अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वर्चस्व की लड़ाई

  • 31 मार्च 2011
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भारत और श्रीलंका के बीच विश्व कप का फ़ाइनल दो अप्रैल को मुंबई में होना है. लेकिन इस दमदार फ़ाइनल से पहले दोनों ही टीमों ने एक-दूसरे को तौलना शुरू कर दिया है.

कौन कितने पानी में रहेगा, भारतीय गेंदबाज़ी और फ़ील्डिंग दबाव में कैसा कर पाएगी, घरेलू दर्शकों के बीच भारतीय टीम पर दबाव रहेगा, मुरली अगर नहीं खेले तो भारत को फ़ायदा होगा और पता नहीं क्या-क्या.

समीकरणों के हिसाब-किताब के बीच एक बात जो स्पष्ट है, वो है भारत और श्रीलंका के बीच क्रिकेट की दुनिया में वर्चस्व के संघर्ष की नई शुरुआत.

ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका और भारत के बीच वर्चस्व की लड़ाई में अब श्रीलंका का नाम भी जुड़ गया है.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में श्रीलंका का उदभव और फिर फ़र्श से अर्श तक जाने की उसकी कहानी काफ़ी रोचक है. एक ऐसा भी समय था जब टेस्ट का दर्जा हासिल करने और उसे बरकरार रखने तक के लिए संघर्ष करना पड़ता था.

अलग कहानी

लेकिन अब कहानी बिल्कुल अलग है. दो अप्रैल को होने वाले फ़ाइनल में दो ऐसी टीमें आमने-सामने हैं, जिनके लिए सिर्फ़ ख़िताब जीतना मायने नहीं रखता, ख़िताब के साथ-साथ ये टीम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना दबदबा भी साबित करना चाहती हैं.

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Image caption तिलकरत्ने दिलशान ज़बरदस्त फ़ॉर्म में हैं

श्रीलंका की टीम इस समय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट रैंकिंग में तीसरे नंबर पर है. लेकिन दूसरे स्थान पर मौजूद भारत से वो सिर्फ़ एक अंक पीछे है.

ऑस्ट्रेलिया दोनों टीमों से आगे है, लेकिन इस विश्व कप में उसका प्रदर्शन जैसा रहा है, उससे तो यही लगता है कि टेस्ट के बाद अब एक दिवसीय मैचों में उसकी बादशाहत ख़तरे में है.

एक बार फिर विश्व कप जीतने का ऑस्ट्रेलिया का ख़्वाब तो ख़त्म हो ही गया. साथ ही टीम की कमज़ोरी अब प्रबंधन के लिए बड़ा सिरदर्द है और रैंकिंग की बादशाहत बरकरार रखना उसके लिए आसान नहीं होगा.

भारत और श्रीलंका ने समय के साथ-साथ न सिर्फ़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख बढ़ाई है, बल्कि इन दोनों टीमों की बैकअप लाइन काफ़ी मज़बूत है. युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की एक ऐसी जमात बेंच पर रहती है, जो टीम में आने के लिए दस्तक नहीं दे रही, बल्कि धक्का मार रही है.

टीम

भारतीय टीम की बात करें, तो भारतीय टीम पिछले एक साल में कई एक दिवसीय मैच सचिन तेंदुलकर और वीरेंदर सहवाग जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों के बिना खेली है और बेहतरीन प्रदर्शन भी किया है.

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Image caption सहवाग और सचिन तेंदुलकर ने भारत को कमाल की शुरुआत दी है

दूसरी ओर श्रीलंका ने भी सनत जयसूर्या जैसे अनुभवी खिलाड़ी की कमी महसूस नहीं होने दी है और महान मुरलीधरन की विरासत को संभालने वाले स्पिनर भी उनके पास हैं.

ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में जाकर हराना भारतीय क्रिकेट टीम के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी. फिर भारतीय टीम ने वनडे में कई बार अपना दम दिखाया.

भारत की टीम सौरभ गांगुली की कप्तानी में 2003 में भी विश्व कप के फ़ाइनल में पहुँची थी, लेकिन वहाँ मिली शर्मनाक हार और फिर 2007 विश्व कप की बुरी यादों से उबरने में टीम को बहुत समय लगा.

