धोनी को नाश्ता भी नसीब नहीं हुआ

धोनी इमेज कॉपीरइट AP

भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को पाकिस्तान पर जीत के बाद भले ही ढेर सारी मिठाइयाँ मिली हों मगर दिन में उन्हें अन्न का पहला दाना टॉस से महज़ 15 मिनट पहले मिल पाया था.

मैच के बाद बीबीसी से विशेष बातचीत में धोनी ने बताया कि मैच देखने आए वीवीआईपी लोगों के चक्कर में उन्हें सुबह का नाश्ता भी नसीब नहीं हुआ.

धोनी का कहना है कि वह सुबह ज़रा देर से उठते हैं और बुधवार को उन्हें उसका ख़ामियाजा भुगतना पड़ गया.

धोनी के अनुसार, "बहुत सारे वीआईपी और महत्त्वपूर्ण लोग आए थे. मैं आमतौर पर सुबह देर से उठता हूँ. हुआ यूँ कि मैं जब 11 बजे उठा और मैंने पूछा कि क्या मुझे नाश्ता मिल सकता है तो मुझे बताया गया कि अगले एक घंटे किसी को कुछ भी नहीं परोसा जाएगा."

उतनी देर में धोनी तैयार होकर स्टेडियम के लिए निकले ये सोचकर कि वहाँ कुछ खा लेंगे मगर उनकी क़िस्मत वहाँ भी ख़राब ही निकली.

वहाँ धोनी ने जब खाना ढूँढ़ा तो पता चला कि वहाँ खाने के लिए कुछ है ही नहीं.

स्टेडियम में भी नहीं

वजह ये कि खाने का सामान लेकर जो गाड़ियाँ स्टेडियम की ओर आ रहीं थीं वो भी भीड़ में फँस गईं.

मोहाली में लोग सुबह से ही स्टेडियम का रुख़ कर चुके थे. मैच देखने इतने वीआईपी लोग पहुँचे थे कि उसकी वजह से भी रास्ते जाम थे.

भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के निमंत्रण पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ये मैच देखने मोहाली पहुँचे.

उनके अलावा केंद्र में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गाँधी, कांग्रेस नेता राहुल गाँधी, उद्योगपति मुकेश अंबानी का परिवार, फ़िल्म अभिनेता आमिर ख़ान भी दर्शक दीर्घा में थे.

धोनी ने बताया, "स्टेडियम में पता चला कि खाना लेकर आ रही कार या वैन कहीं फँसी हुई है इसलिए मुझे जो अन्न का पहला दाना नसीब हुआ वो पौने दो बजे के क़रीब था जबकि मैं टॉस के लिए जाने वाला था."

वैसे लगता है कि धोनी का ये आधे दिन का उपवास उनके लिए काफ़ी भाग्यशाली रहा क्योंकि न सिर्फ़ उन्होंने टॉस जीता बल्कि इतने दबाव के बीच मैच भी जीता और शायद बाद में जीत की पार्टी में छककर खाने का मौक़ा भी मिला हो.

संबंधित समाचार