मोहाली में पिच की भूमिका अहम

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मोहाली शायद अब तक अपने सबसे बड़े मैच के लिए तैयार है. इस स्टेडियम के इतिहास में शायद ही कभी इतना ज़्यादा उत्सुकता भरा मैच हुआ है.

सेमी फ़ाइनल मुक़ाबले के पीसीए मैदान की पिच की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहेगी. रविवार को ज़्यादातर समय कवर्स से ढकी रहने के बाद सोमवार को मोहाली की पिच को धूप दिखाई गई.

सभी का ध्यान गया 22 यार्ड की इस पिच पर मौजूद घास पर. स्टेडियम के ईर्द-गिर्द मौजूद ग्राउंड स्टाफ़ से बात करने पर पता चला कि पिच के ऊपर घास बरकरार रखी जाएगी.

यानी स्पिनरों के लिए ये बहुत अच्छे संकेत नहीं हैं. रविवार को भारतीय कोच गैरी कर्स्टन, गेंदबाज़ी के कोच एरिक सिमंस और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने पिच को छू कर और ठोंक का उसका जायज़ा लिया.

मददगार

लेकिन सोमवार को पिच पर कई बार रोलर भी चलाए गए हैं और इस पर थोड़े पानी का छिड़काव भी हुआ है. ये शायद इसलिए किया जा रहा है कि तेज़ गेंदबाज़ों के अलावा पिच से थोड़ी-बहुत मदद हरभजन सिंह जैसे स्पिनरों को भी मिल सके.

लेकिन इस बात में कोई शक नहीं कि अगर मोहाली की पिच बुधवार को होने वाले मुक़ाबले के दौरान तेज़ गेंदबाज़ों को मदद करेगी तो उसक फ़ायदा पाकिस्तानी टीम को ही होगा.

हालांकि पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफ़रीदी ने ये तो कह दिया है कि 'रावलपिंडी एक्सप्रेस' यानी शोएब अख़्तर अभी पूरी तरह फ़िट नहीं हैं, लेकिन इस टीम में उमर गुल जैसे गेंदबाज़ों को ख़ासी मदद मिलने कि उम्मीद है.

हालांकि पाकिस्तान की ओर से कप्तान शाहिद अफ़रीदी अपनी स्पिन गेंदों के चलते अब तक के सबसे सफल गेंदबाज़ रहे है लकिन उनके अलावा पाकिस्तानी टीम अपने तेज़ गेंदबाज़ों पर इस मैच के लिए भरोसा कर सकती है.

रहा सवाल भारत का तो ज़हीर ख़ान मोहाली कि पिच को देख कर काफ़ी उत्साहित हुए होंगे क्योंकि उनके लिए ये पिच एकदम उपयुक्त नज़र आ रही है.

अब किस टीम के किस गेंदबाज़ को कितना फ़ायदा मिलता है ये तो बुधवार को पहला ओवर शुरू होने के बाद ही पता चलेगा.

हालांकि अभी तक के विश्व कप क्वार्टर फ़ाइनल में तो मैच जीतने वाली टीमों के गेंदबाज़ों ने बल्लेबाज़ों के तरह ही अहम भूमिका निभाई है.

देखने वली बात यही रहेगी कि अभी तक के विश्व कप में अपनी गेंदबाज़ी का लोहा मनवाने में विफल रहे भारतीय गेंदबाज़ों के लिए मोहाली की पिच में से क्या ख़ास निकल कर आता है.

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