लेकिन धीरे-धीरे ही सही भारतीय टीम पटरी पर आने लगी. गेंदबाज़ी में अब भी समस्या तो है लेकिन बल्लेबाज़ी में पलड़ा बहुत भारी रहने के कारण मामला संतुलित हो जाता है.

प्रदर्शन

वर्ष 1983 में कप जीतने के 20 साल बाद भारतीय टीम 2003 में फ़ाइनल में पहुँची, लेकिन आठ साल बाद उसने फिर ये कमाल कर दिखाया है.

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Image caption वर्ष 1983 में भारत ने पहली बार विश्व कप जीता था

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेस्टइंडीज़ क्रिकेट टीम का ख़राब प्रदर्शन, न्यूज़ीलैंड के बड़े मौक़ों पर पिट जाने, पाकिस्तानी क्रिकेट में नित-नए विवाद और अब ऑस्ट्रेलिया को मिल रही ज़बरदस्त चुनौती के बीच जिन दो टीमों ने अपना दमख़म लगातार दिखाना शुरू किया है, वो है भारत और श्रीलंका की टीमें.

श्रीलंका की टीम पिछले विश्व कप के भी फ़ाइनल में पहुँची थी. अर्जुन रणतुंगा की कप्तानी में वर्ष 1996 का विश्व कप जीतने के बाद एकाएक श्रीलंका ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने प्रदर्शन से सबको चकित करना शुरू किया.

वर्ष 2002 में श्रीलंका की टीम भारत के साथ आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफ़ी में संयुक्त विजेता रही.

वर्ष 2007 के विश्व कप में श्रीलंका की टीम फ़ाइनल तक पहुँची और वर्ष 2009 के आईसीसी ट्वेन्टी-20 विश्व कप में भी टीम फ़ाइनल में हारी. इस समय श्रीलंका के नाम टेस्ट, वनडे और ट्वेन्टी-20 में सर्वाधिक स्कोर का रिकॉर्ड है.

रिकॉर्ड

भारतीय टीम के रिकॉर्ड की बात करें तो वर्ष 1983 में विश्व कप के साथ-साथ टीम ने पहला ट्वेन्टी-20 विश्व कप भी जीता था. वर्ष 2002 में टीम आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफ़ी की संयुक्त विजेता रही थी.

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Image caption मुरलीधरन का ये आख़िरी विश्व कप है

मौजूदा टीम की बात करें, तो भारत की टीम में सचिन तेंदुलकर जैसा बेहतरीन बल्लेबाज़ है, तो महेंद्र सिंह धोनी जैसा शांत और संयत कप्तान भी है.

टीम में वीरेंदर सहवाग जैसा विस्फोटक बल्लेबाज़ है, तो युवराज सिंह जैसा आकर्षक और शानदार बल्लेबाज़. टीम में सुरेश रैना जैसा भरोसेमंद युवा खिलाड़ी है, तो गंभीर जैसा भरोसेमंद बल्लेबाज़. विराट जैसे युवा खिलाड़ी ने टीम का संतुलन और अच्छा कर दिया है.

गेंदबाज़ों में हमेशा से समस्या से जूझने वाली भारतीय टीम भाग्यशाली है कि उसके पास ज़हीर ख़ान जैसा गेंदबाज़ है, तो भज्जी जैसा स्पिनर.

दूसरी ओर श्रीलंका की टीम के धाकड़ बल्लेबाज़ों में तिलकरत्ने दिलशान का नाम सबसे पहले आता है. पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने और मौजूदा कप्तान कुमार संगकारा किसी भी टीम की बखिया उधेड़ने में सक्षम हैं.

उपुल थरंगा ने तो दिलशान के साथ ऐसी सलामी जोड़ी बना ली है, जिनसे दुनिया की कोई भी टीम घबरा जाए. गेंदबाज़ों में उनके पास लसिथ मलिंगा जैसा यार्कर का बादशाह गेंदबाज़ है, तो मुरलीधरन जैसा विश्व प्रसिद्ध स्पिनर.

अजंता मेंडिस और रंगना हेरात मुरली की विरासत संभालने में सक्षम हैं. तो देखा जाए, तो दोनों ही टीमों का पलड़ा एक जैसा दिखता है. जो भी टीम इस विश्व कप का ख़िताब जीतेगी, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उसके वर्चस्व का नया दौर शुरू होगा.

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