वो कौन है

  • 25 मार्च 2011
इमेज कॉपीरइट Getty Images

विश्व कप के क्वॉर्टर फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया पर जीत के हीरो युवराज सिंह का इस टूर्नामेंट में ये चौथा मैन ऑफ़ द मैच ख़िताब था.

मैच के बाद जब वह प्रेस वार्ता में पहुँचे तो वहाँ मौजूद लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया. बैठते-बैठते युवराज मुस्कुराते हुए बोले, “जीवन में पहली बार प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मेरे लिए ताली बजी है तो निश्चित ही मेरे लिए ये काफ़ी अहम क्षण है.”

पूरे संवाददाता सम्मेलन में वह काफ़ी निश्चिंत से और तनाव मुक्त दिखे और उन्होंने जवाब देते हुए चुटकियाँ भी लीं. जब उनसे पूछा गया कि उन्हें चार बार मैन ऑफ़ द मैच मिला है तो अगर वह टीम में नहीं होते तो टीम का क्या होता. इस पर युवराज बोले, ‘हम नहीं होते तो कोई और होता.... जीत पूरी टीम की है किसी एक की नहीं.’

किसी ख़ास के लिए

युवराज ने एक रहस्य तब पैदा कर दिया जब उन्होंने ये कहा कि वह ये टूर्नामेंट एक ख़ास व्यक्ति के लिए खेल रहे हैं.

मैच में तनाव की स्थिति की चर्चा करते हुए युवी बोले, “जब भी मैं किसी मुश्किल स्थिति में होता हूँ तो वही मेरे ख़्याल में आता है. मैं उसके लिए खेल रहा हूँ और उम्मीद है कि अंत में हम सफल होंगे.”

वहाँ मौजूद लोगों में उत्सुकता होना स्वाभाविक भी थी तो उन्होंने पूछा कि कौन हो वो ख़ास.

इस पर युवराज मुस्कुराए मगर जवाब टाल गए. उन्होंने कहा कि जब टीम फ़ाइनल में पहुँचेगी तब वो इस बात का जवाब देंगे कि वह किसके लिए ये टूर्नामेंट खेल रहे हैं.

अब लोगों में उस ‘ख़ास’ को लेकर अटकलें तेज़ हैं और एक नाम जो सबसे ऊपर आ रहा है वो सचिन तेंदुलकर का है क्योंकि युवराज सचिन के क़रीबी माने जाते हैं.

मिट्टी या सोना

टूर्नामेंट के सात मैचों में से अगर चार में किसी एक ही खिलाड़ी को मैन ऑफ़ द मैच मिले तो स्वाभाविक है कि उसकी चर्चा बार-बार होगी.

युवराज के साथ भी यही हुआ और बार-बार उनसे इस पर उनकी प्रतिक्रिया पूछी गई.

एक संवाददाता ने कहा कि आप इस टूर्नामेंट में जो भी छू रहे हैं वो सोना हो जा रहा है तो क्या ये आपके जीवन का सर्वश्रेष्ठ समय है.

इस पर फिर युवराज ने चुटकी लेते हुए कहा, “हो सकता है क्योंकि पिछले साल मैं जहाँ हाथ लगाता था वो मिट्टी हो जाता था.”

पिछले साल युवराज ख़राब फ़ॉर्म से जूझते हुए टीम से बाहर किए गए, इंडियन प्रीमियर लीग में किंग्स एलेवन पंजाब टीम की कप्तानी उनसे ले ली गई और वहाँ उनका प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा था.

युवराज शायद उन्हीं बातों की ओर इशारा कर रहे थे, पर अगर भारतीय टीम फ़ाइनल तक पहुँचने में क़ामयाब हो जाती है तो इस बात में शायद ही किसी को शक़ हो कि युवराज ही मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट भी चुने जा सकते हैं.

संबंधित समाचार