बल्ले का बादशाह, फिरकी का जादूगर

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क्रिकेट विश्व कप फ़ाइनल में जंग दुनिया के सर्वोत्तम बल्लेबाज़ और सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ी में होने जा रही है.

इस बार घरेलू मैदान पर सचिन तेंदुलकर अपने छठे विश्व कप में जीत की कोशिश में हैं और उनके सामने है मुथैय्या मुरलीधरन जो एक बार फिर से श्रीलंका के लिए आख़िरी मैच खेलते हुए विश्व कप जीतना चाहते हैं.

यूं तो ये मुक़ाबला भारत बनाम श्रीलंका है क्योंकि क्रिकेट एक 'टीम स्पोर्ट' है लेकिन इस जटिल 'टीम स्पोर्ट' में दो व्यक्ति अपने हुनर में अद्वितीय हैं.

सचिन पर दवाब

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Image caption तेंदुलकर से सौवें शतक की उम्मीद ने इस मैच में रोमांच और बढ़ा दिया है.

तेंदुलकर बहुत भारी दवाब में हैं क्योंकि 28 साल के इंतज़ार के बाद भारत विश्व कप जीतने के लिए उतावला है और साथ ही वो अपने घरेलू मैदान पर ये ख़िताब जीतने वाली पहली टीम बनना चाहता है.

अगले महीने 38 साल के होने वाले सचिन तेंदुलकर ने वानखेड़े स्टेडियम से ही अपने प्रथम श्रेणी के क्रिकेट की शुरूआत की थी.

तेंदुलकर ने किसी भी अन्य बल्लेबाज़ से अधिक रन बनाए हैं. अकेले एक दिवसीय मैचों में ही उन्होंने 18 हज़ार से अधिक रनों का अंबार लगाया है.

टेस्ट और वनडे मैचों को मिलाकर उन्हें अब शतकों का शतक लगाने के लिए महज़ एक और सेंचुरी की ज़रुरत है.

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी छोड़ने वाले उनके सबसे नज़दीकी प्रतिद्वंद्वी रिकी पॉन्टिंग 69 शतकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं.

सेमीफ़ाइनल में पाकिस्तान पर मिली 29 रनों की जीत के दौरान सचिन तेंदुलकर अपने 100 शतक पूरा करने से चूक गए थे लेकिन उस दौरान उनके चार कैच छोड़े गए और एक एलबीडब्ल्यू फ़ैसला पलटा गया.

ऐसी पारी महान बल्लेबाज़ के साथ न्याय नहीं करती.

सचिन से सेंचुरी की उम्मीद भारत की व्यवसायिक और फ़िल्म नगरी मुंबई में होने वाले फ़ाइनल में चार चांद लगा देती है.

मैच से पहले सचिन कहा है, "इस मैच के लिए मुंबई जाना एक अदभुत अहसास है. और मैं तो सिर्फ़ इतना कहूंगा कि हम काम पर ध्यान लगाते हुए शांत रहेंगे और अपना लक्ष्य पूरा करेंगे."

मंत्रमुग्ध करते मुरली

Image caption मुरली अपने करियर के आख़िरी दस ओवर करने से चूकना नहीं चाहेंगे.

उधर चोट से जूझ रहे मुथैय्या मुरलीधरन ने लाहौर में 1996 में 23 वर्ष की उम्र में विश्व विजेता होने का स्वाद चखा था.

तब से लेकर अब तक उन्होंने टेस्ट और वनडे दोनो फ़ॉर्मेट में सर्वाधिक विकेट लिए हैं.

और मुरली को ग्लैन मैकग्रा का विश्व कप में 71 विकेट लेने का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए अब सिर्फ़ तीन विकेट और चाहिएं.

कोलंबो में हुए न्यूज़ीलैंड के विरुद्ध सेमीफ़ाइनल में उन्होंने अपनी अंतिम गेंद पर विकेट ली थी जिसके बाद श्रीलंकाई टीम ने उन्हें कंधे पर उठा लिया था.

मुरलीधरन ने अपने लंबे करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. अपने पहले ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर अंपायरों ने उनके 'बॉलिंग एक्शन' को अवैध क़रार दे दिया था.

उनके जुझारुपन को देखते हुए लगता नहीं कि छोटी-मोटी चोट उन्हें अपने आख़िरी मैच में दिलकश ऑफ़ स्पिन के दस ओवर डालने से रोक पाएगी.

श्रीलंका के ऑस्ट्रेलियाई कोच ट्रवेर बेलिस ने गुरुवार को कहा था,"उम्मीद है कि मुरली खेंलेगे. उन्होंने सेमीफ़ाइनल में दस ओवर डाले हैं. और ये शख़्स ऐसा है कि अगर थोड़ी-बहुत दिक्कत होगी भी, तो भी खेलेगा."

ज़ाहिर है मुरलीधरन अपने आख़िरी मैच में बाहर बैठने के मूड में क़तई नहीं है.

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