसी बनाई गई हैं, जिससे बल्लेबाज़ों को फ़ायदा होता है.

लेकिन इस तर्क के बीच यह भी समझना ज़रूरी है कि इन्हीं पिचों पर जीत हासिल करनी है, तो सिर्फ़ बल्लेबाज़ी के बलबूते बहुत देर तक प्रतियोगिता में टिके रहना मुश्किल है.

दमदार बल्लेबाज़ी

भारत की बल्लेबाज़ी की बात करें, तो शायद ही कोई इसे ख़ारिज करेगा. और बात जब इसी उपमहाद्वीप में हो रहे विश्व कप की हो, तो बात ही क्या.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption टीम में सहवाग जैसा धांसू बल्लेबाज़ है

टीम में एक से एक धुरंधर. जिस टीम की सलामी जोड़ी सचिन तेंदुलकर और वीरेंदर सहवाग की हो, उसकी बात ही क्या. फिर गंभीर, धोनी, युवराज, विराट और पठान.

कोई भी टीम ऐसी बैटिंग लाइन-अप पर रश्क कर सकती है. लेकिन बात जैसे ही गेंदबाज़ी की आती है, सारा उत्साह कम होने लगता है. गेंदबाज़ी के साथ-साथ जब फ़ील्डिंग की बात आती है, भारतीय टीम सवालों के घेरे में आ जाती है.

चलिए पहले गेंदबाज़ी की बात करते हैं, भारतीय टीम ने चार साल की तैयारियों के बाद फिर कमान ज़हीर ख़ान को सौंपी है और फिर उनके जोड़ीदार के रूप में आशीष नेहरा को चुना.

साथ में आए मुनाफ़ और प्रवीण के घायल होने के बाद टीम में पहुँचे श्रीसंत. आशीष नेहरा टीम के लिए काफ़ी अहम है, लेकिन हालत ये है कि वे अभी तक किसी मैच में नहीं खेल पाए हैं.

सवाल

धोनी ने एक बार कहा था कि वे 80 प्रतिशत फ़िट है और वे 100 प्रतिशत फ़िट कब होंगे ये पता नहीं.

Image caption आशीष नेहरा पर सस्पेंस बना हुआ है

मैचों की बात करें तो बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच में भारत ने 370 रन बनाए. लेकिन बांग्लादेश की टीम ने भी 283 रन बना डाले.

श्रीसंत की इतनी पिटाई हुई कि पाँच ओवर बाद ही धोनी को उन्हें हटाना पड़ा. ज़हीर चले और मुनाफ़ भी. लेकिन टीम बांग्लादेश की थी. इस मैच में स्पिनर एक था, हरभजन. लेकिन उन्हें एक ही विकेट मिला.

टीम की असली परीक्षा इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मैच में हुई, जब भारतीय गेंदबाज़ों और फ़ील्डरों की असलियत सामने आई. इस मैच में फ़ील्डिंग भी बुरी रही.

आयरलैंड के ख़िलाफ़ मैच में भले ही भारतीय टीम जीत गई हो, लेकिन एक बार फिर कुछ गेंदबाज़ों और फ़ील्डरों ने काफ़ी निराश किया.

मैच के बाद कप्तान धोनी ने भी माना कि फ़ील्डिंग में सुधार की आवश्यकता है. आयरलैंड के ख़िलाफ़ मैच में युवराज सिंह का चलना अच्छा तो है लेकिन हरभजन का एक विकेट भी नहीं ले पाना, चिंता का विषय है.

आयरलैंड के ख़िलाफ़ मैच में पीयूष चावला की धुनाई भी काफ़ी कुछ बयां करती है.

सच पूछिए तो नियमित गेंदबाज़ों में सिर्फ़ ज़हीर ख़ान को छोड़कर किसी ने लगातार ऐसा प्रदर्शन नहीं किया है, जिससे कहा जाए कि भारतीय गेंदबाज़ी आक्रमण में दम है.

कुल मिलाकर बात ये कि अपनी धरती पर विश्व कप जीतने का ख़्वाब गेंदबाज़ों के अच्छे प्रदर्शन के बिना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है.

संबंधित समाचार