ज़रूरत सिर्फ़ एक टिकट की

  • 29 मार्च 2011
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मोहाली स्टेडियम के बाहर सैकड़ों ऐसे क्रिकेट प्रेमी खड़े मिले जो पिछले एक सप्ताह से टिकट की जुगत में यहाँ सुबह-सुबह पहुँच जाते हैं.

इनमे से कुछ तो उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से यहाँ आए हैं. इनमे से एक राम प्रकाश बताते हैं कि भारत-पकिस्तान सेमी फ़ाइनल की टिकटें जब ब्लैक हो रही हैं तो आम आदमी को कैसे मिलेंगी.

राम प्रकाश के मुताबिक़ उन्होंने कुछ लोगों को एक आध दिन 250 रुपए की टिकट 25,000 रुपए में ब्लैक करते भी देखा है.

स्टेडियम से क़रीब दो सौ मीटर की दूरी पर लगे हुए बैरिकेड्स के भीतर इन खेल प्रेमियों को जाने की इजाज़त नहीं है.

लेकिन इन तमाम लोगों में जज़्बे की कोई कमी नहीं. भारतीय राष्ट्र ध्वज तिरंगे से अपने को ओढ़े हुए ये लोग शंखनाद करते हैं, नारे लगाते हैं और देशभक्ति के गीत गाते हैं. दरकार सिर्फ़ एक टिकट की !

डॉग स्क्वाड का पहरा

मोहाली के पीसीए स्टेडियम एकदम छावनी सी बना दी गई है. स्टेडियम के हर गेट के क़रीब दो सौ मीटर के फासले पर पुलिस की गाड़ियाँ और तमाम बैरिकेड्स ही नज़र आते हैं.

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Image caption डॉग स्क्वाड का पहरा हर जगह है

पहरा देने वालों में सुरक्षा बल जवानों के साथ कदमताल कर रही है स्निफ़र डॉग्स यानी पुलिसिया कुत्तों की फ़ौज. फ़ौज इसलिए कि जितने सुरक्षा कर्मी दिखते हैं शायद उससे कुछ ही कम ये प्रशिक्षित कुत्ते.

लैब्राडोर, जर्मन शेफ़र्ड, डोबरमैन, और ग्रेट डेन नस्लों के कुत्तों की भरमार है. आलम ये है कि अगल-बगल से गुज़रने वाले स्टेडियम में काम कर रहे कर्मचारी भी अपना रास्ता, इन्हें देखते बदल देते हैं.

मेरे एक पत्रकार मित्र भारतीय टीम बस में चढ़ते खिलाड़ियों की तस्वीरें उतार रहे थे. पीछे हटते हुए वो इन खोजी कुत्तों के बेहद क़रीब कब पहुँच गए उन्हें पता ही नहीं चला.

अच्छी तस्वीरें खींच लेने के बाद उन्होंने राहत की सांस लेते हुए जब अपना कैमरा नीचे किया तो उनके तो होश ही उड़ गए. क्योंकि बगल में खड़े तीन पुलिसिया कुत्ते उनके कैमरे को एक टक घूर रहे थे और पत्रकार महोदय के पसीने दोबारा ललाट पर उभर आए.

टीमों का बसेरा

भारत और पकिस्तान की टीमें चंडीगढ़ के सबसे बेहतरीन होटलों में डेरा डाले हुए हैं. शहर के ताज होटल में पाकिस्तान की टीम रुकी हुई है.

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Image caption टीम होटल में भी कड़ी सुरक्षा है

इस होटल में इंसान क्या परिंदा भी पर नहीं मार सकता. पर कुछ एक दोस्त जो आज सुबह-सुबह किसी न किसी बहाने से होटल के अंदर प्रवेश कर गए, उनके मुताबिक़ अंदर ख़ासी गहमा गहमी है.

होटल के कर्मचारियों को सख़्त हिदायत है कि खिलाड़ियों के खान-पान के बारे में कोई भी जानकारी मीडिया तक नहीं पहुंचनी चाहिए.

होटल से ऐसे भी खबरें आ रही हैं कि टीम इंडिया के सदस्यों ने इन दिनों टेलीविज़न पर आने वाली न्यूज़ देखना और अख़बार तक पढ़ना छोड़ रखा है.

जिससे इस अहम सेमी फ़ाइनल को लेकर उठ रहे तरह-तरह के कयास उनके सामने न पड़ें. लगता है गुरु गैरी का एक ही मंत्र है- टीम के सदस्य आपस में घुल मिल कर बातचीत करें, हंसी-मज़ाक करें और अपना ध्यान सिर्फ़ मैच पर ही केंद्रित रखें.

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