वानखेड़े की पिच का रहस्य

  • 2 अप्रैल 2011
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Image caption वानखेड़े की इस पिच का मिजाज़ तय कर सकता है मैच की रफ़्तार.

क्रिकेट विश्व कप 2011 के फ़ाइनल में शनिवार को भारत और श्रीलंका मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में एक दूसरे के सामने होंगे.

भले ही ये भिडंत ख़िताब के लिए हो लेकिन दूसरे क्रिकेट मैचों की तरह ही इस मैच में भी पिच के मिजाज़ की अहम भूमिका रहेगी.

शुक्रवार की शाम पिच पर एक नज़र मारने के बाद मुझे पिच की सतह भूरी सी नज़र आई.

इसमें कोई हैरानी की बात इसलिए नहीं है क्योंकि फ़ाइनल के लिए तैयार की गई ये पिच किसी अन्य पश्चिमी भारतीय क्रिकेट पिच की तरह ही दिखती है.

माना जाता रहा है की इस तरह की पिचें शुरू से ही स्पिनरों के लिए ख़ासी मददगार साबित होती हैं क्योंकि इनसे स्पिनरों को ख़ासा घुमाव और बाउंस मिलता है.

कितना स्कोर होगा काफ़ी?

Image caption आशीष नेहरा का ना खेलना भारत के लिए एक बड़ा झटका है.

अगर वानखेड़े की पिच भी मैच शुरू होने तक ऐसी ही रही तो ज़ाहिर है भारतीय टीम के मध्यम गति के गेंदबाजों और हरभजन सिंह जैसे स्पिनरों को इससे ख़ासी मदद मिलने की उम्मीद रखनी चाहिए.

हालांकि आशीष नेहरा के मैच न खेल पाने कि वजह से पिच के स्वरूप के मद्देनज़र भी भारत के लिए एक बड़ा झटका है.

पर श्रीलंका के लिए भी ये खब़र इतनी ही सुखद रहेगी क्योंकि उनके तरकश में भी मुरलीधरन, अजंता मेंडिस और हेराथ जैसे गेंदबाज़ मौजूद हैं.

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में तैयार हुई इस पिच का दारोमदार अनुभवी सुधीर नाइक के ज़िम्मे था.

वानखेड़े के इसी विकेट पर विश्व कप 2011 के हुए अन्य मैचों में टीमों ने 250 से ज़्यादा के स्कोर भी खड़े किए गए हैं.

न्यूज़ीलैंड ने तो कनाडा के विरुद्ध इसी पिच पर 300 से अधिक का स्कोर भी बनाया था. सवाल ये उठता है कि पहले बल्लेबाज़ी करने वाली टीम के लिए कितना स्कोर एक सुरक्षित कहा जा सकता है?

पिच पर निगाहें

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Image caption माहेला जयावर्धने के अनुसार पिच पहले से कुछ भिन्न है.

स्टेडियम में मौजूद एकाध ग्राउंड स्टाफ से बात अकरने के बात बात समझ में आई की 260-270 रनों का स्कोर इस पिच पर एक अच्छा स्कोर कहा जा सकता है. क्योंकि लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम विश्व कप फ़ाइनल होने के नाते थोड़े बहुत दबाव में भी होगी ही. हालांकि श्रीलंका के वरिष्ठ बल्लेबाज़ महेला जयवर्धने पहले ही कह चुके हैं कि फ़ाइनल मैच के लिए तैयार की गई पिच उस पिच से काफी भिन्न है जिसपर उनकी टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाड़ मैच जीता था.

शायद जयवर्धने इस बात पर बल देना चाह रहे थे कि उस मुकाबले के लिए बनी पिच में थोडा हरापन और घास थी जो अब नहीं दिख रही.

वैसे मैच से पहले हुई प्रेसवार्ता में भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने पिच के मिजाज़ पर ज़्यादा कुछ कहा तो नहीं, लेकिन उनके मन में भी इस पिच से मिलने वाली मदद या होने वाले नुकसान कि बात टॉस के वक़्त तो आएगी ही.

पर धोनी हो या जयवर्धने या फिर संगकारा ही क्यों न हों, विजेता टीम को पिच के मिजाज़ के अलावा बल्लेबाज़ी, फ़ील्डिंग और गेंदबाज़ी में अपना हुनर दिखाना ही पड़ेगा.

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